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उदयपुर: चिंतन शिविर से पहले सचिन का बयान, नींबू 300 रुपये किलो, सांप्रदायिक मुद्दे ज्यादा दिनों तक नहीं चलेंगे
Fri, 13 May 2022 08:37 AM IST
अंकिता विश्वकर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उदयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उदयपुर
Published by: अंकिता विश्वकर्मा
Updated Fri, 13 May 2022 08:37 AM IST
सार
जब नींबू 300 रुपये प्रति किलो, सिलेंडर 1,000 रुपये और पेट्रोल की कीमत लगभग 125 रुपये पर पहुंच गई है। सरकार की आर्थिक नीतियां बुरी तरह विफल हुई हैं और सरकार में कोई इसकी जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है: सचिन पायलट,कांग्रेस नेता
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सचिन पायलट, कांग्रेस नेता।
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
वरिष्ठ कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने गुरुवार को भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस एक ऐसी धुरी है, जिसके इर्द-गिर्द भारतीय जनता पार्टी विरोधी गठबंधन बनता है और पार्टी को आगे भी यह धुरी बने रहना होगा। सचिन पायलट ने 2024 के विधानसभा चुनावों में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का सामना करने के लिए संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन को बेहतर विकल्प बताया है। वहीं, चिंतन शिविर पर सचिन पायलट ने कहा कि चुनाव को सफल बनाने के लिए तीन दिवसीय शिविर में रणनीति बनाई जाएगी।
उन्होंने भाजपा पर वास्तविक मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने का आरोप लगाते हुए कहा कि कुछ असामाजिक तत्व सड़कों और स्मारकों का नाम बदलने की मांग उठाकर देश के प्रमुख मुद्दों से भटकाते हैं। सचिन पायलट ने पूछा कि क्या कुतुब मीनार या ताजमहल का नाम बदलने की मांग पेट्रोल, डीज़ल, रसोई गैस और खाद्य पदार्थों की आसमान छूती कीमतों को कम करने से ज्यादा महत्वपूर्ण है?
कांग्रेस नेता ने आगे कहा कि ये ऐसे मुद्दे हैं जो असल मुद्दों से ध्यान भटकाने और लोगों की आंखों में धूल झोंकने के लिए उठाए जाते हैं, वह भी ऐसे समय में, जब नींबू 300 रुपये प्रति किलो, सिलेंडर 1,000 रुपये और पेट्रोल की कीमत लगभग 125 रुपये पर पहुंच गई है। राजकोषीय प्रबंधन में अराजकता फैली है, सरकार की आर्थिक नीतियां बुरी तरह विफल हुई हैं और सरकार में कोई इसकी जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है।
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उन्होंने भाजपा पर वास्तविक मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने का आरोप लगाते हुए कहा कि कुछ असामाजिक तत्व सड़कों और स्मारकों का नाम बदलने की मांग उठाकर देश के प्रमुख मुद्दों से भटकाते हैं। सचिन पायलट ने पूछा कि क्या कुतुब मीनार या ताजमहल का नाम बदलने की मांग पेट्रोल, डीज़ल, रसोई गैस और खाद्य पदार्थों की आसमान छूती कीमतों को कम करने से ज्यादा महत्वपूर्ण है?
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कांग्रेस नेता ने आगे कहा कि ये ऐसे मुद्दे हैं जो असल मुद्दों से ध्यान भटकाने और लोगों की आंखों में धूल झोंकने के लिए उठाए जाते हैं, वह भी ऐसे समय में, जब नींबू 300 रुपये प्रति किलो, सिलेंडर 1,000 रुपये और पेट्रोल की कीमत लगभग 125 रुपये पर पहुंच गई है। राजकोषीय प्रबंधन में अराजकता फैली है, सरकार की आर्थिक नीतियां बुरी तरह विफल हुई हैं और सरकार में कोई इसकी जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है।
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