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जान पर खेलकर नहीं जलने दिया तिरंगा
जयपुर/समीर शर्मा
Updated Mon, 29 Jul 2013 12:52 AM IST
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राजस्थान सरकार ने भले ही कारगिल विजय को भुला दिया हो, लेकिन 1971 के भारत-पाक युद्ध के दौरान जान जोखिम में डालकर पाकिस्तान से लाया गया तिरंगा जयपुर में शान से फहराया जाएगा।
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युद्ध के वक्त पाकिस्तान में भारत के उच्चायुक्त रहे जेके अटल के निधन के बाद अब उनका परिवार उसी तिरंगे को 15 अगस्त व 26 जनवरी को फहराता आया है।
जेके अटल ने 1971 के इस संस्मरण को अपनी डायरी में लिखा है। उन्होंने लिखा है कि युद्ध शुरू हो चुका था और पाकिस्तानी सेना और पुलिस भारतीय दूतावास में घुसने का प्रयास कर रही थी। तिरंगे को जलाने के उद्देश्य से वे दरवाजा तक तोड़ चुके थे।
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उन्होंने जैसे-तैसे तिरंगे को उतारा और तीन तह कर शर्ट के भीतर अपने बदन पर लपेट लिया। इसके बाद वे वहीं नजरबंद रहे, लेकिन तिरंगे को भी छिपाकर रखा। यह भनक तक नहीं लगने दी कि उनके पास भारतीय ध्वज है।
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वे 1971 के अंत में भारत पहुंचे और तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को वह तिरंगा भेंट किया। लेकिन इंदिरा गांधी ने अटल को ही तिरंगा सौंपा और इसे संभाल कर रखने की जिम्मेदारी दी।
इसके बाद से ही जयपुर स्थित उनके निवास पर यह तिरंगा हर 15 अगस्त और 26 जनवरी को फहराया जाता है।
जेके अटल का निधन 1999 में हुआ और इसके बाद उनका परिवार इसी तिरंगे को फहराने की परंपरा निभा रहा है।