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राजस्थान में वाड्रा ने किया जमीनों को महंगा

Sun, 04 May 2014 02:03 PM IST
समीर शर्मा/अमर उजाला, जयपुर
समीर शर्मा/अमर उजाला, जयपुर Updated Sun, 04 May 2014 02:03 PM IST
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Vadra's expensive land in Rajasthan

पश्चिमी राजस्थान में सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने वाली कंपनियों को मजबूरी में सोनिया गांधी के दामाद राबर्ट वाड्रा से मुंह मांगे दामों पर जमीनें खरीदनी पड़ी।

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केंद्र की योजना के अनुसार राजस्थान में कांग्रेस की गहलोत सरकार को सौर ऊर्जा हब के तहत लैंड बैंक स्थापित करना था और प्लांट स्थापित करने वाले निवेशकों को भूमि डीएलसी दर के मुकाबले मात्र 10 प्रतिशत पर ही देनी थी।
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वर्ष 2008 की शुरुआत में नवीन एवं नवीनीकरण ऊर्जा मंत्रालय ने राजस्थान सरकार को पॉलिसी जारी करने को कहा था, लेकिन गहलोत सरकार ने करीब तीन साल तक इस संबंध मे कोई पॉलिसी जारी नहीं की। इस दौरान वाड्रा ने किसानों से कौड़ियों के दामों में जमीन खरीदकर खुद का लैंड बैंक तैयार कर लिया।

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मुंह मांगे दाम पर बेची जमीन

Vadra's expensive land in Rajasthan

जब सरकार ने रियायती जमीनें देने के नाम पर कंपनियों के आगे हाथ खड़े कर दिए, तब कंपनियों को प्लांट लगाने के लिए मजबूरी में वाड्रा से महंगी जमीनें खरीदनी पड़ीं। पावर प्लांट स्थापित करने में निवेशकों को दिक्कत आई और प्लांट स्थापित करने की गति पर भी ब्रेक लगा।

वर्ष 2011 में सौर ऊर्जा नीति जारी की गई। निवेशकों को यह कहा गया था कि भूमि राजस्व रिकार्ड के आधार पर सोलर हब के क्षेत्र में भूमि की पहचान करके राजस्थान सरकार को अवगत कराएं, जिससे उनको डीएलसी रेट के 10 प्रतिशत की दर से ही जमीन आवंटित की जा सके।

भारत सरकार के नवीन एवं नवीनीकरण ऊर्जा मंत्रालय की ओर से विभिन्न कंपनियों के सोलर पावर प्लांट स्वीकृत किए। इसके बाद कंपनियों ने बीकानेर जिले में राजस्थान सरकार से जमीन की मांग की, लेकिन राजस्थान सरकार ने कहा कि हाईवे पर जमीन उपलब्ध नहीं है। ऐसी परिस्थितियों में कंपनियों को मजबूरन राबर्ट वाड्रा की कंपनियों से जमीनें खरीदनी पड़ी।

आयकर विभाग ने मूंद ली आंखें

Vadra's expensive land in Rajasthan

जब भी 5 लाख रुपये से अधिक की रजिस्ट्री होती है, तो आयकर विभाग नोटिस जारी करता है। लेकिन वाड्रा की कंपनियों की खरीदी गई जमीनों के सौदों में आयकर विभाग भी जानबूझकर अनजान बना रहा।

जानकारी के बावजूद कोई नोटिस भी जारी नहीं किया। बीकानेर सब रजिस्ट्रार को यह जानकारी लेनी चाहिए थी कि जमीन पर कोई स्टे, विवाद आदि तो नहीं है, लेकिन नियमों की अनदेखी की गई।

वाड्रा ने महेश नागर, औंकार यादव, अशोक कुमार, देव राज, सुरेंद्र सिंह, प्रदीप यादव को पावर ऑफ एटार्नी देकर जमीनें खरीदने के लिए अधिकृत किया। इन लोगों ने विभिन्न कंपनियों के माध्यम से बीकानेर जिले में जमीनें खरीदीं। जैसे महेश नागर ने जमीन 37,39,086 रुपये में खरीदी और मिलेनियम सोलर पावर के प्रमोटर बृजेश गोरसिया को 96,60,000 में 19 फरवरी 2010 को बेची।

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