{"_id":"6a9830f07c9b3aac1f08754e","slug":"24-cases-of-scrub-typhus-test-positive-in-the-district-department-issues-alert-shimla-news-c-19-sml1002-780208-2026-09-02","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"हिमाचल प्रदेश: स्वाइन फ्लू के बाद अब शिमला में स्क्रब टायफस का खतरा, 24 लोग पॉजिटिव; ऐसे करें बचाव","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हिमाचल प्रदेश: स्वाइन फ्लू के बाद अब शिमला में स्क्रब टायफस का खतरा, 24 लोग पॉजिटिव; ऐसे करें बचाव
Wed, 02 Sep 2026 11:59 PM IST
शिमला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
Published by: शिमला ब्यूरो
Updated Wed, 02 Sep 2026 11:59 PM IST
सार
शिमला जिले में स्क्रब टायफस के मामले बढ़ रहे हैं। अब तक 24 लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। आईजीएमसी शिमला समेत जिले के विभिन्न अस्पतालों में आरटीपीसीआर जांच के दौरान संक्रमण की पुष्टि हुई। चौपाल, संजौली, कनलोग, चायल, कुमारसैन और ग्रामीण क्षेत्रों से अधिक मामले सामने आए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने खेतों और झाड़ियों में काम करने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने और लक्षण होने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेने को कहा है।
विज्ञापन
स्क्रब टायफस (सांकेतिक तस्वीर)।
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
विस्तार
स्वाइन फ्लू के साथ अब स्क्रब टायफस ने भी लोगों को डराना शुरू कर दिया है। अब तक 24 लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आ चुकी है। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) शिमला समेत जिले में हुए आरटीपीसीआर टेस्ट में इन लोगों में स्क्रब टायफस की पुष्टि हुई है। इसमें शिमला के साथ अन्य जिलों के मामले भी शामिल हैं। इसमें अधिकतर मामले चौपाल, संजौली, कनलोग, चायल, कुमारसैन और ग्रामीण क्षेत्रों से हैं। इसके अलावा शिमला शहर से भी तीन मामले आए हैं। स्क्रब टायफस के बढ़ते मामलों को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। खासकर खेतों में काम करने वाले लोगों को अधिक सावधानी बरतने के लिए कहा है।
विज्ञापन
वहीं जिला स्वास्थ्य विभाग ने बचाव के लिए एडवाइजरी भी जारी कर दी है। अस्पतालों में मरीज खांसी, जुकाम, बुखार और अन्य लक्षणों को लेकर पहुंच रहे हैं। इनमें सामान्य वायरल के साथ-साथ मरीज अलग-अलग बीमारियों से पीड़ित पाए जा रहे हैं। ऐसे में आवश्यकतानुसार टेस्ट भी करवाए जा रहे हैं। आईजीएमसी के मेडिसिन विभाग के डॉक्टर वायरल से पीड़ित कुछ संदिग्ध मरीजों की सैंपलिंग करवा रहे हैं, ताकि बीमारी की सही स्थिति का पता लगाकर समय पर उपचार शुरू किया जा सके। प्रदेश के अन्य अस्पतालों से भी गंभीर मामलों को उपचार के लिए आईजीएमसी रेफर किया जाता है। इसके लिए डॉक्टरों ने पूरी तैयारी कर रखी है। इसी बीच कई मरीजों की रिपोर्ट पॉजिटिव भी आ रही है।
विज्ञापन
स्क्रब टायफस के लक्षण
स्क्रब टायफस एक संक्रामक बीमारी है, जो लार्वा माइट्स के काटने से फैलती है। यह कीड़े मुख्य रूप से झाड़ियों, घास, खेतों और घनी वनस्पति वाले इलाकों में पाए जाते हैं। कीड़े के काटने के स्थान पर काली पपड़ी जैसा निशान बन जाता है, जिसे एस्चर कहा जाता है। स्क्रब टायफस की चपेट में 25 से 45 वर्ष की आयु वर्ग के लोग अधिक आते हैं। इसमें संक्रमित व्यक्ति को 104 से 105 डिग्री तक तेज बुखार हो सकता है। जोड़ों में दर्द, कंपकंपी के साथ बुखार आना, शरीर में अकड़न और शरीर टूटा-टूटा लगना इसके प्रमुख लक्षण हैं।
विज्ञापन
ऐसे करें अपना बचाव
- घास या धरातल पर सीधे बैठने या लेटने से बचें।
- खेतों या झाड़ियों वाले क्षेत्रों में काम करते समय पूरी बाजू के कपड़े, लंबी पैंट और ढके हुए जूते पहनें।
- घर के आसपास उगी घास, खरपतवार और झाड़ियों की समय-समय पर छंटाई करें।
- खेतों या घने इलाकों से लौटने के बाद तुरंत नहाएं और कपड़े धोएं।
- बिना डॉक्टरी सलाह के कोई दवा न लें। बुखार न उतरने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र जाएं।
बरसात में स्क्रब टायफस को लेकर अलर्ट जारी किया है। लोगों से आग्रह है कि खेतों में काम करते समय हाथ-पैरों को अच्छे से ढक लें। स्क्रब टायफस से संबंधित लक्षण आते हैं तो तुरंत चिकित्सक की सलाह लें। समय पर जांच और इलाज मिलने पर स्क्रब टायफस पूरी तरह ठीक हो सकता है। जिले के सभी स्वास्थ्य केंद्रों में इलाज के लिए जरूरी दवाइयों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित कर दी गई है। स्वास्थ्य विभाग स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। -डॉ. यशपाल रांटा, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, शिमला