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एनजीटी टीम ने निरीक्षण के नाम पर की औपचारिकताएं

Wed, 11 Oct 2017 08:04 PM IST
Updated Wed, 11 Oct 2017 08:04 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो, बिलासपुर। कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन सड़क निर्माण का निरीक्षण करने पहुंची एनजीटी की टीम ने महज औपचारिकताएं पूरी करते हुए दो दिनों के भीतर ही 69 डंपिंग साइटों का निरीक्षण किया है। जिससे फोरलेन विस्थापित संतुष्ट नहीं है। टीम ने निरीक्षण के दौरान किसी भी विस्थापित एवं प्रभावित से बात करना तक उचित नहीं समझा।

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जब लोगों ने टीम से बात करनी चाही तो टीम ने पुलिस कार्रवाई की धमकियां देते हुए लोगों को डराया भी। जिस तरह से मौके पर टीम का रवैया था उससे विस्थापित यह नहीं समझ पाए कि यह टीम एनजीटी की है। जिससे कई बार माहौल तनावपूर्ण हो गया।
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फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति के महासचिव मदन लाल ने बताया कि निरीक्षण के दौरान कई साइटें नदारद पाई र्गइं। कई साइटों पर बिना अनुमति के डंपिंग पाई गई। ज्यादातर वन भूमि में मिट्टी की डंपिंग की गई है। उन्होंने बताया कि टीम ने एक दिन में नौ और दूसरे दिन में 59 साइटों का निरीक्षण किया।
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एक साइट तुन्नू पर टीम ने जाना उचित नहीं समझा। हैरानी का विषय है कि किसी भी डंपिंग साइट की भू-अधिनियम की धारा 107 के तहत किसी तरह की कोई निशानदेही की रिपोर्ट कंपनी द्वारा नहीं दिखाई गई। कंपनी ने जो डंपिंग की है कि वह किसी व्यक्ति का नाम बता कर कर दी है।

अभी तक कंपनी को यह पता तक नहीं कि जमीन किस के नाम पर है, और कहीं सरकारी जमीन तो नहीं है। कई साइटों पर नियमों के अनुसार क्रेट वायर भी नहीं लगाए गए थे। जिससे वह मिट्टी बह कर दूसरे के मकानों, खेतों व उपजाऊ भूमि के साथ सतलुज नदी व पर्यावरण का नुकसान कर रही है।

सबसे हैरान करने वाला विषय यह है कि निरीक्षण करने के दौरान वन विभाग अपनी ही भूमि की पुष्टि करने में असमर्थ रहा। यह परियोजना 2016 में लोगों को समर्पित की जानी थी। ऐसे में सवाल उठता है कि वन विभाग इस तरह का लचर रवैया क्यों अपना रहा है। जितने भी क्रेट वायर डंपिंग साइटों पर लगाए गए हैं, वह खस्ता हो चुके हैं।


कमेटी ने कंपनी के अधिकारियों को समय पर कार्य पूरा करने व नियमों के अनुसार कार्य करने की हिदायत भी दी। उसके बावजूद भी कंपनी अधिकारियों का रवैया पहले जैसा ही रहा। अवैध डंपिंग होने से कइयों के घरों को खतरा पैदा हो गया है।

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