आधार पर चौंकाने वाली रिपोर्ट, देशभर में 35 फीसदी बच्चों के नहीं बने कार्ड
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केंद्र और प्रदेश सरकारों की लाख कोशिशों के बावजूद अब भी देश में 18 साल से कम उम्र के 35 प्रतिशत से ज्यादा बच्चे आधार से वंचित हैं। यह तब है, जब युवाओं के आधार कार्ड बनाने के लिए एमएचआरडी के निर्देश पर यूआईडी ने स्कूलों में कैंप लगाए थे।
कवायद के बावजूद 35 प्रतिशत से ज्यादा युवाओं के आधार न बनने पर अब केंद्र ने साल में दो बार स्कूलों में आधार कैंप लगाने के निर्देश दिए हैं। मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने देश के सभी राज्य और केंद्र शासित राज्यों के शिक्षा सचिवों को निर्देश दिए हैं।
हिमाचल में पांच साल से कम आयु के करीब पौने छह लाख बच्चे हैं। इनमें सिर्फ दो लाख दस हजार के आधार कार्ड बने हैं। पैंसठ फीसदी बच्चे आधार कार्ड से वंचित हैं। पांच से 18 साल के बीच के सत्रह लाख बच्चों में से करीब साढ़े चौदह लाख के कार्ड बने हैं।
यूपी, दिल्ली उत्तराखंड से बेहतर हैं हालात
यूपी, उत्तराखंड और दिल्ली जैसे राज्यों के लिहाज से हिमाचल में आधार एनरोलमेंट काफी बेहतर है। उत्तराखंड में अभी तक 0 से 5 साल उम्र के बच्चों के 11 प्रतिशत और 5 से 18 प्रतिशत आयु के 62 फीसदी का आधार एनरोलमेंट हुआ है।
जम्मू-कश्मीर में हालात और भी खराब हैं। यहां 0 से 5 साल के उम्र के एक प्रतिशत से कम बच्चों के आधार बने हैं। 5 से 18 साल के बच्चों के सिर्फ 47 प्रतिशत कार्ड बने हैं। इन्हीं आंकड़ों को आधार बनाने हुए मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने सितंबर तक कैंप लगाकर इसे पूरा करने के निर्देश दिए हैं।
इसलिए जरूरी है आधार कार्ड
केंद्र सरकार पहल, मनरेगा और पीडीएस जैसी कई योजनाओं के लिए आधार को इस्तेमाल कर रही है। आने वाले समय में केंद्र पोषित स्कीमों को भी पूरी तरह आधार लिंक कर देने की तैयारी है।
ऐसे में बच्चों और बड़ों के शत-प्रतिशत आधार एनरोलमेंट होने पर योजना का इस्तेमाल अपात्र को होने की संभावना खत्म हो जाएगी। इसके अलावा स्कूल एनरोलमेंट और अटेंडेंस के अलावा उनकी स्कॉलरशिप, फ्री किताबें, मिड-डे मील, मुफ्त यूनिफार्म जैसी कई योजनाओं को प्रभावी तरीके से बिना गड़बड़ी लागू किया जा सकेगा।
ये है प्रदेशों में बने आधार कार्ड की स्थिति
प्रदेश 0-5 साल 5 से 18 साल
(प्रतिशत में) (प्रतिशत में)
हिमाचल 36.6 85.1
दिल्ली 30.4 96.1
उत्तर प्रदेश 17.5 47
बिहार 8.5 47.9
पंजाब 36.4 85.6
हरियाणा 59 89.3