जलापूर्ति स्कीमों पर व्यर्थ खर्च दिए 15.42 करोड़, कैग रिपोर्ट में खुलासा
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कैग रिपोर्ट के अनुसार हिमाचल में जलापूर्ति स्कीमों पर 15.42 करोड़ का निष्फल व्यय किया गया है। अनुपयुक्त योजना और पूर्व वन मंजूरी में विभाग विफल रहा है। वर्षा जल संग्रहण संरचनाओं के माध्यम से 17.48 करोड़ व्यर्थ निवेश हुआ है।
राज्य विधानसभा में रखी कैग रिपोर्ट के अनुसार ठेकेदारों को कार्य आवंटित करने से पहले वन मंजूरी प्राप्त करने में विभाग सी विफलता के कारण आठ साल से अधिक समय तक परियोजना पूर्ण नहीं होने से लाभार्थियों को सिंचाई सुविधा प्रदान करने का उद्देश्य विफल हुआ।
परिणाम स्वरूप 17.48 करोड़ का निवेश व्यर्थ रहा। वन अधिनियम 1980 के तहत वन भूमि को गैर वानिकती उपयोगों के लिए परिवर्तन के लिए विभाग को वन मंजूरी पूर्व में सुनिश्चित करना अपेक्षित था।
ऊना जिले के आठ गांवों की 570 हेक्टेयर कृषि योग्य कमांड क्षेत्र को सिंचाई सु्विधा उपलब्ध कराने के लिए 19.33 करोड़ में नाबार्ड ने स्वीकृत किए। टकोली और समूर खड्ड में तीन वर्षा जल संरचनाओं बांधों का निर्माण किया था, जहां से सिंचाई योजना से पानी जुटाना था।
रिपोर्ट के अनुसार जून 2018 तक ऊना मंडल ने परियोजना पर 17.48 करोड़ का व्यय किया। नाबार्ड के तहत 36.23 करोड़ का प्रशासनिक अनुमोदन एवं व्यय स्वीकृति प्रदान दिसंबर 2015 में प्रदान की। आठ साल से अधिक समय में परियोजना पूर्ण नहीं हुई और 17.48 करोड़ का निवेश निरर्थक रहा। आनी और सुंदरनगर मंडलों के अभिलेखों की छानबीन से सामने आया है कि 10,789 लोगों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जाना था।
उपायुक्त कुल्लू ने सात ग्राम पंचायतों के लिए पेयजल योजना को 7.48 करोड़ मंजूर कराए। मुख्य अभियंता मंडी ने 7.49 करोड़ का तकनीकी उन्मोदन प्रदान किया। विभाग ने 5.53 करोड़ और उपायुक्त कुल्लू से स्थानीय क्षेत्र विकास निधि से 1.53 करोड़ प्राप्त किए। कार्य पूरा करने के लिए 5.76 करोड़ एक ठेकेदार को दिए। 4.55 करोड़ की लागत कार्य का निष्पादन किया। शेष कार्य नहीं हो सका।