Rajasthan: कमरे से बदबू आने पर दरवाजा तोड़ा तो फंदे से लटका मिला बेटा, दो दिन पहले लगाई फांसी, पुलिस से यह बोले पिता
बताया जा रहा है मृतक भूपेंद्र घर में किसी से बात नहीं करता था। जरूरत पड़ने पर वह सिर्फ फोन पर अपने पिता से बात किया करता था। इस कारण दो दिन तक बेटा फंदे से लटका रहा और किसी को इस बात की जानकारी तक नहीं हुई।
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राजस्थान के जयुपर में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। जिले में एक 18 साल के लड़के ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली और दो दिन तक उसकी लाश फंदे से लटकी रही। शनिवार को कमरे से बदबू आने पर पिता ने उसे कॉल किया तो उसने रिसीव नहीं किया। कई बार कॉल करने पर भी उसने कोई जवाब नहीं दिया।
अनहोनी के डर से उन्होंने कमरे का दरवाजा खोलने की कोशिश की तो वह अंदर से बंद था। बाद में धक्का देकर दरवाजा तोड़ा तो उसकी लाख फंदे से लटकर रही थी। जिसके बाद उन्होंने पुलिस मामले की जानकारी दी। अब पुलिस मामले की जांच कर रही है। मामले को लेकर कई ऐसे सवाल उठ रहे हैं जिनके जवाब पुलिस को तालाशने हैं।
एक मीडिया संस्थान की रिपोर्ट के अनुसार यह मामला जिले के नींदड हरमाड़ा का है। 18 साला का भूपेंद्र सिंह पुत्र नरेंद्र कुमार मीणा घर में अपने माता-पिता और दादा-दादी के साथ रहता था। उसके पिता किसान हैं। भूपेंद्र ने हाल ही में 12वीं पास की थी। शनिवार सुबह परिवार को लोगों को भूपेंद्र के कमरे से बदबू आने का अहसास हुआ।
इस पर उसके पिता ने सुबह करीब सात बजे उसे कॉल किया, लेकिन उसने कॉल रिसीव नहीं किया। वह कमरे के पास पहुंचे और उसे आवाज लगाते हुए दरवाजा खोलने को कहा, लेकिन अंदर से कोई जवाब नहीं मिला ओर गेट भी अंदर से बंद था। इसके बाद परिजनों ने धक्का देकर गेट खोला तो सभी की आंखें फटी रह गईं। उनका बेटा भूपेंद्र फंदे से लटक रहा था और उसके शव से बदबू आ रही थी। उसके पिता ने हरमाड़ा पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस और एफएसएल टीम ने जांच कर कमरे से सबूत जुटाए।
बेटा कब क्या करता था परिवार वालों को नहीं पता?
बताया जा रहा है भूपेंद्र किसी से बात नहीं करता था। वह सिर्फ फोन पर अपने पिता से बात किया करता था। वह भी जरूरत पड़ने पर। ज्यादा समय वह अपने कमरे में ही बंद रहता था और अधिकतर समय उसका मोबाइल पर ही बीतता था। वह फोन पर गेम खेलने का भी आदी था। परिवार वालों से उसकी इस कदर दूरी थी कि वह कब खाना खाता और घर से बाहर चला जाता इसकी जानकारी भी परिवार वालों ज्यादा नहीं होती थी।
आखिरी बार 23 जून को पिता से हुई थी बात
मृतक के पिता नरेंद्र ने पुलिस को बाताया कि भूपेंद्र ने बाथरूम का पानी खत्म होने पर 23 जून की शाम को उन्हें फोन किया था। इसके बाद उन्होंने पानी भर दिया, तब से उनकी उससे बात नहीं हुई। वह किसी से बात नहीं करता था। कई-कई दिन तक अपने कमरे में ही रहता था। उसकी इस आदत के कारण परिवार वाले भी उस पर ज्यादा ध्यान नहीं देते थे। पिता ने पुलिस से कहा कि किसी भी जरूरत पर वह मुझे कॉल कर बता दिया करता था।
मोबाइल से नंबर, मैसेज सब डिलीट
बताया जा रहा है कि घर में भूपेंद्र का कमरा अलग-थलग है। वह उसी में रहा करता था। न कोई उसके कमरे में जाता था और न ही वह किसी के कमरे में आता था। पुलिस ने उसके कमरे से जो मोबाइल फोन बरामद किया है। वह भी एकदम खाली है। उसमें किसी का एसएमएस, कॉल और यहां तक की नंबर भी नहीं हैं। सभी डिलीट कर दिए गए हैं। शनिवार सुबह किए गए पिता के मिस्क कॉल के अलावा उसके फोन में कुछ नहीं है। ऐसे में माना जा रहा है कि आत्महत्या से पहले उसने सब कुछ डिलीट कर दिया होगा।
23 जून को आत्महत्या का अंदेशा
पुलिस का मानना है कि 23 जून की देर शाम या रात को भूपेंद्र ने फांसी लगा ली थी। हालांकि, पुलिस अभी कुछ भी साफ कहने से इंकार कर रही है। पुलिस का कहना है कि पीएम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट रूप से कुछ कहा जा सकता है। इसके अलावा भी भूपेंद्र की मौत से जुड़े कई सवाल ऐसे हैं जिनके पुलिस को जवाब तलाशने हैं।