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कारगिल विजय दिवस 2021: एक बेटा शहीद हो गया, दूसरे की भी हो गई मौत
Mon, 26 Jul 2021 12:26 PM IST
अरविन्द ठाकुर
अमर उजाला नेटवर्क, रामशहर (सोलन)
अमर उजाला नेटवर्क, रामशहर (सोलन)
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Mon, 26 Jul 2021 12:26 PM IST
सार
बड़े भाई को सरकारी नौकरी मिल गई थी, लेकिन चार साल पहले बीमारी के कारण उनका निधन हो गया। शहीद प्रदीप कुमार का विवाह नहीं हुआ था।
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शहीद सैनिक प्रदीप कुमार
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
रामशहर के पंदल गांव के कारगिल शहीद सैनिक प्रदीप कुमार के पिता को बुढ़ापे में सहारा देने वाले दोनों बेटों में से कोई नहीं बचा है। एक बेटा शहीद हो गया था। दूसरे की बीमारी से मौत हो गई। अब बुढ़ापे में दोनों पति-पत्नी एक-दूसरे का ख्याल रख रहे हैं। शहीद के नाम पर की गई सरकार की घोषणाएं तो सभी पूरी हो गईं, लेकिन दो दशक बाद भी डिस्पेंसरी शुरू नहीं हो पाई।
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पंदल गांव के प्रदीप कुमार पुत्र जगन्नाथ कौशल नौ अगस्त, 1999 को कारगिल युद्ध में शहीद हो गए थे। इसके बाद बड़े भाई को सरकारी नौकरी मिल गई थी, लेकिन चार साल पहले बीमारी के कारण उनका निधन हो गया। शहीद प्रदीप कुमार का विवाह नहीं हुआ था। बड़े भाई की तीन बेटियां और सबसे छोटा एक बेटा है। वह अभी स्कूल में पढ़ रहा है। शहीद के नाम स्कूल, सड़क, गैस एजेंसी व भाई को नौकरी मिल गई थी।
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जगन्नाथ कौशल की पुत्रवधू रामशहर में बच्चों को पढ़ाने के लिए वहीं रहती है। दोनों बुजुर्ग पंदल गांव में रह रहे हैं। जगन्नाथ कौशल ने बताया कि अब उनके पास कुछ नहीं रहा है। दोनों बेटे छोड़कर चले गए। डिस्पेंसरी का भवन तो बना दिया है, लेकिन वह चाहते हैं कि उनके रहते हुए यह शुरू हो जाए।
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