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'राशन' के लिए कहीं आपको साबुन-तेल न लेना पड़े?

Wed, 26 Aug 2015 06:28 PM IST
Updated Wed, 26 Aug 2015 06:28 PM IST
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To Ration anywhere you do not have to soap-oil

राजस्थान में सरकार और एक निजी कंपनी के बीच हुए समझौते के बाद राज्य की सरकारी राशन की दुकानों पर ब्रांडेड सामान भी बिक्री के लिए उपलब्ध होंगे।

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पिछले गुरुवार को राजस्थान सरकार के उपक्रम राजस्थान राज्य खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम और फ़्यूचर कंज़्यूमर इंटरप्राइज़ेज़ लिमिटेड के बीच इस योजना का क़रार हुआ।
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सामाजिक कार्यकर्ता राज्य सरकार के इस फ़ैसले का विरोध कर रहे हैं। इसी विषय पर बीबीसी संवाददाता सुशीला सिंह ने बात की 'राइट टू फ़ूड' कैंपेन से जुड़ी सामाजिक कार्यकर्ता कविता श्रीवास्तव से। पढ़ें बातचीत के मुख्य अंश
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पीडीएस
राजस्थान में पीडीएस में गेहूँ, चीनी और केरोसीन मिलता है, इन तीन चीज़ों पर राजस्थान सरकार सब्सिडी देती है, इन्हें पीडीएस डीलर ही देगा। इसके अलावा फ़ूड मार्केटिंग कॉर्पेोरेशन पाँच चीज़ों पर सब्सिडी देता है जिनमें मसाले, नमक, चाय इत्यादि शामिल हैं, ये चीज़ें भी उसी दाम पर मिलेंगी।

इस समझौते से पहले उचित मूल्य की दुकान पर इनके अलावा कोई और चीज़ नहीं मिलती थीं। समझौते के बाद बियानी समूह की फ़्यूचर इंटरप्राइज़ेज़ लिमिटेड कंपनी इन दुकानों पर अपने सामान बिक्री के लिए रख सकेगी, वो इन दुकानों में साबुन, तेल, सैनिटरी नैपकिन समेत जो चाहे वो चीज़ रख सकते हैं।

उचित मूल्य की दुकान के डीलर इस कंपनी को अपनी दुकान में जगह उपलब्ध कराएँगे. राज्य में मौजूद पीडीएस की कुल 25 हज़ार दुकानों में से पाँच हज़ार दुकानों के लिए ये समझौता हुआ है।

दिक़्क़त

To Ration anywhere you do not have to soap-oil

यहाँ ये जानना ज़रूरी है कि बियानी समूह बिग बाज़ार नामक मेगास्टोर चलाता है। इस समझौते के लिए सामने आने वाली ये एकमात्र कंपनी थी। इस समझौते की दिक़्क़त ये है कि दुकान पर ग़रीब ग्राहकों को सस्ते अनाज के साथ दूसरी चीज़ें ख़रीदने को मजबूर किया जा सकता है।

जैसे ग़रीबों से कहा जा सकता है कि तुम्हें सब्सिडी वाला गेहूँ तभी मिलेगा जब तुम फलां कंपनी का ये साबुन ख़रीदोगे। इस समझौते से एक सवाल ये भी खड़ा हुआ है कि क्या सरकार निजी कंपनी के मुनाफ़े को बढ़ावा दे रही है? और क्या वो निजी कंपनियों के मुनाफ़े के लिए काम करेगी?

शर्तें न हों
'राइट टू फ़ूड' कैंपेन के तहत हमारी मांग है कि सब्सिडी वाले खाद्य पदार्थों के संग प्रत्यक्ष या परोक्ष शर्तें न रखी जाएं। ये समझौता एक परोक्ष शर्त बन सकता है. इसलिए इस समझौते पर निगरानी रखने की ज़रूरत है।

केरल में सरकार पीडीएस दुकानों पर दूसरे उपभोक्ता सामान पहले से ही सब्सिडी पर उपलब्ध करा रही है, हम उसका भी अध्ययन कर रहे हैं। हम इसपर राशन डीलर एसोसियशन की राय भी जानने की कोशिश कर रहे हैं. कुल मिलाकर इससे जुड़े कई सवालों के जवाब अभी मिलने बाक़ी हैं।

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