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हिमाचल में सांस की बीमारी के मरीजों को लेकर शोध में बड़ा खुलासा

Tue, 01 May 2018 12:50 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Updated Tue, 01 May 2018 12:50 PM IST
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45 percent respiratory patients in himachal pradesh are non smokers

हिमाचल प्रदेश में भी ये मिथक टूट चुका है कि धूम्रपान करने वालों को ही दमा या सांस फूलने की अन्य बीमारियां होती हैं। राज्य के अस्पतालों में आ रहे सांस के रोगियों में से 45 फीसदी धूम्रपान नहीं करते हैं।

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यानी हिमाचल प्रदेश की स्थिति भी इस मामले में देश के कई अन्य प्रदूषणयुक्त राज्यों की तरह ही है। प्रदेश कआईजीएमसी की ओपीडी से जुटे आंकड़ों के बाद अब संस्थान रोग के दूसरे कारणों का पता लगाने के लिए अध्ययन की तैयारी कर रहा है। 
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हिमाचल में भी प्रदूषण और पारिवारिक सदस्यों के धूूम्रपान करने जैसे कारणों से बगैर नशे वाले सूफी लोग भी दमे या सांस फूलने की दूसरी बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। राज्य के सबसे बड़े अस्पताल आईजीएमसी शिमला के श्वास रोग विभाग के प्रोफेसर डा. आरएस नेगी ने कहा है कि वर्तमान में ओपीडी में आ रहे सांस लेने में तकलीफ वाले
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मरीजों की बात करें तो इनमें करीब 45 फीसदी लोग ऐसे हैं, जिन्होंने कभी धूम्रपान नहीं किया। देश में भी बगैर नशे के सीओपीडी के मरीजों की प्रतिशतता 45 फीसदी ही रहती है। डा. नेगी ने कहा कि ऐसे मरीजों पर आईजीएमसी शिमला एक अध्ययन करेगा और उनके परिवेश तथा पारिवारिक माहौल को जानने के बाद इसका कारगर उपचार खोजा जाएगा।

पिछले शोध में घरों का धुआं भी बना दमे का कारण

45 percent respiratory patients in himachal pradesh are non smokers

आईजीएमसी शिमला की ओर से वर्ष 1986 में 18 से 80 साल के पुरुषों और महिलाओं पर शोध किया गया तो दमे या सांस फूलने की बीमारी के धूम्रपान, घरों का धुआं जैसे कारण ही ज्यादा रहे हैं। हालांकि, वर्तमान में इस पर शोध करने की जरूरत है कि अब बगैर धूम्रपान के भी सीओपीडी रोगियों के सामने आने के क्या कारण हैं? 

सीओपीडी के मरीज ही आ रहे सबसे ज्यादा- हाल ही में सामने आए टांडा मेडिकल कॉलेज, राजकीय मेडिकल कॉलेज जम्मू और सीएमसीएच पठानकोट के एक संयुक्त शोध में ये बात सामने आई है कि ग्रामीण उत्तरी-पश्चिमी भारतीय क्षेत्रों जिनमें हिमाचल प्रदेश भी आता है इनकी कुल जनसंख्या में से 3.36 प्रतिशत लोगों में क्रोनिक ब्रोंकाइटिस,

1.18 प्रतिशत लोगों में ब्रोंकियल दमा और 4.21 फीसदी लोगों में क्रोनिक ऑब्स्ट्रक्टरी पल्मनरी डिजीज (सीओपीडी) पाई गई है। यानी सीओपीडी के मरीज ही सबसे ज्यादा आ रहे हैं। सीओपीडी का प्रमुख लक्षण सांस लेने में तकलीफ होना और थूक के साथ कफ का बनना होता है। ये बीमारी लगातार बढ़ती जाती है।

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