आरसीए चुनाव में सियासी परिवारों की एंट्री: 3 गुट आमने-सामने; अध्यक्ष पद पर खींवसर-राठौड़ के बेटों की दावेदारी
राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन चुनाव में पांच प्रभावशाली राजनीतिक परिवारों के बेटों ने विभिन्न पदों पर नामांकन दाखिल किया। अध्यक्ष पद के लिए तीन दावेदारों के साथ तीन गुट मैदान में हैं।
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राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (RCA) के चुनाव में प्रदेश की सियासत से जुड़े प्रभावशाली परिवारों की एंट्री से मुकाबला दिलचस्प हो गया है। नामांकन के पहले दिन सरकार और भाजपा संगठन से जुड़े नेताओं के बेटों ने अलग-अलग पदों के लिए दावेदारी पेश की। इसके साथ ही RCA में तीन गुट सामने आ गए हैं।
स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर के बेटे धनंजय सिंह खींवसर ने अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल किया है। वहीं पूर्व चिकित्सा मंत्री राजेंद्र राठौड़ के बेटे पराक्रम सिंह राठौड़ ने भी अध्यक्ष पद पर दावेदारी जताई है। शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के बेटे पवन दिलावर ने उपाध्यक्ष पद के लिए नामांकन भरा है।
राज्यसभा सांसद घनश्याम तिवाड़ी के बेटे आशीष तिवाड़ी ने कोषाध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल किया है। भाजपा विधायक जसवंत यादव के बेटे मोहित यादव ने सचिव और उपाध्यक्ष पद के लिए नामांकन किया है।
अध्यक्ष पद के लिए दो बड़े चेहरे
RCA चुनाव में फिलहाल अध्यक्ष पद को लेकर धनंजय सिंह खींवसर और पराक्रम सिंह राठौड़ आमने-सामने दिखाई दे रहे हैं। धनंजय सिंह नामांकन दाखिल करने पहुंचे और कहा कि सरकार की ओर से उन्हें कोई सूचना नहीं मिली है, इसलिए उन्होंने नामांकन किया है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें दूसरे पैनल के बारे में कोई जानकारी नहीं है।
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तीसरा गुट भी मैदान में
RCA चुनाव में तीसरा गुट बृजकिशोर उपाध्याय के खेमे का बताया जा रहा है। इस पैनल से बृजकिशोर शर्मा ने अध्यक्ष पद के लिए नामांकन किया है। रतन सिंह ने उपाध्यक्ष, पिंकेश पोरवाल ने सचिव, राजेश सारस्वत ने संयुक्त सचिव, विष्णु अग्रवाल ने कोषाध्यक्ष और अरिष्ट सिंघवी ने कार्यकारी सदस्य पद के लिए नामांकन दाखिल किया है।
इस तरह नामांकन के पहले दिन ही RCA चुनाव में तीन अलग-अलग खेमों की तस्वीर सामने आई है। अध्यक्ष पद के लिए तीन दावेदारों के नामांकन से मुकाबला और रोचक हो गया है।
सरकार-संगठन के रुख पर भी नजर
भाजपा समर्थित जिला क्रिकेट संघों से जुड़े लोगों की ओर से कहा जा रहा है कि सरकार और संगठन की ओर से जो निर्देश मिलेंगे, उसी के अनुसार आगे की रणनीति तय की जाएगी। इससे चुनाव में राजनीतिक समर्थन को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं।