Chaitra Navratri 2022: अनोखा मंदिर जहां चोर-डाकू चढ़ाते हैं हथकड़ियां, इस बार किसी ने चढ़ाई दरवाजा टूटी हुई जेल
कहा जाता है कि मंदिर में चोर और अपराधी जेल से छूटने की मनोकामना मांगते हैं। जब मन्नत पूरी होती है तो वो माता को हथकड़ी चढ़ाकर जाते हैं।
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आपने अब तक मंदिर में फूल और प्रसाद चढ़ाने की बात सुनी होगी लेकिन राजस्थान में एक ऐसा मंदिर है, जहां हथकड़ियां चढ़ाई जाती है। सबसे आश्चर्य की बात है कि मंदिर में चोर-डाकू विशेष रूप से पूजा करने आते हैं। चित्तौड़गढ़ जिले की बेगू तहसील में माता जोगणिया का मंदिर है। मंदिर में हथकड़ी चढ़ाने की अनूठी परंपरा है। इस बार चैत्र नवरात्रि पर किसी ने मंदिर में टूटी हुई गेट वाली जेल चढ़ाई है।
माता जोगणिया के मंदिर में मान्यता है कि चोर-डाकू माता से जेल से छूटने की मनोकामना मांगते हैं। अगर कोई चोर या अपराधी पुलिस की गिरफ्त से भागने में सफल होता है तो वो माता के मंदिर में हथकड़ी टांगकर अपनी मन्नत पूरी करता है।
मंदिर में हथकड़ी चढ़ाने की परंपरा सालों से चली आ रही है लेकिन पिछले दिनों पहली बार कोई व्यक्ति यहां लोहे से बना जेल के गेट टांग गया है। यह ढ़ांचा जेल जैसा बना हुआ है। इस पर लोहे की जालियां और एक गेट भी लगा हुआ है। यह गेट टूटा हुआ बनाया गया है। लोगों का मानना है कि कोई अपराधी जेल तोड़कर भागने में सफल रहा होगा। जिसके बाद उसने मन्नत के रूप में टूटे हुए जेल का ढांचा बनाकर मां के दरबार में भेंट किया है।
अपराध नहीं करने का लेते हैं संकल्प
इस मंदिर में यह भी मान्यता है कि किसी अपराधी की जब मन्नत पूरी होती है तो माता के सामने खड़े होकर भविष्य में अपराध नहीं करने का संकल्प लेते हैं। मंदिर में हथकड़ी चढ़ाने आने वाले लोग गुप्त तरीके से यहां आते हैं और चुपचाप हथकड़ी टांग कर चले जाते हैं। सार्वजनिक रूप से किसी अपराधी को यहां हथकड़ी टांगते हुए किसी ने नहीं देखा है ।
पशु बलि और शराब चढ़ाने की भी थी परंपरा
घने जंगलों से घिरे स्थान पर पहले मन्नत पूरी होने पर पशु बलि और शराब चढ़ाने की भी परंपरा थी लेकिन प्रमुख जैन साध्वी यश कंवर जी महाराज साहब और जोगणिया माता शक्ति पीठ के अध्यक्ष भंवर लाल जोशी के प्रयासों से यहां साल 1974 से पशु बलि पूरी तरह से प्रतिबंधित है। यह आज भी भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़ बूंदी और कोटा जिले के लोगों के आस्था का प्रमुख स्थल है। यहां दोनों नवरात्रि पर नौ दिन तक दर्शनार्थियों का मेला लगा रहता है।
ऐसी मान्यता है कि यह मंदिर पहले घने जंगलों से घिरा हुआ था और चोर डाकू जंगलों की वजह से यहां शरण लेते थे । उनकी माता के प्रति अगाध आस्था थी। यही वजह है कि जब वे पकड़े जाते और उन्हें सजा हो जाती, तब सजा काटकर सीधे यहां आकर हथकड़ी चढ़ाते थे। अपनी मुराद पूरी होने पर यह हथकड़ी चढ़ाने की परंपरा यहां बरसों से है मगर इस बार जेल के टूटे गेट का ढांचा चढ़ाने से यह सुर्खियों में आ गया ।