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Rajasthan Assembly election results 2018: राजस्थान में भाजपा की हार के ये रहे पांच बड़े कारण 

Wed, 12 Dec 2018 04:42 AM IST
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 12 Dec 2018 04:42 AM IST
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Rajasthan Vidhan Sabha Chunav 2018 final results how BJP loses the battle
वसुंधरा राजे के खिलाफ जनादेश
राजस्थान में चुनाव नतीजे वैसे ही आए जिस तरह के अनुमान लगाए जा रहे हैं। पूर्व सीएम अशोक गहलोत और प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट की अगुवाई में कांग्रेस ने पांच साल बाद सत्ता में वापसी की है। रुझान बता रहे हैं कि कांग्रेस ने भाजपा को काफी पीछे छोड़ दिया है। समझने की कोशिश करते हैं कि भाजपा की हार के 5 बड़े कारण क्या रहे।  
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सत्ता विरोधी रुझान 

राजस्थान में इस बार सत्ता विरोधी रुझान चरम पर था। जमीनी हालात की बात करें तो अधिकतर लोगों का कहना था कि वसुंधरा राजे उम्मीदों पर खरी नहीं उतरीं। हालांकि, लोगों को पीएम नरेंद्र मोदी से शिकायत नहीं थी, वह पहली पसंद बनकर उभरे। लेकिन वसुंधरा राजे से लोग नाराज दिखे। अमर उजाला के चुनावी रथ के दौरे में भी बातचीत के दौरान लोगों ने ऐसा ही कहा। मतदाताओं के इस रुख ने कांग्रेस की वापसी में बड़ी भूमिका निभाई। 
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वसुंधरा के प्रति भारी नाराजगी 

कई मामलों पर वसुंधरा राजे के रुख ने लोगों को नाराज किया। फसलों का पूरा मुआवजा न मिलने, खाद वितरण में पुलिस बल का प्रयोग, किसानों की आत्महत्या, अपराधों में बढ़ोतरी, रोजगार की समस्या, डीजल-पेट्रोल-गैस के बढ़ते दाम, बिजली और जलापूर्ति जैसे मुद्दों की वजह से लोगों में भाजपा और मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के प्रति रोष दिखा। इसके अलावा राजपूत भी इस बार वसुंधरा सरकार से बेहद नाराज थे। इसका असर अब नतीजों में भी दिख रहा है।
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टिकट बंटवारा 

इस बार भाजपा में टिकट बंटवारे को लेकर संग्राम छिड़ गया था। बड़ी संख्या में मौजूदा विधायकों के टिकट काटे गए। इसके अलावा कुछ मंत्रियों को भी टिकट नहीं दिया गया। इससे नाराज नेताओं ने बगावत का रुख अख्तियार कर लिया। हालांकि, मतदान से पहले कुछ बड़े नेता मान गए लेकिन समर्थकों में पहले ही निराशा घर कर गई थी। विधायकों से जनता की नाराजगी ने रही-सही कसर पूरी कर दी। टिकट बंटवारे में वसुंधरा राजे के दखल ने भी भाजपा का खेल बिगाड़ने में बड़ी भूमिका निभाई। 

बागियों ने हराया 

इस बार कुछ बड़े नेता वसुंधरा सरकार से नाराज होकर बागी हो गए। भाजपा विधायक घनश्याम तिवाड़ी ने अलग पार्टी भारत वाहिनी का गठन कर चुनाव लड़ा। उन्होंने खुलेआम वसुंधरा राजे का विरोध किया था। वह सांगानेर से 5 बार विधायक रह चुके हैं और पिछली बार करीब 60 हजार वोटों से जीते थे। वहीं, एक और बड़े नेता निर्दलीय विधायक हनुमान बेनीवाल भी राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी बनाकर चुनाव मैदान में उतरे। नागौर से खींवसर से विधायक बेनीवाल ने 57 सीटों पर उम्मीदवार उतारे। इसके अलावा कई दूसरे बागियों ने भी भाजपा का खेल बिगाड़ने में अहम भूमिका निभाई। 

महिला वोटर 

राजस्थान में इस बार महिला वोटरों ने सरकार बनाने में अहम भूमिका निभाई। मतदान प्रतिशत के हिसाब से महिला मतदाता, पुरुष मतदाताओं से आगे रहीं। इस बार महिलाओं का मतदान प्रतिशत 74.66% और पुरुषों का मतदान प्रतिशत 73.81% रहा। 2013 के पिछले चुनाव में भी महिलाएं आगे रही थीं और मतदान का प्रतिशत 75.57% और 74.92% रहा था। महिलाओं के बढ़े हुए मतदान प्रतिशत ने ही वसुंधरा राजे की सत्ता गिराने में बड़ा रोल निभाया। महिलाओं के लिए चलाई गईं योजनाएं भी काम नहीं आई। 
 
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