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Rajasthan: हिंदू विरोधी सरकार ने किया हत्या का प्रयास, संत के आत्मदाह पर विश्व हिंदू परिषद का बड़ा हमला
Thu, 21 Jul 2022 06:43 PM IST
उदित दीक्षित
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, भरतपुर
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, भरतपुर
Published by: उदित दीक्षित
Updated Thu, 21 Jul 2022 06:43 PM IST
सार
आदिबद्री और कनाकांचल पर्वत को खनन मुक्त कराने कि मांग को लेकर संत 551 दिन से धरना प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन सरकार ने ध्यान नहीं दिया।
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
राजस्थान के भरतपुर के ग्राम पासोपा में सरकार ने संतों की सही मांगे नहीं मानी। इस कारण संत विजय बाबा ने आत्मदाह कर अपने प्राण त्यागने का प्रयास किया। यह गहलोत सरकार के लिए घोर शर्म की बात है। घटना के बाद सम्भागीय आयुक्त ने आनन फानन में खनन क्षेत्र को वन क्षेत्र घोषित करने की कार्रवाई करने का आदेश निकाल वह भी निंदनीय है, क्योंकि आदेश में कोई भी ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। कहा गया है कि इसे काफी हद तक पूरा कर लेंगे। सरकारी 'काफी हद' कितनी होती है सब जानते हैं। यह बातें विश्व हिंदू परिषद ने कहीं।
विहिप ने कहा, आदिबद्री और कनाकांचल पर्वत को खनन मुक्त कराने कि मांग को लेकर संत 551 दिन से धरना प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन सरकार ने ध्यान नहीं दिया। 10 दिन पहले बाबा हरिबोलदास जी ने मुख्यमंत्री आवास के सामने आत्मदाह की चेतावनी दी थी, तब भी सरकार ने कुछ नहीं किया। यह घटना आत्मदाह नहीं, राज्य सरकार द्वारा किया गया हत्या का प्रयास है। उदयपुर में कन्हैयालाल की जघन्य हत्या भी सरकार के कारण ही हुई थी। सरकार समय रहने कार्रवाई करती तो यह घटनाएं नहीं होती।
विहिप के प्रवक्ता डॉ. प्रभात शर्मा ने कहा कि संत समाज जिस क्षेत्र को लेकर आंदोलन कर रहा था वह भगवान श्रीकृष्ण की क्रीडा स्थली है। कांग्रेस सरकार हिंदुओं के पवित्र स्थलों को बर्बाद करने का कार्य हमेशा से करती रही है। राम सेतु को तोड़ने के लिए झूठा शपथ पत्र देने का हो, अलवर में मंदिरों को तोड़ने का हो, सालसर धाम में राम जानकी की प्रतिमाओं सहित तोरण द्वार को तोड़ना हो। सरकार इस तरह के काम करती रही है।
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उन्होंने बताया, 12 अक्टूबर 2021 को ही एक प्रस्ताव वन विभाग ने सरकार को भेज दिया गया था, जिसमें कनकांचल पर्वत क्षेत्र की 749.44 हेक्टेर सिवायचक, 7.96 हेक्टेर चारागाह भूमि से खनन बंद करने और इसे वन विभाग को हस्तांतरित करने के लिए कहा गया था, लेकिन हिंदू विरोधी सरकार इस प्रस्ताव को दबाए बैठी रही। हम इस मामले को हिंदू समाज के बीच लेकर जाएंगे। जब तक पूरे क्षेत्र को तीर्थ क्षेत्र न बना दिए जाने तक चुप नहीं रहेंगे।
बाबा को दिल्ली अस्पताल में भर्ती कराया गया
इधर, 85 फीसदी झुलसे संत विजय बाबा की हालात गंभीर हो गई है। जयपुर के एसएमएस अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। तबीयत खराब होने के बाद उन्हें दिल्ली रेफर किया है। सड़क मार्ग से उन्हें दिल्ली ले जाया गया और सफदरगंज अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जहां उनका इलाज चल रहा है।
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विहिप ने कहा, आदिबद्री और कनाकांचल पर्वत को खनन मुक्त कराने कि मांग को लेकर संत 551 दिन से धरना प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन सरकार ने ध्यान नहीं दिया। 10 दिन पहले बाबा हरिबोलदास जी ने मुख्यमंत्री आवास के सामने आत्मदाह की चेतावनी दी थी, तब भी सरकार ने कुछ नहीं किया। यह घटना आत्मदाह नहीं, राज्य सरकार द्वारा किया गया हत्या का प्रयास है। उदयपुर में कन्हैयालाल की जघन्य हत्या भी सरकार के कारण ही हुई थी। सरकार समय रहने कार्रवाई करती तो यह घटनाएं नहीं होती।
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विहिप के प्रवक्ता डॉ. प्रभात शर्मा ने कहा कि संत समाज जिस क्षेत्र को लेकर आंदोलन कर रहा था वह भगवान श्रीकृष्ण की क्रीडा स्थली है। कांग्रेस सरकार हिंदुओं के पवित्र स्थलों को बर्बाद करने का कार्य हमेशा से करती रही है। राम सेतु को तोड़ने के लिए झूठा शपथ पत्र देने का हो, अलवर में मंदिरों को तोड़ने का हो, सालसर धाम में राम जानकी की प्रतिमाओं सहित तोरण द्वार को तोड़ना हो। सरकार इस तरह के काम करती रही है।
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उन्होंने बताया, 12 अक्टूबर 2021 को ही एक प्रस्ताव वन विभाग ने सरकार को भेज दिया गया था, जिसमें कनकांचल पर्वत क्षेत्र की 749.44 हेक्टेर सिवायचक, 7.96 हेक्टेर चारागाह भूमि से खनन बंद करने और इसे वन विभाग को हस्तांतरित करने के लिए कहा गया था, लेकिन हिंदू विरोधी सरकार इस प्रस्ताव को दबाए बैठी रही। हम इस मामले को हिंदू समाज के बीच लेकर जाएंगे। जब तक पूरे क्षेत्र को तीर्थ क्षेत्र न बना दिए जाने तक चुप नहीं रहेंगे।
बाबा को दिल्ली अस्पताल में भर्ती कराया गया
इधर, 85 फीसदी झुलसे संत विजय बाबा की हालात गंभीर हो गई है। जयपुर के एसएमएस अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। तबीयत खराब होने के बाद उन्हें दिल्ली रेफर किया है। सड़क मार्ग से उन्हें दिल्ली ले जाया गया और सफदरगंज अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जहां उनका इलाज चल रहा है।