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राजस्थान: माउंट आबू की पहाड़ियों में विराजमान मां काली, प्राकृतिक गुफा में दर्शन के लिए पहुंचते हैं श्रद्धालु
Tue, 13 Oct 2026 06:00 AM IST
सिरोही ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सिरोही
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सिरोही
Published by: सिरोही ब्यूरो
Updated Tue, 13 Oct 2026 06:00 AM IST
सार
अरावली पर्वतमाला की ऊंची पहाड़ियों के बीच करीब 1450 मीटर की ऊंचाई पर स्थित माउंट आबू के अचलगढ़ का प्राचीन मां काली मंदिर श्रद्धा और आस्था का प्रमुख केंद्र है। प्राकृतिक चट्टानों के बीच बनी गुफा में विराजमान मां काली के दर्शन के लिए श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।
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1450 मीटर की ऊंचाई पर गुफा में विराजमान मां काली
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
राजस्थान के एकमात्र हिल स्टेशन माउंट आबू की पहाड़ियों में कई ऐसे धार्मिक स्थल हैं, जहां आस्था के साथ प्रकृति की खूबसूरती भी देखने को मिलती है। इन्हीं में अचलगढ़ स्थित मां काली मंदिर शामिल है। प्राकृतिक चट्टानों के बीच बनी गुफा में विराजमान मां काली के दर्शन के लिए श्रद्धालु पहुंचते हैं। यहां तक पहुंचने का रास्ता, पहाड़ी परिवेश और मंदिर से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं इस स्थल को विशिष्ट बनाती हैं।
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पहाड़ी रास्ते से होकर पहुंचते हैं श्रद्धालु
मां काली मंदिर में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को माउंट आबू बस स्टैंड या टैक्सी स्टैंड से अचलगढ़ पहुंचना होता है। वहां पार्किंग स्थल पर सफारी टैक्सियां उपलब्ध रहती हैं, जो श्रद्धालुओं को करीब आधा किलोमीटर दूर पहाड़ी पर बने जैन मंदिर तक ले जाती हैं। इसके आगे मंदिर तक पैदल चढ़ाई करनी होती है। दोपहिया वाहन से आने वाले लोग भी रास्ते की स्थिति और उपलब्ध पहुंच के अनुसार आगे तक जा सकते हैं।
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पहाड़ी रास्ते से गुजरते हुए आसपास की प्राकृतिक चट्टानें और अरावली की वादियां दिखाई देती हैं। शांत वातावरण के बीच मंदिर तक पहुंचने का अनुभव श्रद्धालुओं के लिए यात्रा को खास बनाता है।
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महाभारत काल से जुड़ी हैं स्थानीय मान्यताएं
स्थानीय धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मंदिर का संबंध महाभारत काल से जोड़ा जाता है। हालांकि, इस मान्यता की ऐतिहासिक पुष्टि के लिए प्रामाणिक दस्तावेजों और पुरातात्विक साक्ष्यों की आवश्यकता है। इसके बावजूद मंदिर के प्रति श्रद्धालुओं की गहरी आस्था बनी हुई है।
यहां आने वाले भक्त मां काली के दर्शन कर सुख-समृद्धि, खुशहाली और परिवार की मंगलकामना करते हैं। धार्मिक विश्वास के चलते यह मंदिर स्थानीय लोगों के साथ माउंट आबू आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी महत्वपूर्ण है।
प्राकृतिक गुफा में स्थापित है मां काली की प्रतिमा
मंदिर की प्रमुख विशेषताओं में प्राकृतिक गुफा और उसके भीतर स्थापित मां काली की प्रतिमा शामिल है। उपलब्ध विवरणों के अनुसार, गोपीचंद महाराज की गुफा में मां काली की लगभग साढ़े छह फीट ऊंची प्रतिमा विराजमान है।
चट्टानों के बीच स्थित यह गुफा मंदिर की धार्मिक महत्ता के साथ उसकी प्राकृतिक विशिष्टता को भी दर्शाती है। यहां पहुंचने वाले श्रद्धालु पूजा-अर्चना कर आध्यात्मिक शांति का अनुभव करते हैं। धार्मिक अवसरों पर मंदिर में भक्तों की आवाजाही रहती है। मां काली के प्रति आस्था रखने वाले लोग दर्शन कर अपनी मनोकामनाएं पूर्ण होने की प्रार्थना करते हैं।
आस्था के साथ अरावली की प्राकृतिक सुंदरता का आकर्षण
अचलगढ़ क्षेत्र अपनी ऐतिहासिक विरासत, धार्मिक स्थलों और प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है। यहां आने वाले पर्यटक मंदिर में दर्शन के साथ अरावली की पहाड़ियों, प्राकृतिक चट्टानों और आसपास के मनोरम दृश्यों का आनंद भी लेते हैं।
पहाड़ियों के बीच स्थित मंदिर का परिवेश इसे अन्य सामान्य धार्मिक स्थलों से अलग अनुभव देता है। यही वजह है कि अचलगढ़ का यह स्थल धार्मिक आस्था रखने वाले लोगों के साथ प्रकृति प्रेमियों को भी आकर्षित कर सकता है।
धार्मिक पर्यटन को मिल सकती है नई पहचान
माउंट आबू आने वाले पर्यटकों के लिए अचलगढ़ का मां काली मंदिर एक महत्वपूर्ण धार्मिक पड़ाव बन सकता है। मंदिर से जुड़ी मान्यताओं, प्राकृतिक गुफा की संरचना और आसपास के मनोरम परिवेश को व्यवस्थित तरीके से प्रस्तुत किया जाए तो इस स्थल को धार्मिक पर्यटन के नक्शे पर और व्यापक पहचान मिल सकती है।
मंदिर के इतिहास और परंपराओं से संबंधित प्रामाणिक जानकारी जुटाने के साथ प्राकृतिक विरासत के संरक्षण पर ध्यान देना भी जरूरी है। इससे इस धार्मिक स्थल की विशेषताओं को बेहतर तरीके से सामने लाने और पर्यटकों को इसके बारे में जानकारी देने में मदद मिल सकती है।