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चैरिटी के लिए लेह से शिमला तक ऑटो रिक्शा से तय किया 1000 किमी सफर
Fri, 28 Jun 2019 08:43 PM IST
Krishan Singh
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मंडी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मंडी
Published by: Krishan Singh
Updated Fri, 28 Jun 2019 08:43 PM IST
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ऑटो रिक्शा में तय किया लेह से शिमला तक का सफर
- फोटो : अमर उजाला
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पर्यावरण संरक्षण और युगांडा के स्कूलों के लिए पैसा जुटाने के मकसद से 15 देशों के 45 विदेशियों ने 15 ऑटो रिक्शा में लेह से शिमला तक एक हजार किलोमीटर का सफर तय किया। बीते शनिवार को विदेशियों की यह अनूठी यात्रा शुरू हुई थी।
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सात दिन बाद अलग-अलग रूटों से शुक्रवार देर शाम ये लोग शिमला पहुंचे। इस दल में एक ऑटो में प्रत्येक देश के तीन लोग शामिल रहे। जांबाजों के दल में शामिल न्यूजीलैंड के तीन प्रतिनिधियों का गुरुवार रात मंडी के भ्यूली में पड़ाव रहा।
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दल के प्रमुख जॉन स्टोक्स ने बताया कि पहाड़ी दर्रों, बर्फ और जोखिम भरी सड़कों को पार कर वे मंडी पहुंचे। रिक्शा रन के पीछे दो खास मकसद हैं। इसमें पर्यावरण संरक्षण और युगांडा के स्कूल के लिए चैरिटी जुटाने का लक्ष्य रखा गया।
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दल की इकलौती महिला सदस्य निक्की मकॉय ने बताया कि दो पुरुषों के साथ सफर करना उनके लिए नया अनुभव था। निक्की के अनुसार यह एक चैलेंज था जिसे टीम वर्क के रूप में पूरा करना था। इस कार्य को पूरा करने में दोनों पुरुषों का उन्हें अच्छा सहयोग मिला।
लेह रूट सबसे रोमांचकारी
दल में शामिल न्यूजीलैंड के नाइजल एंड्रयूस ने बताया कि यह यात्रा उनकी जिंदगी की सबसे रोमांचक यात्रा है, जिसे वह कभी नहीं भुला पाएंगे। एंड्रयूस ने बताया कि यात्रा कठिन थी और ऑटो में इसे पूरा करना एक नई बात, क्योंकि शहरों का वाहन माने जाने वाले ऑटो को कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में इस्तेमाल किया गया है।
तीनों एक देश के पर रिश्ता कोई नहीं
तीनों का कहना है कि वे न्यूजीलैंड के रहने वाले हैं, लेकिन आपस में इनका कोई रिश्ता नहीं है। जॉन स्टोक्स न्यूजीलैंड में फूड एक्सपोर्टर का काम करते हैं, जबकि नाइजल एंड्रयूस पेट्रोलियम के क्षेत्र में काम करते हैं। निक्की मकॉय गार्डनर हैं। खतरों और रोमांच से भरा इनका यह सफर अब समापन की ओर है और इसके बाद सभी अपने वतन लौट जाएंगे, लेकिन लेह से शिमला तक आटो में सफर करके इन्होंने एक नया इतिहास रचा है।
तीनों एक देश के पर रिश्ता कोई नहीं
तीनों का कहना है कि वे न्यूजीलैंड के रहने वाले हैं, लेकिन आपस में इनका कोई रिश्ता नहीं है। जॉन स्टोक्स न्यूजीलैंड में फूड एक्सपोर्टर का काम करते हैं, जबकि नाइजल एंड्रयूस पेट्रोलियम के क्षेत्र में काम करते हैं। निक्की मकॉय गार्डनर हैं। खतरों और रोमांच से भरा इनका यह सफर अब समापन की ओर है और इसके बाद सभी अपने वतन लौट जाएंगे, लेकिन लेह से शिमला तक आटो में सफर करके इन्होंने एक नया इतिहास रचा है।