विधायकों को सिर्फ 50 रुपए में मिल रहा पांच सौ का खाना
- पनीर, सब्जी, दाल, रायता, मीठा, पापड़, चपाती, सलाद के महज 40 रुपये
- आम आदमी को साढ़े चार से पांच सौ रुपये में मिलेगी खाने की ऐसी थाली
- नो प्रॉफिट, नो लॉस पर हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम देता है खाना
- कई रियायतों के बावजूद कम वेतन-भत्तों का हवाला देकर बढ़ा ली सैलरी
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अपने वेतन-भत्तों को मनमाने तरीके से बढ़ाकर पब्लिक के निशाने पर आए सूबे के विधायक 500 रुपये का खाना भी 40 से 50 रुपये में खाते हैं। विधानसभा के हाल ही में हुए बजट सत्र में विधायकों को हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम ने खाना मुहैया कराया।
एक विधायक को वेज थाली में पनीर की सब्जी, एक अन्य सब्जी, दाल, रायता, मीठा, पापड़, चपाती और सलाद जबकि नॉनवेज थाली में वेज आइटम के साथ एक नॉनवेज आइटम परोसी गई। बदले में विधायकों से महज 40 से 50 रुपये लिए गए।
औसतन हर दूसरे साल अपना वेतन और भत्ते बढ़ाने वाले विधायकों को सरकार जो खाना परोसती है, वह आम आदमी से दस गुना तक ज्यादा सस्ता है।
खाने के भी नहीं चुकाते पूरे पैसे
आम आदमी को भले ही थाली का खाना खाने के लिए साढ़े चार से पांच सौ रुपये तक चुकाने पड़ते हों लेकिन विधायकों को वही थाली 40 से 50 रुपये में मिल रही है। हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम नो प्रॉफिट नो लॉस को ध्यान में रखकर कॉस्ट टू कॉस्ट के सिद्धांत पर विधायकों को खाना मुहैया कराता है।
खाने के भी नहीं चुकाते पूरे पैसे- सत्र के दौरान खाने का पूरा पैसा भी विधायक नहीं चुकाते। साठ प्रतिशत पैसा वह खुद चुकाते हैं, जबकि बाकी पैसा विधानसभा चुकाती है। सूत्र बताते हैं कि कॉस्ट टू कॉस्ट के सिद्धांत पर विधायक को परोसे जाने वाले खाने का खर्च 75 रुपये प्रति वेज थाली और 90 रुपये प्रति नॉन वेज थाली होता है।
लेकिन इन दोनों ही तरह की थालियों के खाने के लिए विधायकों से सिर्फ 40 से 50 रुपये लिए जाते हैं। इसी थाली को सामान्य लोगों को साढ़े चार सौ से पांच सौ रुपये में परोसा जाता है।