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Rajasthan: त्रिनेत्र गणेश मंदिर मार्ग पर फिर दिखा बाघ, खौफ से श्रद्धालुओं की बंधी घिग्गी; सुरक्षा के दावे फेल

Wed, 30 Apr 2025 04:31 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सवाई माधोपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सवाई माधोपुर Published by: हिमांशु प्रियदर्शी Updated Wed, 30 Apr 2025 04:31 PM IST
सार

Sawai Madhopur: त्रिनेत्र गणेश मंदिर मार्ग पर दुर्ग के ऊपरी हिस्से में स्थित जैन मंदिर के पास एक बार फिर बाघ के दिखाई देने से श्रद्धालुओं में दहशत फैल गई। श्रद्धालु उस समय वहां मौजूद थे और बाघ के सामने आने पर सांसें थम-सी गईं। पढ़ें पूरी खबर...।

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Sawai Madhopur: Fear of tigers on Trinetra Ganesh temple road, devotees safety Forest department claims fail
बाघ को देखकर सहमें श्रद्धालु - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सवाई माधोपुर जिले स्थित रणथंभौर टाइगर रिजर्व इन दिनों एक बार फिर टाइगर मूवमेंट को लेकर चर्चा में है। लेकिन इस बार वजह रोमांच नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं की जान पर बना खतरा है। प्रदेश के सबसे बड़े वन्य क्षेत्र में आने वाला रणथंभौर दुर्ग और वहां स्थित प्रसिद्ध त्रिनेत्र गणेश मंदिर इन दिनों लगातार बाघों की आमद से भयभीत है।

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वन विभाग के मुताबिक, इस पूरे मार्ग में लगभग 17 से 18 बाघ सक्रिय हैं, जो रणथंभौर दुर्ग और मंदिर के रास्ते में लगातार देखे जा रहे हैं। यह वही इलाका है जहां बीते 16 अप्रैल को एक बाघ ने एक मासूम बच्चे की जान ले ली थी। इस घटना के बाद वन विभाग ने मार्ग को नौ दिनों के लिए बंद कर दिया था और सुरक्षा के दावे के साथ इसे दोबारा खोला गया। लेकिन हालात बताते हैं कि ये दावे खोखले साबित हो रहे हैं।
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Sawai Madhopur: Fear of tigers on Trinetra Ganesh temple road, devotees safety Forest department claims fail
बाघ को देखकर सहमें श्रद्धालु - फोटो : अमर उजाला

फिर मंदिर मार्ग पर दिखा बाघ, श्रद्धालु सहमे
सोमवार को त्रिनेत्र गणेश मंदिर मार्ग पर दुर्ग के ऊपरी हिस्से में स्थित जैन मंदिर के पास एक बार फिर बाघ के दिखाई देने से श्रद्धालुओं में दहशत फैल गई। श्रद्धालु उस समय वहां मौजूद थे और बाघ के सामने आने पर सांसें थम-सी गईं। लोग एक-दूसरे का सहारा लेकर चुपचाप बाघ के निकलने का इंतजार करते रहे। जैसे ही बाघ आंखों से ओझल हुआ, श्रद्धालुओं ने भय के साए में अपना रास्ता तय किया।
 
बाघों का खुला मूवमेंट, कोई सुरक्षित रास्ता नहीं
रणथंभौर दुर्ग की ओर जाने वाला मार्ग शेरपुर हेलीपेड से शुरू होता है, जहां से वन विभाग श्रद्धालुओं के लिए जीप और टैक्सी सेवाएं संचालित करता है। लेकिन जोगी महल गेट से लेकर मंदिर तक का रास्ता श्रद्धालुओं को पैदल ही तय करना होता है, जो सीधे बाघ के मूवमेंट एरिया में आता है।


 
बीते दिनों दुर्ग के नीचे भी एक बाघ ने दो लोगों पर हमला करने का प्रयास किया, लेकिन गनीमत रही कि कोई जान नहीं गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि दुर्ग के रास्ते चारों ओर से टूटे हुए हैं, जिससे बाघों के लिए मूवमेंट आसान हो गया है। वहीं, श्रद्धालुओं के पास न तो कोई सुरक्षात्मक साधन हैं और न ही वन विभाग द्वारा कोई गश्त का पुख्ता इंतजाम।

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वन विभाग और पुरातत्व विभाग पर लापरवाही के आरोप
स्थानीय प्रशासन और श्रद्धालुओं का आरोप है कि वन विभाग और पुरातत्व विभाग दोनों ही सुरक्षा को लेकर गंभीर नहीं हैं। विभाग का पूरा ध्यान पर्यटन की गतिविधियों पर केंद्रित है, लेकिन मंदिर तक पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की जान की सुरक्षा उनके एजेंडे में नहीं दिखती।
 
विभाग द्वारा जो सुरक्षा प्रबंध किए गए हैं, वे ऊंट के मुंह में जीरे के समान साबित हो रहे हैं। कुछ कैमरों और सीमित स्टाफ के भरोसे श्रद्धालुओं की जान को सुरक्षित नहीं रखा जा सकता, खासकर तब जब बाघों की संख्या 17 से अधिक हो और वे खुलेआम दुर्ग और मंदिर मार्ग पर घूम रहे हों।
 
भविष्य में किसी भी अनहोनी की आशंका
रणथंभौर जैसे संवेदनशील वन क्षेत्र में इस तरह से श्रद्धालुओं को बिना पर्याप्त सुरक्षा के पैदल यात्रा कराना सीधे खतरे को आमंत्रण देना है। जिस प्रकार से बाघों का मूवमेंट अब मंदिर मार्ग और दुर्ग तक पहुंच चुका है, यह कहना गलत नहीं होगा कि कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। यह जरूरी है कि प्रशासन तुरंत संज्ञान लेते हुए वन विभाग, पुरातत्व विभाग और पुलिस प्रशासन को एक साझा रणनीति के तहत सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद करने के निर्देश दे।
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