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राजस्थान: सोनिया गांधी की किताब को लेकर गहलोत ने सरकार पर साधा निशाना, बोले- दबाव में पीछे हटा पेंग्विन
Sat, 05 Sep 2026 08:43 PM IST
प्रतीक पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: प्रतीक पांडेय
Updated Sat, 05 Sep 2026 08:43 PM IST
सार
सोनिया गांधी की आगामी आत्मकथा ‘बिलॉन्गिंग’ के भारतीय प्रकाशन की जिम्मेदारी अब हार्पर कॉलिन्स इंडिया के पास है और पुस्तक 10 नवंबर 2026 को प्रकाशित होगी। अशोक गहलोत ने पेंग्विन के पीछे हटने को सरकार के दबाव से जोड़ने का आरोप लगाया, जबकि पेंग्विन ने बाहरी दबाव से इनकार किया है।
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पूर्व सीएम अशोक गहलोत
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी की आगामी पुस्तक के प्रकाशन से पेंग्विन के पीछे हटने का संबंध प्रधानमंत्री कार्यालय या केंद्र सरकार के दबाव से है। अब सोनिया गांधी की पुस्तक ‘बिलॉन्गिंग’ का भारतीय संस्करण हार्पर कॉलिन्स इंडिया प्रकाशित करेगा और यह 10 नवंबर 2026 को जारी होगी।
'पेंग्विन टालमटोल कर रहा था'
शनिवार को मीडिया से बात करते हुए गहलोत ने कहा कि प्रकाशक टालमटोल कर रहा था और बहाने बना रहा था। उन्होंने दावा किया कि पेंग्विन की वैश्विक मूल कंपनी अन्य बाजारों में पुस्तक प्रकाशित करने को तैयार है। गहलोत ने सवाल किया कि अगर पुस्तक वैश्विक स्तर पर प्रकाशित हो सकती है तो भारत में क्यों नहीं।
सरकार की चुप्पी को गहलोत ने बताया ‘मौन स्वीकृति’
गहलोत ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री कार्यालय और केंद्र सरकार के दबाव की बात सामने आने के बावजूद सरकार की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। उन्होंने इस चुप्पी को आरोपों की ‘मौन स्वीकृति’ बताया। हालांकि, पेंग्विन रैंडम हाउस इंडिया ने बाहरी दबाव के आरोपों से इनकार करते हुए कहा था कि बातचीत एक खास मुद्दे पर गतिरोध के कारण आगे नहीं बढ़ सकी।
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सोनिया के राजनीतिक योगदान गिनाकर किया बचाव
सोनिया गांधी का बचाव करते हुए गहलोत ने कहा कि वह कोई साधारण राजनीतिक नेता नहीं हैं। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में उनके 22 वर्षों के कार्यकाल, लोकसभा में विपक्ष की नेता के रूप में उनकी भूमिका और यूपीए सरकार के दौरान राष्ट्रीय सलाहकार परिषद की अध्यक्ष के रूप में उनके कार्यकाल का हवाला दिया।
आरटीआई, मनरेगा से खाद्य सुरक्षा तक योजनाओं का किया जिक्र
गहलोत ने यूपीए दौर की कई प्रमुख पहलों का श्रेय भी सोनिया गांधी को दिया। इनमें शिक्षा का अधिकार, खाद्य सुरक्षा अधिनियम, सूचना का अधिकार और महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम शामिल हैं।
निजी जीवन और नेहरू-गांधी परिवार का भी किया जिक्र
गहलोत ने सोनिया गांधी के निजी जीवन और नेहरू-गांधी परिवार से उनके जुड़ाव पर भी बात की। इंदिरा गांधी की हत्या और बाद में राजीव गांधी की हत्या का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस में सक्रिय नेतृत्व की भूमिका निभाने से पहले सोनिया गांधी को कई व्यक्तिगत नुकसान झेलने पड़े थे।
विदेशी मूल के सवाल पर भी गहलोत ने दिया जवाब
सोनिया गांधी के विदेशी मूल को लेकर हुई आलोचनाओं का जवाब देते हुए गहलोत ने कहा कि जब कोई व्यक्ति उस देश के प्रति समर्पित हो जाता है, जिसे उसने अपना लिया है, तो ऐसे भेद अप्रासंगिक हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी के लंबे राजनीतिक करियर का आकलन उनके काम और योगदान के आधार पर किया जाना चाहिए।
गहलोत के मुताबिक किताब कई राजनीतिक आरोपों का देगी जवाब
