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पद्मावती विवाद से जुड़े ऐतिहासिक आइनों को तोड़ा
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Mon, 06 Mar 2017 01:31 PM IST
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महल में लगे ऐतिहासिक आईने की फाइल फोटो
- फोटो : Internet
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राजस्थान के चित्तौड़गढ़ स्थित ऐतिहासिक पद्मिनी महल में कुछ युवकों ने रविवार शाम ऐतिहासिक आईनों को तोड़ डाला। इन आइनों को लेकर यह दावा किया जाता है कि इनके जरिए खिलजी ने रानी पद्मावती को देखा था।
करणी सेना के कार्यकर्ताओं पर इस कार्रवाई को अंजाम देने का आरोप लग रहा है। इन आइनों को लेकर करणी सेना से जुड़े कुछ लोगों ने करीब 20 दिन पहले चेतावनी दी थी। इनका कहना था कि यह कहानी मनगढ़ंत है और रानी पद्मावती को गलत ढंग से प्रचारित किया जाता है। इन शीशों को हटाने के लिए चेतावनी भी गई थी। पुरातत्व विभाग, पुलिस और प्रशासन ने इस चेतावनी को गंभीरता से नहीं लिया।
रविवार की शाम तीन—चार युवक महल में पहुंचे और इन शीशों को तोड़ दिया। इसके बाद ये युवक वहां से भाग निकले। खास बात यह रही कि इस तोड़फोड़ की भनक वहां के स्टाफ को काफी देर तक नहीं लगी। पर्यटकों ने इसके बारे में उन्हें बताया। तब तक तोड़फोड़ करने वाले युवक भाग चुके थे।
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हालांकि इस मामले में अभी यह साफ नहीं हुआ है कि जिन लोगों ने महल में तोड़ फोड़ की वो करणी सेना के ही थे। लेकिन करणी सेना से जुड़े एक शख्स ने इस तोड़ फोड़ की जिम्मेदारी ली है और यह दावा किया है कि संगठन ने इस बारे में 20 दिन पहले ही पुरातत्व विभाग को आगाह कर दिया था। पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
गौरतलब है कि गत दिनों राजस्थान की राजधानी जयपुर में अपनी फिल्म की शूटिंग करने आए फिल्म निर्देशक संजय लीला भंसाली के साथ राजपूत करणी सेना ने इतिहास के साथ छेड़छाड़ का आरोप लगाया था और करणी सेना के कार्यकर्ताओं ने उनके साथ मारपीट भी की थी जिसके बाद इस मामले ने काफी तूल पकड़ लिया था।
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करणी सेना के कार्यकर्ताओं पर इस कार्रवाई को अंजाम देने का आरोप लग रहा है। इन आइनों को लेकर करणी सेना से जुड़े कुछ लोगों ने करीब 20 दिन पहले चेतावनी दी थी। इनका कहना था कि यह कहानी मनगढ़ंत है और रानी पद्मावती को गलत ढंग से प्रचारित किया जाता है। इन शीशों को हटाने के लिए चेतावनी भी गई थी। पुरातत्व विभाग, पुलिस और प्रशासन ने इस चेतावनी को गंभीरता से नहीं लिया।
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रविवार की शाम तीन—चार युवक महल में पहुंचे और इन शीशों को तोड़ दिया। इसके बाद ये युवक वहां से भाग निकले। खास बात यह रही कि इस तोड़फोड़ की भनक वहां के स्टाफ को काफी देर तक नहीं लगी। पर्यटकों ने इसके बारे में उन्हें बताया। तब तक तोड़फोड़ करने वाले युवक भाग चुके थे।
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हालांकि इस मामले में अभी यह साफ नहीं हुआ है कि जिन लोगों ने महल में तोड़ फोड़ की वो करणी सेना के ही थे। लेकिन करणी सेना से जुड़े एक शख्स ने इस तोड़ फोड़ की जिम्मेदारी ली है और यह दावा किया है कि संगठन ने इस बारे में 20 दिन पहले ही पुरातत्व विभाग को आगाह कर दिया था। पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
गौरतलब है कि गत दिनों राजस्थान की राजधानी जयपुर में अपनी फिल्म की शूटिंग करने आए फिल्म निर्देशक संजय लीला भंसाली के साथ राजपूत करणी सेना ने इतिहास के साथ छेड़छाड़ का आरोप लगाया था और करणी सेना के कार्यकर्ताओं ने उनके साथ मारपीट भी की थी जिसके बाद इस मामले ने काफी तूल पकड़ लिया था।