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कूड़ा शुल्क न वसूलने पर कटी सैहब सुपरवाइजरों की तनख्वाह
Sat, 16 Feb 2019 11:53 AM IST
अरविन्द ठाकुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Sat, 16 Feb 2019 11:53 AM IST
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शहर में डोर टू डोर गारबेज कलेक्शन के बदले होने वाली कूड़ा शुल्क वसूली कम होने पर नगर निगम ने सैहब सुपरवाइजरों की तनख्वाह काट दी। ज्यादातर सुपरवाइजरों को आधे से भी कम सैलरी मिली है। यह पहला मौका है जब कम वसूली पर सुपरवाइजरों की तनख्वाह में कट लगा है। शुक्रवार को सभी सुपरवाइजर महापौर कुसुम सदरेट से मिले और अपनी समस्या बताई।
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इनका कहना था कि सर्दियों की छुट्टियों के चलते ज्यादातर लोग शहर में नहीं है। ऐसे में दिसंबर और जनवरी में कम वसूली हुई है। जैसे ही लोग शिमला पहुंच जाएंगे, इनसे कूड़ा शुल्क वसूल कर लिया जाएगा। ऐसे में अभी उनकी पूरी तनख्वाह जारी की जाए। बाद में महापौर ने नगर निगम आयुक्त से भी इस बारे में बात की।
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महापौर ने माना कि अभी ज्यादातर लोग शहर से बाहर हैं। ऐसे में कम रिकवरी हुई है। मेयर ने निर्देश दिए कि अभी सुपरवाइजरों को पूरी तनख्वाह जारी की जाए। लेकिन यदि मार्च से रिकवरी नहीं बढ़ती है तो तनख्वाह में नियमानुसार कट लगाया जाएगा। निगम ने प्रस्ताव पारित किया है कि कम रिकवरी पर तनख्वाह काटी जाए जबकि 90 फीसदी से ज्यादा रिकवरी करने वाले सुपरवाइजरों को बोनस दिया जाए।
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आखिर कहां जा रहे लाखों रुपये
जनवरी में महज 27 लाख शुल्क वसूली हुई है। रामनगर और कृष्णानगर ऐसे दो वार्ड हैं जहां एक भी घर से शुल्क नहीं लिया गया है। यह पहला मौका नहीं है जब कूड़ा शुल्क के रूप में कम वसूली हुई है। दिसंबर में 33 लाख जबकि नवंबर में 38 लाख रुपये रिकवरी की गई। पिछले साल मई में कूड़ा शुल्क की नई दरें लागू की गईं थीं। इसके बाद अनुमान था कि निगम की आय 28 लाख से बढ़कर 42 से 45 लाख पहुंच जाएगी।
लेकिन अब तक सिर्फ एक बार ही 40 लाख से अधिक वसूली हो पाई है। ऐसे में बाकी पैसा कहां और किसके खाते में जा रहा है, इसका किसी को पता नहीं। रिकॉर्ड न होने के कारण पहले भी गारबेज शुल्क में लाखों का घपला हो चुका है। तब सात सुपरवाइजर नौकरी से निकाले गए थे। नगर निगम ने पॉस मशीनें भी दे दी, लेकिन इसके बावजूद रिकवरी नहीं बढ़ पा रही।