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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   50 percent candidates are getting out of the provision of compassionate jobs, Congress MLAs raised the matter in the assembly

हिमाचल: करुणामूलक नौकरियों के प्रावधान से बाहर हो रहे 50 फीसदी उम्मीदवार, कांग्रेस विधायकों ने विधानसभा में उठाया मामला

Wed, 09 Mar 2022 09:12 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Wed, 09 Mar 2022 09:12 PM IST
सार

राज्य विधानसभा के मुख्य स्पीकर गेट से करीब 100 मीटर दूर रेलवे बोर्ड बिल्डिंग के पास करुणामूलक नौकरी की मांग कर रहे उम्मीदवारों का बुधवार को इस संबंध में क्रमिक अनशन 223वें दिन में प्रवेश कर गया। वहीं हिमाचल प्रदेश विधानसभा में भी कांग्रेस विधायक रोहित ठाकुर और अनिरुद्ध सिंह ने बजट पर चर्चा के दौरान करुणामूलक नौकरियों के मामले में समाधान नहीं निकाल पाने का मामला उठाया।

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50 percent candidates are getting out of the provision of compassionate jobs, Congress MLAs raised the matter in the assembly
करुणामूलक नौकरी की मांग कर रहे उम्मीदवारों का क्रमिक अनशन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश में करुणामूलक नौकरियों के मौजूदा प्रावधान से 50 फीसदी उम्मीदवार बाहर हो रहे हैं। राज्य सरकार ने प्रति परिवार सदस्य आमदनी की सीमा 62,500 रुपये बरकरार रखकर यह पेच हटा दिया है। राज्य विधानसभा के मुख्य स्पीकर गेट से करीब 100 मीटर दूर रेलवे बोर्ड बिल्डिंग के पास करुणामूलक नौकरी की मांग कर रहे उम्मीदवारों का बुधवार को इस संबंध में क्रमिक अनशन 223वें दिन में प्रवेश कर गया। वहीं हिमाचल प्रदेश विधानसभा में भी कांग्रेस विधायक रोहित ठाकुर और अनिरुद्ध सिंह ने बजट पर चर्चा के दौरान करुणामूलक नौकरियों के मामले में समाधान नहीं निकाल पाने का मामला उठाया। सदन में यह मामला कई अन्य विधायकों ने भी बजट पर चर्चा के दौरान उठाया।  प्रदेश में करीब 4500 लोग करुणामूलक नौकरियां चाह रहे हैं। इनके माता या पिता की सेवा के दौरान मृत्यु हुई है।

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करुणामूलक संघ हिमाचल प्रदेश के अध्यक्ष अजय कुमार और मुख्य सलाहकार शशि पाल का दावा है कि इनमें से कम से कम 2300 लोग बाहर हो रहे हैं। प्रति परिवार सदस्य आमदनी की सीमा 62,500 रुपये तय है। इसमें पारिवारिक पेंशन से प्राप्त आय और कृषि से आमदनी को भी शामिल किया गया है। प्रति सदस्य आय के इस प्रावधान को पूरी तरह से हटाकर फ्लैट प्रावधान किया जाना चाहिए। ऐसा नहीं करने से कुल 4500 आवेदकों में से करीब 2200 से 2300 लोग सीधे बाहर हो रहे हैं। उन्हें नौकरी नहीं मिल पाएगी। उन्होंने कहा कि 24 जनवरी 2022 को अधिसूचना जारी हुई कि चतुर्थ श्रेणी पर भर्ती के लिए विभागों में पदों की सीलिंग को पांच फीसदी से हटा दिया गया, लेकिन तृतीय श्रेणी के लिए ऐसा प्रावधान नहीं किया गया है।  सात मार्च 2019 की नीति की इस व्यवस्था को बदला जाना चाहिए। जो लोग इस नीति के तहत आ रहे हैं, उन्हें एकमुश्त नौकरी दी जाए और जो नहीं आ रहे हैं, उनके लिए नीति में बदलाव हो। जब तक ऐसा नहीं होता यह अनशन जारी रहेगा। 

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