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साहित्यकार विजयदान देथा का निधन
Updated Sun, 10 Nov 2013 04:21 PM IST
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राजस्थानी भाषा के जानेमाने साहित्यकार विजयदान देथा का निधन हो गया है. वे 87 साल के थे।
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बिज्जी के नाम से मशहूर विजयदान देथा अपनी कहानियों के लिए देश-विदेश में मशहूर थे।
राजस्थान के पाली ज़िले के रहने वाले विजयदान देथा ने राजस्थानी में करीब 800 छोटी-बड़ी कहानियां लिखीं. जिनका कई भाषाओं में अनुवाद किया गया है।
उनकी कहानियों में राजस्थानी लोक संस्कृति, आम जीवन की झलक मिलती है। विजयदान देथा को साहित्य अकादमी और पद्मश्री से सम्मानित किया गया था।
फिल्मकारों की पसंद
उनकी कहानियों और उपन्यासों पर कई नाटक और फ़िल्में बनी हैं, जिनमें श्याम बेनेगल की फ़िल्म और हबीब तनवीर का नाटक चरणदास चोर, प्रकाश झा की परिणीति और उनकी कहानी 'दुविधा' पर इसी नाम से बनी मणि कौल की फ़िल्म और अमोल पालेकर की 'पहेली' शामिल हैं।
विजयदान देथा ने बच्चों के लिए भी कहानियां लिखी थीं।
बने बनाए सांचों को तोड़ने वाले देथा ने कहानी सुनाने की राजस्थान की समृद्ध परंपरा से अपनी शैली का तालमेल किया।
चतुर गड़ेरियों, मूर्ख राजाओं, चालाक भूतों और समझदार राजकुमारियों की ज़ुबानी देथा ने जो कहानियां बुनीं उन्होंने देथा के शब्दों को जीवंत कर दिया।
गहरा असर
उनकी कहानियों की गूंज भाषाओं, संस्कृतियों और समय के पार पहुंचती है।
हिंदी के जाने माने साहित्यकार अशोक वाजपेयी कहते हैं, “उन्होंने एक अद्भुत काम किया जो आधुनिक हिंदी साहित्य में अनूठा है। उन्होंने राजस्थान की बहुत सारी लोक कथाओं का पुनर्विष्कार किया. ऐसे लोग हैं जिन्होंने लोक कथाओं का उपयोग किया है लेकिन इतनी कल्पनाशीलता के साथ किसी ने नहीं किया।”
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विज्जी ने राजस्थान को नहीं छोड़ा, उन्होंने सिर्फ़ राजस्थानी में ही रचनाएं की।
वाजपेयी कहते हैं, “रेणु की तरह ही उन्होंने दिल्ली से दूर रहकर काम किया. उन्होंने तो अपना गांव भी नहीं छोड़ा. देथा ने कोमल कोठारी के साथ मिलकर रूपायन में काफ़ी अच्छा काम किया. राजस्थान के लोक संगीत को संरक्षित और एक तरह से पुनर्जीवित किया।”
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वाजपेयी आगे कहते हैं, “वो सिर्फ़ इसलिए नहीं जाने जाएंगे कि उनकी कहानियों पर फिल्में बनीं, बल्कि वो कठिन परिस्थितियों में जिजीविषा की विजय के लेखक थे।”