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शिमला-कालका ट्रैक पर दौड़ा अंग्रेजों के जमाने का इंजन, देखने उमड़े लोग

Sat, 25 Feb 2017 04:19 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Sat, 25 Feb 2017 04:19 PM IST
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109 Years Old Steam Engine Run on Shimla Kalka Railway Track.

शिमला-कालका रेल ट्रैक पर शुक्रवार को एक बार फिर 109 साल पुराने भाप इंजन की छुक-छुक की आवाज सुनाई दी। इस पर यात्रा करने के लिए इंग्लैंड के पर्यटकों ने ऑनलाइन बुकिंग करवाई थी। तीन डिब्बों को इंजन के साथ जोड़ा गया था।

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इन तीनों डिब्बों में इंग्लैंड के पर्यटकों ने सवारी की। इस ऐतिहासिक स्टीम इंजन को रेलवे बुकिंग पर ही चलाता है। पिछले माह भी ट्रैक पर स्टीम इंजन को दौड़ाया गया था। शिमला के ऐतिहासिक रेलवे स्टेशन से कैथलीघाट के लिए इंजन चलाने के लिए पहले से रेलवे ने तैयारियां कर रखी थी।
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सुबह करीब ग्यारह बजे रेलवे स्टेशन से पर्यटक डिब्बों में सवार हुए और धीरे-धीरे यह भाप इंजन रफ्तार पकड़ने लगा। इसे देखने के लिए भारी संख्या में लोग मौजूद रहे। अंग्रेजों की ग्रीष्मकालीन राजधानी रहे शिमला में इस इंजन के ट्रैक पर चलने से पुराना समय याद आ जाता है।
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जब यहां अंग्रेजों का राज चलता था। उसी समय कालका से शिमला तक ट्रैक का निर्माण करवाकर शिमला में रेलवे स्टेशन बनवाया था। इस स्टीम लोकोमोटिव इंजन से ट्रेन को चलता देखने के लिए आज भी शिमला के लोग और पर्यटक जुटते हैं।

रेलवे महकमा विदेशी पर्यटकों के बुकिंग करवाने पर ही अब इस इंजन को चलाता है। उत्तर रेलवे पर्यटन को बढ़ावा देने और इस ऐतिहासिक हैरिटेज रेलवे ट्रैक पर लगातार इस भाप इंजन को समय-समय पर चलाता रहा है। साल में दो से तीन बार ट्रायल होता है। 

शिमला- कालका रेल लाइन पर 1903 में पहली बार चली थी ट्रेन  

109 Years Old Steam Engine Run on Shimla Kalka Railway Track.

शिमला-कालका नैरोगेज रेलवे लाइन बनने के बाद साल 1903 में जब पहली बार रेल चली थी तो केसी 520 नाम के इसी इंजन ने बोगियों को खींचा था। अब इसमें इतना दम नहीं है कि यह कालका से शिमला तक के करीब सौ किलोमीटर के सफर को पूरा कर सके। इस इंजन का सफ र अब मात्र शिमला से 22 किलोमीटर की दूरी पर स्थित कैथली घाट रेलवे स्टेशन तक ही सीमित रखा गया है। 

1967 में बंद कर दिया गया था स्टीम इंजन 
रेलवे रिकॉर्ड के अनुसार इस इंजन का निर्माण नॉर्थ ब्रिटिश लोकोमोटिव कंपनी ने तीस हजार रुपये में किया था। साल 1967 में जब डीजल इंजन आया तो इसे ट्रैक से हटाकर इसकी सेवाएं समाप्त कर दी थी। करीब 30 साल तक इंजन सहारनपुर की रेलवे वर्कशॉप में पड़ा रहा।

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी भी कर चुके हैं सवारी 

109 Years Old Steam Engine Run on Shimla Kalka Railway Track.

2001 में रेलवे ने इसे पर्यटकों के लिए चलाने का निर्णय लिया। इसकी मरम्मत करवाई गई। इसे 2008 में अमृतसर की रेलवे वर्कशॉप भेजा गया। पांच दिसंबर 2012 को इसका ट्रायल किया गया। 30 मार्च 2014 को इसे फिर ट्रैक पर उतारा गया। 

1945 में महात्मा गांधी भी इस भाप इंजन में शिमला का सफर कर चुके हैं। तत्कालीन वायसराय लार्ड वेवल के साथ भारत की स्वतंत्रता को लेकर हुई वार्ता के लिए वह इसी भाप इंजन वाली ट्रेन से शिमला आए थे।

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