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Rajasthan: सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के जस्टिस कल करेंगे सांगानेर खुली जेल का दौरा, ये बोले पूर्व जज लोकुर

Fri, 27 Jan 2023 05:07 PM IST
उदित दीक्षित न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: उदित दीक्षित Updated Fri, 27 Jan 2023 05:07 PM IST
सार

भारत के सुप्रीम कोर्ट के दूसरे वरिष्ठतम न्यायाधीश जस्टिस संजय किशन कौल सहित तीन शीर्ष न्यायाधीश जयपुर की सांगानेर की खुली जेल का दौरा करेंगे। यह इस तरह का पहला उच्च-स्तरीय दौरा होगा।

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Supreme Court and Rajasthan High Court Justices will visit Sanganer Open Jail on Saturday
पूर्व जस्टिस एमबी लोकुर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट के तीन जस्टिस शनिवार को जयपुर में सांगानेर की खुली जेल का दौरा कर किफायती और मानवीय जेल मॉडल के कामकाज का मूल्यांकन करेंगे। जहां कैदियों में सुधार लाया जाता है और वो अपने परिवार के सदस्यों के साथ रहकर वहां अपनी ज़िंदगी जीते हुए सजा काटते हैं। 

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जयपुर के सांगानेर की खुली जेल के दौरे में न्यायमूर्ति कौल के साथ उच्चतम न्यायालय के उनके साथी न्यायमूर्ति श्रीपति रवींद्र भट और न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस के साथ-साथ सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश, न्यायमूर्ति मदन बी. लोकुर और राजस्थान हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस न्यायाधीश पंकज मित्तल, राजस्थान और ओडिशा हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस केएस झवेरी होंगे। जेल के इस दौरे में राजस्थान के पूर्व पुलिस और जेल डीजी अजीत सिंह भी शामिल होंगे।
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खुली जेलों के मानवीय विचार को लागू करने का समय आ गया
जयपुर में पूर्व जस्टिस एमबी लोकुर भी मीडिया से रूबरू हुए। 2018 में जस्टिस एमबी लोकुर ने हर जिले में एक खुली जेल खोलने का ऐतिहासिक निर्णय दिया था और केंद्र से दिशा-निर्देश तैयार करने की पहल करने का आग्रह किया था। अब तक की प्रगति पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा, “खुली जेलों के मानवीय विचार को लागू करने का समय आ गया है। मैं सभी राज्य सरकारों से इस विचार को आगे बढ़ाने और हर जिले में खुली जेल स्थापित करने का आग्रह करता हूं।"
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खुली जेलों से जेल की कई समस्याएं हल हो सकती हैं
राजस्थान के पुलिस और जेल डीजी रहे अजीत सिंह ने कहा- “मुझे अभी भी यह पक्का विश्वास है कि खुली जेलों से जेल की कई समस्याएं हल हो सकती हैं। किसी भी आपराधिक न्याय प्रशासन का लक्ष्य कैदी का सुधार और पुनर्वास करना है। ओपन जेल मॉडल के फायदे- न्याय, स्वतंत्रता और कैदी की गरिमा के बुनियादी मानवाधिकारों से जुड़े हैं। हमें इसे पूरे देश में लागू करने और बढ़ाने में गति नहीं खोनी चाहिए।" 

खुली जेल के अपराधियों की दोबारा अपराध करने की दर नहीं के बराबर
प्रिजन एड एंड एक्शन रिसर्च की ओर से यह दौरा आयोजित कराया जा रहा है। पीएएआर एक निष्पक्ष अनुसंधान संगठन है, जो देश भर में जेल प्रणाली का अध्ययन करता है और राजस्थान के ओपन जेल मॉडल के विस्तार का हिमायती है। स्मिता चक्रवर्ती, पीएएआर की संस्थापक हैं जिनकी 2017 की रिपोर्ट के आधार पर 2018 में ऐतिहासिक फैसला पारित हुआ। 

उन्होंने कहा, “मानवीय विकल्प होने के साथ-साथ खुली जेलों का संचालन किफायती है और ये सरकारी खजाने पर कम बोझ डालती हैं। ये जेल पारंपरिक बंद जेलों की तुलना में 14 गुना सस्ती हैं, जहां जेल कर्मचारियों की जरूरत पारंपरिक या बंद जेल प्रणाली की तुलना में 81 गुना कम है। खुली जेल में अपराधियों की ओर से फिर से अपराध किए जाने या कैदियों के फिर से अपराध करने की दर भी न के बराबर है।”


सामाजिक परिवर्तन के कलाकार सुमित बोस करेंगे विशेष संगीत प्रदर्शन
जेल के दौरे के बाद सुस्मित बोस का एक विशेष प्रदर्शन होगा। बोस सामाजिक परिवर्तन कलाकार हैं। जो 5 दशकों से मानवाधिकारों को उजागर करने के लिए संगीत की शक्ति का उपयोग कर रहे हैं।

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