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जयपुर के एक मेट्रो स्टेशन की सारी कमान महिलाओं के हाथ में

Wed, 09 Mar 2016 02:20 PM IST
आभा शर्मा/जयपुर से, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
आभा शर्मा/जयपुर से, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए Updated Wed, 09 Mar 2016 02:20 PM IST
सार

  • श्यामनगर स्टेशन की कमान महिलाओं के हाथ में
  • स्टेशन का हर काम करती हैं केवल महिलाएं
  • टिकट बांटने से लेकर साफ सफाई का सारा काम
  • लोगों का भी मिलता है अच्छा रिस्पांस

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The whole command of shyamnagar metro station in the hands of women
- फोटो : bbc

विस्तार

“जयपुर के श्याम नगर मेट्रो स्टेशन को जब देश का पहला महिला शक्ति रेलवे स्टेशन बनाने की घोषणा हुई तो लोगों को लगा कि ये ज़्यादा दिन चल नहीं पायेगा। पर जब देखा कि सब काम बहुत अच्छे से हो रहा है तो हमें अच्छा फीडबैक मिलने लगा।”

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“लोग देखने आने लगे कि इसे सिर्फ़ महिलाऐं कैसे काम संभालती हैं? एक यात्री ने तो कहा कि अरे, यह तो अब जीके (सामान्य ज्ञान) का सवाल भी हो गया है। हमें बहुत फख्र होता है कि एक स्टेशन ऐसा भी है जो नारी शक्ति को समर्पित है।” यहां तैनात ग्राहक सेवा अधिकारी कविता मेहरा और टिकट ऑपरेटर अनीता ने बीबीसी से अपना अनुभव यूं साझा किया।
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स्टेशन कंट्रोलर यशोदा ने बताया “हाउसकीपिंग में जो महिलाएं हैं उनके लिए यह बहुत ही अच्छा है। इवनिंग शिफ्ट रात 10 बजे तक होती है, स्टेशन का इतना बड़ा एरिया है और कई बार डर भी लगता है। पर सभी महिला स्टाफ होने से वे अधिक सुरक्षित महसूस करती हैं।”
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कविता कहती हैं, “हम सभी अपने काम को बहुत अच्छे से कर लेते हैं, पर जयपुर के यात्रियों के अच्छे व्यवहार को भी इसका श्रेय मिलना चाहिए।” उधर यात्रीगण भी महिलाकर्मियों के कार्य और व्यवहार के क़ायल लगे।

हर काम बहुत सलीके से होता है संपन्न

The whole command of shyamnagar metro station in the hands of women

एक यात्री ने कहा “जहां पुरुष स्टाफ अधिक होता है, कोई भी जानकारी मांगो या रास्ता भी पूछो तो कहेंगे क्या पता? यूं ही कह देंगे, चले जाओ उधर, पर यहां बहुत अच्छा रेस्पोंस मिलता है।”

ज़मीर ख़ान और सलीम ख़ान भी उनसे सहमत होते हुए कहते हैं, “महिलाऐं बहुत ही सभ्य तरीक़े से बात करती हैं। पर क्या सिर्फ और सिर्फ महिलाओं द्वारा संचालित ऐसे कार्यस्थल होने चाहिए?

बीबीसी ने जब इस बारे में जेंडर एक्सपर्ट डॉ. करुणा पाण्डेय की राय जानी तो उन्होंने कहा कि जेंडर का अर्थ स्त्री-पुरुष समानता है ना कि कहीं सिर्फ स्त्री और कहीं सिर्फ पुरुष को आगे बढाना, ऐसी परंपरा से आगे जाकर संतुलन बिगड़ सकता है।

उधर जयपुर मेट्रो के निदेशक (ऑपरेशंस) चैनसुख नागर ने बातचीत में स्पष्ट किया कि “यह स्त्री-पुरुष वर्ग को विभाजित या अलग करने का नहीं बल्कि उस सोच को बदलने का प्रयास है जिसमें ऐसा समझा जाता है कि महिलाएं रेलवे जैसी हैवी इंडस्ट्री में काम नहीं कर सकती। पूरे विश्व में पांच प्रतिशत से भी कम महिलाएं इस क्षेत्र में हैं, इसीलिए यह एक अनूठा प्रयास किया गया है जिसे सभी ने सराहा है और जयपुर मेट्रो की एक नई पहचान बनी है।”

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