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Suspension of MPs: सांसदों के निलंबन पर क्या बोले बेनीवाल? राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी सुप्रीमो का तीखा बयान
Tue, 19 Dec 2023 10:03 AM IST
प्रिया वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नागौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नागौर
Published by: प्रिया वर्मा
Updated Tue, 19 Dec 2023 10:03 AM IST
सार
Rajasthan News: राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी से खींवसर के विधायक हनुमान बेनीवाल ने लोकसभा और राज्यसभा में हुए सांसदों के निलंबन को लेकर तीखा बयान दिया है। बेनीवाल ने कहा कि इस प्रकार से सांसदों को सस्पेंड किया जाना सरकार की हठधर्मिता दिखाता है।
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हनुमान बेनीवाल
- फोटो : साेशल मीडिया
विस्तार
राजस्थान की नागौर सीट से सांसद रह चुके हनुमान बेनीवाल ने लोकसभा और राज्यसभा से 78 सांसदों को सस्पेंड करने संबंधी आदेश पर कहा कि इस तरह के निर्णय केंद्र सरकार की हठधर्मिता का परिणाम हैं। संसद की सुरक्षा में चूक को स्वीकार करने के स्थान पर सरकार द्वारा इस तरह के निर्णय लेना निंदनीय है। संसद के इस शीतकालीन सत्र में अब तक 92 सांसदों को सस्पेंड किया जा चुका है।
उन्होंने कहा कि संसद की सुरक्षा में हुई भारी चूक के बाद गृह मंत्रालय के नेतृत्व में इस मामले की जांच की बात कही गई थी। ऐसे में विपक्ष द्वारा गृहमंत्री से सदन में वक्तव्य देने की मांग की जाना जायज है। लेकिन सांसदों का निलंबन करके इस तरह विपक्ष की आवाज को दबाना पूर्ण रूप से अनुचित है। सदन में लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा में सभापति से निष्पक्षता की उम्मीद पूरा सदन करता है। ऐसे में यदि आसन इस प्रकार के निर्णय लेकर सांसदों का निलंबन करता है तो उससे यह जाहिर होता है कि आसान सत्ता के दबाव में था।
ज्ञात रहे कि 2008 के विधानसभा चुनाव में बेनीवाल भाजपा के टिकट पर खींवसर से विधायक रह चुके हैं। बाद में आपसी मतभेद के चलते बेनीवाल ने भाजपा छोड़कर राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के नाम से नई पार्टी बना ली थी। 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्हें नागौर सीट सांसदी मिली थी। हाल में हुए विधानसभा चुनाव में उन्होंने खींवसर सीट से चुनाव लड़ा था और अपनी पार्टी से एकमात्र विधायक चुने गए। अभी दो दिन पहले ही बेनीवान ने अपनी संसद सदस्यता से इस्तीफा दिया है।
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उन्होंने कहा कि संसद की सुरक्षा में हुई भारी चूक के बाद गृह मंत्रालय के नेतृत्व में इस मामले की जांच की बात कही गई थी। ऐसे में विपक्ष द्वारा गृहमंत्री से सदन में वक्तव्य देने की मांग की जाना जायज है। लेकिन सांसदों का निलंबन करके इस तरह विपक्ष की आवाज को दबाना पूर्ण रूप से अनुचित है। सदन में लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा में सभापति से निष्पक्षता की उम्मीद पूरा सदन करता है। ऐसे में यदि आसन इस प्रकार के निर्णय लेकर सांसदों का निलंबन करता है तो उससे यह जाहिर होता है कि आसान सत्ता के दबाव में था।
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ज्ञात रहे कि 2008 के विधानसभा चुनाव में बेनीवाल भाजपा के टिकट पर खींवसर से विधायक रह चुके हैं। बाद में आपसी मतभेद के चलते बेनीवाल ने भाजपा छोड़कर राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के नाम से नई पार्टी बना ली थी। 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्हें नागौर सीट सांसदी मिली थी। हाल में हुए विधानसभा चुनाव में उन्होंने खींवसर सीट से चुनाव लड़ा था और अपनी पार्टी से एकमात्र विधायक चुने गए। अभी दो दिन पहले ही बेनीवान ने अपनी संसद सदस्यता से इस्तीफा दिया है।
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