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राजस्थान: टोंक के नौ नवाबों का पूरा शिजरा तैयार, 125 साल बाद एक जगह जुटा खानदाने अमीरिया का इतिहास
Fri, 09 Oct 2026 10:34 PM IST
प्रतीक पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, टोंक
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, टोंक
Published by: प्रतीक पांडेय
Updated Fri, 09 Oct 2026 10:34 PM IST
सार
टोंक रियासत के नौ नवाबों के वंशजों का विस्तृत शिजरा पहली बार एक जगह संकलित किया गया है। वर्ष 1901 में प्रकाशित उर्दू पुस्तक 'हदीका-ए-राजस्थान टोंक' में केवल चार नवाबों के परिवारों का सीमित विवरण था। अब तैयार की गई वंशावली में प्रत्येक नवाबी खानदान की तीन से सात पीढ़ियों का क्रमबद्ध रिकॉर्ड शामिल है।
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खानदाने अमीरिया का संपूर्ण शिजरा पहली बार तैयार
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
राजस्थान की एकमात्र मुस्लिम रियासत रहे टोंक के नवाबी इतिहास को सहेजते हुए शोधकर्ताओं ने खानदाने अमीरिया का संपूर्ण शिजरा पहली बार तैयार किया है। वर्ष 1901 के बाद यह पहला अवसर है जब टोंक रियासत के नौ नवाबों के वंशजों का विस्तृत ऐतिहासिक रिकॉर्ड एक स्थान पर संकलित हुआ है। इस वंशावली में प्रत्येक नवाबी खानदान की तीन से सात पीढ़ियों का क्रमबद्ध विवरण शामिल किया गया है। यह ऐतिहासिक दस्तावेज क्षेत्र की सामाजिक, सांस्कृतिक और स्थापत्य विरासत को समझने में महत्वपूर्ण योगदान देगा।
संभल से टोंक पहुंचे थे अमीर खां
टोंक रियासत की नींव नवाब अमीर खां के शासनकाल से जुड़ती है। संभल मुरादाबाद से टोंक पहुंचे अमीर खां ने अंग्रेजों के साथ संधि के पश्चात वर्ष 1817 में टोंक के प्रथम नवाब के रूप में शासन की बागडोर संभाली। इसके बाद लगभग डेढ़ शताब्दी तक नवाबी परंपरा ने इस क्षेत्र के सामाजिक, सांस्कृतिक और स्थापत्य इतिहास पर गहरी छाप छोड़ी। पूर्व जनसंपर्क अधिकारी याकूब अली खां ने बताया कि टोंक के नवाबों के खानदान का शिजरा संकलित करने का सबसे पहला उल्लेख वर्ष 1901 में मिलता है। उस समय असगर अली आबरू ने उर्दू भाषा में 'हदीका-ए-राजस्थान टोंक' नामक पुस्तक प्रकाशित की थी। इस ग्रंथ में नवाब इब्राहीम अली खां के मध्यकाल तक केवल चार नवाबों के परिवारों का विवरण शामिल था, जो लगभग दो पीढ़ियों तक सीमित था।
शिजरा संकलन के पूर्व प्रयास और चुनौतियां
वर्ष 1901 के बाद अनेक साहबजादों ने अपने-अपने स्तर पर हस्तलिखित अथवा मुद्रित रूप में पारिवारिक वंशावली तैयार करने के व्यक्तिगत प्रयास किए। इसके बाद सईद अहमद खां और मोहम्मद नईम खां ने संपूर्ण शिजरा तैयार करने की दिशा में गंभीर पहल की। हालांकि, लंबी बीमारी के कारण दोनों विशेषज्ञ इस जटिल कार्य को पूरा नहीं कर सके। अब लंबे समय के बाद सभी नौ नवाबों के वंशजों का प्रामाणिक और विस्तृत रिकॉर्ड एक साथ संकलित करने में सफलता प्राप्त हुई है।
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हिंदी भाषा में प्रकाशन और भावी उपयोगिता
इस नवनिर्मित शिजरे की सबसे प्रमुख विशेषता इसे पहली बार हिंदी भाषा में प्रकाशित करना है। यह प्रकाशन आम जनता को टोंक के नवाबी परिवार और उनकी पीढ़ियों के बारे में व्यवस्थित व प्रामाणिक जानकारी प्रदान करेगा। यह व्यापक वंशावली न केवल आम लोगों के लिए ज्ञानवर्धक सिद्ध होगी, बल्कि खानदानी पेंशन के दावों तथा अन्य ऐतिहासिक एवं पारिवारिक दस्तावेजी जरूरतों को पूरा करने में भी अत्यंत उपयोगी साबित होगी।
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संभल से टोंक पहुंचे थे अमीर खां
टोंक रियासत की नींव नवाब अमीर खां के शासनकाल से जुड़ती है। संभल मुरादाबाद से टोंक पहुंचे अमीर खां ने अंग्रेजों के साथ संधि के पश्चात वर्ष 1817 में टोंक के प्रथम नवाब के रूप में शासन की बागडोर संभाली। इसके बाद लगभग डेढ़ शताब्दी तक नवाबी परंपरा ने इस क्षेत्र के सामाजिक, सांस्कृतिक और स्थापत्य इतिहास पर गहरी छाप छोड़ी। पूर्व जनसंपर्क अधिकारी याकूब अली खां ने बताया कि टोंक के नवाबों के खानदान का शिजरा संकलित करने का सबसे पहला उल्लेख वर्ष 1901 में मिलता है। उस समय असगर अली आबरू ने उर्दू भाषा में 'हदीका-ए-राजस्थान टोंक' नामक पुस्तक प्रकाशित की थी। इस ग्रंथ में नवाब इब्राहीम अली खां के मध्यकाल तक केवल चार नवाबों के परिवारों का विवरण शामिल था, जो लगभग दो पीढ़ियों तक सीमित था।
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शिजरा संकलन के पूर्व प्रयास और चुनौतियां
वर्ष 1901 के बाद अनेक साहबजादों ने अपने-अपने स्तर पर हस्तलिखित अथवा मुद्रित रूप में पारिवारिक वंशावली तैयार करने के व्यक्तिगत प्रयास किए। इसके बाद सईद अहमद खां और मोहम्मद नईम खां ने संपूर्ण शिजरा तैयार करने की दिशा में गंभीर पहल की। हालांकि, लंबी बीमारी के कारण दोनों विशेषज्ञ इस जटिल कार्य को पूरा नहीं कर सके। अब लंबे समय के बाद सभी नौ नवाबों के वंशजों का प्रामाणिक और विस्तृत रिकॉर्ड एक साथ संकलित करने में सफलता प्राप्त हुई है।
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हिंदी भाषा में प्रकाशन और भावी उपयोगिता
इस नवनिर्मित शिजरे की सबसे प्रमुख विशेषता इसे पहली बार हिंदी भाषा में प्रकाशित करना है। यह प्रकाशन आम जनता को टोंक के नवाबी परिवार और उनकी पीढ़ियों के बारे में व्यवस्थित व प्रामाणिक जानकारी प्रदान करेगा। यह व्यापक वंशावली न केवल आम लोगों के लिए ज्ञानवर्धक सिद्ध होगी, बल्कि खानदानी पेंशन के दावों तथा अन्य ऐतिहासिक एवं पारिवारिक दस्तावेजी जरूरतों को पूरा करने में भी अत्यंत उपयोगी साबित होगी।