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मोदी-राहुल पर भारी पड़ रहे लोकल मुद्दे
धीरज कनोजिया, जोधपुर/नागौर
Updated Sat, 23 Nov 2013 03:25 PM IST
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नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी की तकरीरों ने भले राजस्थान का राजनीतिक माहौल गरमा दिया हो लेकिन वोट यहां लोकल मुद्दों पर ही पड़ेंगे। राष्ट्रीय दलों के स्टार चेहरों के बावजूद चुनावी महाभारत उम्मीदवारों की लोकप्रियता के बलबूते लड़ी जा रही है।
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हर क्षेत्र की अपनी समस्याएं हैं। लोगों की अलग-अलग मांग और उम्मीदें हैं। राजस्थान में मतदाता का झुकाव उसी उम्मीदवार की ओर लग रहा है जो उसके साथ शुरू से अंतिम समय तक खड़ा है। देश की चिंता छोड़कर मतदाता अपने इलाके की तरक्की की सोच रहा है।
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मोदी की प्रदेश में अब तक आठ रैलियां हो चुकी हैं। उन्होंने राहुल के बाद ही रैलियां शुरू की मगर थोड़े समय में उन्होंने राहुल के लगभग बराबर रैलियां कर डाली हैं।
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लोगों के सामने रखे सवालों के जवाब में स्थानीय मुद्दों का ही बोलबाला है। इक्का-दुक्का लोग आपस में नरेंद्र मोदी या राहुल पर चर्चा करते हैं।
प्रधानमंत्री की कुर्सी के लिए मोदी को दमदार कहने वालों की कमी नहीं मगर विधानसभा चुनाव में स्थानीय मुद्दे मोदी इफेक्ट पर भारी है। सूबे के हाड़ौती में अलग समस्याएं है तो जोधपुर और मेवाड़ की अलग।
सूबे के राजनीतिक जानकार भी मानते हैं कि 2014 के लोकसभा चुनाव का रास्ता विधानसभा के सेमीफाइनल के बेहतर नतीजों के बाद से आसान होगा। मगर यह कहना ठीक नहीं होगा कि विधानसभा के नतीजे इनकी वजह से पलटेंगे या इन पर निर्भर रहेंगे।
राजस्थान के हर संभाग के स्थानीय मुद्दों को देखें तो मारवाड़ के नागौर के ग्रामीण इलाकों में मीठे पानी की सप्लाई, अवैध खनन कार्य पर रोक, कस्बों में कृषि कनेक्शन के लिए लंबी कतारें, गांवों में मूलभूत सुविधाओं का अभाव बड़े मुद्दे बने हुए हैं।
मेवाड़ में हाईकोर्ट बेंच बनाने, उदयपुर को बी-2 श्रेणी का शहर बनाने और उदयपुर से अहमदाबाद तक मीटरगेज की रेल लाइन को ब्राडगेज करने की मांग प्रमुख है। कोटा के आईआईटी को जोधपुर ले जाने का मसला बड़ा मुद्दा बन गया है। राज्य का सबसे साक्षर जिला होने के नाते यहां छात्रों को मूलभूत सुविधा देने, रोजगार बढ़ाने और एयरपोर्ट निर्माण जैसी मांगें उठी हैं।
वसुंधरा की प्रतिष्ठा दांव पर
दक्षिणी राजस्थान हाड़ौती के नाम से जाना जाता है। यह प्रदेश की सत्ता का प्रमुख केंद्र बिंदु बन गया है। लगभग चार जिलों में फैले हड़ौती में प्रदेश की 17 विधानसभा सीटें सत्ता में कब्जे के लिहाज से अहम बन रही है।
पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की झालरापाटन सीट भी यहीं होने से भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए यहां जीत दर्ज करना प्रतिष्ठा का दांव बना हुआ है। अभी कांग्रेस यहां भाजपा से एक सीट की बढ़त में है।
यानी कांग्रेस के पास नौ तो भाजपा के पास आठ सीटें हैं। मगर अब सत्ता विरोधी लहरों का असर होने के चलते कांग्रेस के खिलाफ गुस्सा लोगों से बात करने में जाहिर होता है। इसलिए कांग्रेस इन इलाकों में प्रचार करने में कोई कसर नहीं छोेड़ रही है। जबकि भाजपा के कई बड़े चेहरे यहां कांग्रेस को कड़ी टक्कर दे रहे हैं।