{"_id":"668181583bf1752db702f497","slug":"sirohi-news-story-of-abu-road-tribal-area-due-to-lack-of-facilities-they-sow-by-plowing-themselves-2024-06-30","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sirohi News: आबूरोड आदिवासी अंचल की कहानी, सुविधाओं के अभाव में बैलों की जगह खुद जुतकर करते हैं बुआई","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sirohi News: आबूरोड आदिवासी अंचल की कहानी, सुविधाओं के अभाव में बैलों की जगह खुद जुतकर करते हैं बुआई
Sun, 30 Jun 2024 09:31 PM IST
प्रिया वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सिरोही
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सिरोही
Published by: प्रिया वर्मा
Updated Sun, 30 Jun 2024 09:31 PM IST
सार
प्रदेश में भले ही किसान सम्मान योजना का शुभारंभ किया जा चुका हो लेकिन आबूरोड के आदिवासी अंचल में सुविधाओं के अभाव में आज भी आदिवासी खुद बैल की जगह जुतकर खेत जोत रहे हैं।
विज्ञापन
राजस्थान
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
सिरोही जिले के माउंट आबू उपखंड के कई आदिवासी इलाकों में आज भी सुविधाओं के अभाव में किसान खेतों की बुआई के लिए खुद बैल की जगह जुतकर काम कर रहे हैं। आदिवासी बहुल भाखर अंचल के कई ऐसे इलाके हैं, जहां सुविधाओं का अभाव है, ऐसे में किसानों का खेती के लिए पुराने परंपरागत तरीकों का सहारा लेना पड़ता है।
विज्ञापन
जिले के माउंट आबू उपखंड के आदिवासी बहुल भाखर अंचल में उपलीबोर सहित विभिन्न दुर्गम क्षेत्रों में निवासरत किसान आज भी खुद कोल्हू का बैल बनकर खेतों की बुआई करते हैं। यह ऐसे क्षेत्र हैं, जहां ट्रैक्टर का पहुंचना संभव नहीं है।
विज्ञापन
पहाड़ी क्षेत्र के उपलागढ़ ग्राम पंचायत के उपलीबोर क्षेत्र में खरीफ बुआई के लिए अपना खेत जोत रहे किसान सवाराम पुत्र रत्नाजी ने बताया कि इसके अलावा उनके पास कोई और विकल्प नहीं है और उन्हें खुद ही बैलों की जगह जुतकर बुआई के लिए खेत तैयार करना होता है।
विज्ञापन