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Sirohi News : प्रदेश में खनिज भंडार खोजने के लिए चुंबकीय सर्वेक्षण, 198 किमी क्षेत्र से जुटाए जाएंगे डेटा

Sat, 30 Nov 2024 03:27 PM IST
प्रिया वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सिरोही
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सिरोही Published by: प्रिया वर्मा Updated Sat, 30 Nov 2024 03:27 PM IST
सार

प्रदेश में सोने, तांबे और निकल के भंडारण का पता लगाने के लिए खान मंत्रालय के राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण ट्रस्ट (एनएमईटी) द्वारा वित्त पोषित एक उन्नत हेलीबोर्न टाइम डोमेन इलेक्ट्रोमैग्नेटिक (टीडीईएम) और चुंबकीय सर्वेक्षण शुरू करवाया गया है।

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Sirohi News: Magnetic survey to find mineral reserves in the state, data will be collected from 198 km area
राजस्थान - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजस्थान के आबूरोड सहित प्रदेश के 198 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में सोने, तांबे और निकल जैसे मूल्यवान खनिज भंडारों का पता लगाने के लिए एक उन्नत हेलीबोर्न टाइम डोमेन इलेक्ट्रोमैग्नेटिक (टीडीईएम) और चुंबकीय सर्वेक्षण शुरू किया गया है। इस कार्य को भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) और राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण ट्रस्ट (एनएमईटी) द्वारा संचालित किया जा रहा है।

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यह सर्वेक्षण राष्ट्रीय एयरबोर्न जियोफिजिकल मैपिंग प्रोग्राम (एनएजीएमपी) के तहत किया जा रहा है। हेलीबोर्न सर्वेक्षण में अत्याधुनिक टीडीईएम और चुंबकीय सेंसर का उपयोग किया जा रहा है। हेलीकॉप्टर से उड़ान के दौरान 198 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में 1,429 किलोमीटर की उड़ान लाइनों पर उच्च-रिजोल्यूशन डेटा एकत्र किया जाएगा। सर्वेक्षण 150 मीटर की उड़ान रेखा अंतराल और 1,500 मीटर की टाई लाइन अंतराल पर किया जा रहा है। सेंसर जमीन से केवल 40 मीटर की ऊंचाई पर डेटा एकत्र करेंगे।
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यह तकनीक सतह के नीचे छिपी भूवैज्ञानिक संरचनाओं और खनिज भंडारों का पता लगाने में मदद करेगी। चुंबकीय डेटा और टीडीईएम विधि का उपयोग तांबे, निकल और सोने जैसे खनिजों से जुड़े प्रवाहकीय क्षेत्रों की पहचान के लिए किया जाएगा। पारंपरिक तरीकों से पहचान में आने वाली कठिनाइयों को यह उन्नत तकनीक आसानी से हल कर सकेगी।
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भारत की खनिज अन्वेषण क्षमताओं को बढ़ाने और खनन क्षेत्र के सतत विकास को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से यह पहल की जा रही है। सर्वेक्षण के बाद प्राप्त डेटा को सार्वजनिक डोमेन में साझा किया जाएगा, ताकि सरकारी और निजी एजेंसियां इसका उपयोग कर सकें।


राजस्थान के अलावा, ओडिशा, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक में भी इसी प्रकार का सर्वेक्षण किया जा रहा है। इन राज्यों के 10 ब्लॉकों में कुल 3,354 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में यह कार्य किया जाएगा। माना जा रहा है कि सर्वेक्षण के परिणाम खनिज अन्वेषण रणनीतियों को परिष्कृत करने में मदद करेंगे और भविष्य की खनिज विकास परियोजनाओं के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करेंगे। यह परियोजना भारत के खनिज संसाधनों के वैज्ञानिक और व्यवस्थित उपयोग की दिशा में एक बड़ा कदम है और इसके परिणाम न केवल राज्य बल्कि पूरे देश के खनन क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण साबित होंगे।

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