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वसुंधरा के क्षेत्र में अशोक गहलोत की नजरे-इनायत नहीं
धीरज कनोजिया
Updated Fri, 22 Nov 2013 07:35 PM IST
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वसुंधरा राजे के चुनावी क्षेत्र झालरापाटन तक पहुंचने में लक्जरी कार में भी कमर टूट जाती है। नाम तो मेगा हाईवे है, मगर गड्ढों में सड़क समा गई है।
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स्कूल, कॉलेज, बस अड्डे और अन्य सरकारी इमारतों की हालत खराब है। अन्य जगहों के मुकाबले बिजली की कटौती यहां ज्यादा होती है। हर सरकारी योजना की शुरुआत यहां देर से होती है।
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दूसरे जिलों और क्षेत्रों के मुकाबले यहां विकास कम करने का आरोप गहलोत सरकार पर है। आखिर क्यों? जवाब यहां के लोग से बेहद साफ मिलता है कि यह विधानसभा सीट भाजपा की मुख्यमंत्री पद की दावेदार वसुंधरा राजे की होने की वजह से गहलोत सरकार के सौतेले रवैये का सामना कर रही है।
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लोगों के समूह कहते मिले कि गहलोत ने हमसे सुख चैन छीन लिया। पास के कोटा से आईआईटी अपने जिले जोधपुर ले गए। क्षेत्र का विकास रोक दिया। स्पोर्ट्स कांपलेक्स बनना था। वह भी जोधपुर में बन रहा है। कोई उद्योग धंधा नहीं दिया।
पाटन में लोग वसुंधरा को ‘मैडम’ के नाम से पुकारते हैं। वसुंधरा पाटन से पिछले दो बार से विधानसभा चुनाव जीत रही हैं। 2003 का चुनाव यहीं से जीतकर वह प्रदेश की मुखिया बनीं।
वह झालावाड़-बारां से सांसद रह चुकी हैं। पाटन से पहले वह अपने ससुराल धौलपुर से लड़ी थीं। वहां उन्हें हार मिली तो पाटन आ गईं। यहां से आने के बाद ही भाजपा में उनका राजनीतिक कद तेजी से बढ़ गया और ललित किशोर चतुर्वेदी, घनश्याम तिवारी, गुलाब चंद कटारिया जैसे बड़े दिग्गजों को किनारे कर वह मुख्यमंत्री की कुर्सी पर 2003 में जा बैठीं।
राजस्थान में भैरो सिंह शेखावत के बाद वसुंधरा को भाजपा का अब तक का सबसे सफल और बड़े कद का नेता माना जाता है। भाजपा के अंदर भारी विरोध होने के बावजूद वह एक बार फिर भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री पद की दावेदार हैं। झालावाड़ से ही उनके बेटे दुष्यंत सिंह दो बार से सांसद हैं।
पाटन में उनके विरोधी लोग बोलते नहीं मिले।
बस अड्डे पर खड़े लोग कहते हैं कि पाटन में रेल लाइन मैडम ही लाईं। दूसरी तरफ, वसुंधरा को चुनौती दे रही कांग्रेस की उम्मीदवार मीनाक्षी चंद्रावत कहती हैं कि रेल लाइन तो यूपीए सरकार की देन है। भाजपा की एनडीए सरकार छह साल में यह काम नहीं कर पाई।