मशहूर केस के गवाह पर तेजाब से हमला
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एक पुराने और तकरीबन भूले हुए केस के चश्मदीद गवाह पर अचानक किसी ने तेजाब फेंक दिया। पुलिस अब मामला दर्ज कर तहकीकात में जुट गई है।
1995 में वरिष्ठ कांग्रेसी नेता रामनिवास मिर्धा के बेटे राजेंद्र मिर्धा का अपहरण हुआ था। माना जाता है कि इस अपहरण में पंजाबी आतंकी संगठन के आतंकी कादियां का हाथ था।
अंग्रेजी अखबार TOI के मुताबिक इस अपहरण केस के चश्मदीद गवाह, साठ साल के हनुमान बागरा जो दूध बांटने का काम करते हैं, उन पर बुधवार को तेजाब से हमला किया गया।
पुलिस को साजिश की आशंका
इस मामले में जयपुर के जवाहर सर्कल पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने बताया कि जब हनुमान बागरा अपनी साइकिल पर दूध बांट कर लौट रहे थे तो जगतपुरा के पास बाइक सवार दो हमलावरों ने उनके उपर तेजाब से हमला किया।
एक सीनियर पुलिस ऑफिसर ने बताया कि,"इस हमले में उनका चेहरा जल गया और वो मदद के लिए चिल्लाने लगे। हमलावर मौके से फरार हो गए।"
हमले में घायल हनुमान तुरंत पुलिस स्टेशन पहुंचे और पूरी कहानी बताई। पुलिस इस घटना के पीछे किसी साजिश की आशंका से इंकार नहीं कर रही है। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और जांच शुरू कर दी है।
राजेंद्र मिर्धा का एक फरवरी 2009 को दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया था।