गहलोत ने सोनिया गांधी की आत्मकथा को उनके जीवन और राजनीतिक यात्रा का अपना पक्ष सामने रखने वाला महत्वपूर्ण दस्तावेज बताया। उनके अनुसार, पुस्तक का एक उद्देश्य एनडीए सरकार के दौरान सोनिया गांधी और नेहरू-गांधी परिवार को लेकर लगाए गए कई आरोपों और भ्रांतियों का जवाब देना भी है।
पेंग्विन के बाद हार्पर कॉलिन्स ने संभाली कमान
पेंग्विन के भारतीय संस्करण से हटने के बाद अब हार्पर कॉलिन्स इंडिया ने पुस्तक के प्रकाशन की जिम्मेदारी ली है। प्रकाशक ने घोषणा की है कि ‘Belonging: A Journey of Love’ का भारतीय संस्करण 10 नवंबर 2026 को प्रकाशित होगा।
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'पेंग्विन टालमटोल कर रहा था'
शनिवार को मीडिया से बात करते हुए गहलोत ने कहा कि प्रकाशक टालमटोल कर रहा था और बहाने बना रहा था। उन्होंने दावा किया कि पेंग्विन की वैश्विक मूल कंपनी अन्य बाजारों में पुस्तक प्रकाशित करने को तैयार है। गहलोत ने सवाल किया कि अगर पुस्तक वैश्विक स्तर पर प्रकाशित हो सकती है तो भारत में क्यों नहीं।
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सरकार की चुप्पी को गहलोत ने बताया ‘मौन स्वीकृति’
गहलोत ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री कार्यालय और केंद्र सरकार के दबाव की बात सामने आने के बावजूद सरकार की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। उन्होंने इस चुप्पी को आरोपों की ‘मौन स्वीकृति’ बताया। हालांकि, पेंग्विन रैंडम हाउस इंडिया ने बाहरी दबाव के आरोपों से इनकार करते हुए कहा था कि बातचीत एक खास मुद्दे पर गतिरोध के कारण आगे नहीं बढ़ सकी।
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सोनिया के राजनीतिक योगदान गिनाकर किया बचाव
सोनिया गांधी का बचाव करते हुए गहलोत ने कहा कि वह कोई साधारण राजनीतिक नेता नहीं हैं। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में उनके 22 वर्षों के कार्यकाल, लोकसभा में विपक्ष की नेता के रूप में उनकी भूमिका और यूपीए सरकार के दौरान राष्ट्रीय सलाहकार परिषद की अध्यक्ष के रूप में उनके कार्यकाल का हवाला दिया।
आरटीआई, मनरेगा से खाद्य सुरक्षा तक योजनाओं का किया जिक्र
गहलोत ने यूपीए दौर की कई प्रमुख पहलों का श्रेय भी सोनिया गांधी को दिया। इनमें शिक्षा का अधिकार, खाद्य सुरक्षा अधिनियम, सूचना का अधिकार और महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम शामिल हैं।
निजी जीवन और नेहरू-गांधी परिवार का भी किया जिक्र
गहलोत ने सोनिया गांधी के निजी जीवन और नेहरू-गांधी परिवार से उनके जुड़ाव पर भी बात की। इंदिरा गांधी की हत्या और बाद में राजीव गांधी की हत्या का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस में सक्रिय नेतृत्व की भूमिका निभाने से पहले सोनिया गांधी को कई व्यक्तिगत नुकसान झेलने पड़े थे।
विदेशी मूल के सवाल पर भी गहलोत ने दिया जवाब
सोनिया गांधी के विदेशी मूल को लेकर हुई आलोचनाओं का जवाब देते हुए गहलोत ने कहा कि जब कोई व्यक्ति उस देश के प्रति समर्पित हो जाता है, जिसे उसने अपना लिया है, तो ऐसे भेद अप्रासंगिक हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी के लंबे राजनीतिक करियर का आकलन उनके काम और योगदान के आधार पर किया जाना चाहिए।
गहलोत के मुताबिक किताब कई राजनीतिक आरोपों का देगी जवाब
गहलोत ने सोनिया गांधी की आत्मकथा को उनके जीवन और राजनीतिक यात्रा का अपना पक्ष सामने रखने वाला महत्वपूर्ण दस्तावेज बताया। उनके अनुसार, पुस्तक का एक उद्देश्य एनडीए सरकार के दौरान सोनिया गांधी और नेहरू-गांधी परिवार को लेकर लगाए गए कई आरोपों और भ्रांतियों का जवाब देना भी है।
पेंग्विन के बाद हार्पर कॉलिन्स ने संभाली कमान
पेंग्विन के भारतीय संस्करण से हटने के बाद अब हार्पर कॉलिन्स इंडिया ने पुस्तक के प्रकाशन की जिम्मेदारी ली है। प्रकाशक ने घोषणा की है कि ‘Belonging: A Journey of Love’ का भारतीय संस्करण 10 नवंबर 2026 को प्रकाशित होगा।