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हो जाइए सावधान, इस वजह से पीलिया की चपेट में आ रहे लोग, अब तक 150 मामले

Mon, 11 Jun 2018 01:29 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Updated Mon, 11 Jun 2018 01:29 PM IST
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150 cases of jaundice in Himachal pradesh polluted water is reason

हिमाचल प्रदेश में लोगों को गंदा पानी पीने से पीलिया हो रहा है। इस साल अब तक पीलिया के डेढ़ सौ मामले अस्पतालों में पहुंच चुके हैं। सबसे ज्यादा हैपेटाइटिस ए के  96 मामले और 51 मामले हैपेटाइटिस ई के सामने आए हैं। बाकी दस हैपेटाइटिस ए और 51 मामले हैपेटाइटिस ई दोनों संयुक्त रहे हैं।

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स्वच्छ पेयजल न मिल पाना लोगों के लीवर को खराब कर रहा है। एक जनवरी 2018 से आठ जून 2018 के आंकड़ों की बात करें तो हिमाचल में पीलिया के 157 मामले सामने आए। ये आंकडे़ स्वास्थ्य सेवाएं निदेशालय ने एकत्र किए हैं।
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इनमें से हैपेटाइटिस ए के कुल 96 में से आईजीएमसी में 1, टांडा मेडिकल कॉलेज में 5, बिलासपुर में 16, चंबा में 22, हमीरपुर में 3, शिमला में 24, कुल्लू में 5, मंडी में 14 और सिरमौर में 6 मामले पहुंचे हैं।
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हैपेटाइटिस ई के आईजीएमसी में 3, टांडा मेडिकल कॉलेज में 2, बिलासपुर में 2, कांगड़ा के अन्य स्वास्थ्य केंद्रों में 4, हमीरपुर में 2, कुल्लू में 1, मंडी में 13, शिमला के अन्य अस्पतालों में 13, सिरमौर में 5 और सोलन में 6 केस सामने आए हैं।

इसी तरह से हैपेटाइटिस ए और ई दोनों के आईजीएमसी, सोलन, सिरमौर और मंडी में एक-एक और शिमला के अन्य अस्पतालों में 6 मामले उजागर हुए।

पीलिया से दो लोगों की हो चुकी है मौत

150 cases of jaundice in Himachal pradesh polluted water is reason

इस साल पीलिया के कारण दो लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें से हैपेटाइटिस ए के कारण मंडी जिले के सुंदरनगर के 1 और हैपेटाइटिस ई के कारण शिमला में 1 मौत हुई।  

एक ही जगह से नहीं आए हैं मामले : डॉ. नेगी
स्वास्थ्य सेवाएं निदेशालय में राज्य निगरानी अधिकारी डॉ. सोनम नेगी ने कहा है कि पीलिया के मामले एक ही जगह से नहीं आए हैं। कोई किसी क्षेत्र से आ रहा है तो कोई कहीं से। इसके फैलने के कई कारण हो सकते हैं। सफाई न रखना भी इसकी एक वजह है।

कई बार खाना खाने से पहले हाथ नहीं धोने से भी वायरस पेट में जा सकता है। हमेशा उबला हुआ पानी पीना चाहिए। कम से कम पंद्रह मिनट तक पानी उबालें। इससे तमाम वायरस खत्म हो जाते हैं। इसके लिए स्वास्थ्य महकमा सजग है। टेस्ट फ्री हैं। इलाज भी मुफ्त है। सरकार की ओर से रेडियो और अन्य माध्यमों से लोगों को जागरूक किया जा रहा है।

हैपेटाइटिस ए और हैपेटाइटिस ई दोनों ही जलजनित रोग
आईजीएमसी शिमला के पूर्व प्रधानाचार्य डॉ. एलएस पाल का कहना है कि हैपेटाइटिस ए और हैपेटाइटिस ई आम तौर पर जलजनित रोग हैं। हैपेटाइटिस ए हैपेटाइटिस ई से अधिक गंभीर होता है।

गर्भवती महिलाओं को हैपेटाइटिस ई से ज्यादा नुकसान होता है। लोगों को पानी उबालकर पीना चाहिए और साफ पानी पीना चाहिए। 

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