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राजस्थान: विशेष शिक्षा शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कामों से मिलेगी मुक्ति, अब बच्चों की पढ़ाई पर रहेगा फोकस
Fri, 04 Sep 2026 07:14 PM IST
प्रिया वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: प्रिया वर्मा
Updated Fri, 04 Sep 2026 07:14 PM IST
सार
स्कूलों में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की मदद करने वाले शिक्षकों पर अब अतिरिक्त गैर-शैक्षणिक कामों का बोझ नहीं रहेगा। शिक्षा विभाग ने श्रीगंगानगर और अलवर में संस्थान प्रधानों को ऐसे निर्देश जारी किए हैं।
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विशेष शिक्षा शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्यों से मिली मुक्ति
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
राजस्थान के श्रीगंगानगर और अलवर जिले में शिक्षा विभाग ने विशेष शिक्षा शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक जिम्मेदारियों से मुक्त करने के निर्देश जारी किए हैं। अब संस्थान प्रधान इन शिक्षकों को कार्यक्रमों और परीक्षाओं के प्रबंधन जैसे अतिरिक्त कामों में नहीं लगाएंगे। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में 75 हजार से ज्यादा विशेष आवश्यकता वाले विद्यार्थी पढ़ रहे हैं, जिन्हें ध्यान में रखते हुए विभाग ने यह फैसला लिया है।
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विशेष जिम्मेदारियों पर रहेगा ध्यान
विभाग का मानना है कि शिक्षकों का समय गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाने के बजाय विशेष आवश्यकता वाले बच्चों से जुड़े कामों पर केंद्रित होना चाहिए। जिला स्तर पर नियुक्त विशेष शिक्षा शिक्षक और रिसोर्स पर्सन अपने स्कूल के अलावा आसपास के क्षेत्रों के विद्यार्थियों को भी पढ़ाई में मदद देते हैं। ये शिक्षक समावेशी शिक्षा से जुड़ी गतिविधियों जैसे परिवहन, एस्कॉर्ट, रीडर और छात्रवृत्ति भत्ते की सुविधाएं संभालते हैं। इसके साथ ही विशेष सहायता की जरूरत वाले बच्चों की पहचान करना भी इनकी मुख्य जिम्मेदारी है।
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शिक्षक संघ का पक्ष और भर्ती प्रक्रिया
राजस्थान प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष विपिन प्रकाश शर्मा ने कहा कि विशेष शिक्षक स्कूल में बच्चों के व्यवहार को संभालने और उन्हें सहज बनाने में मदद करते हैं। स्कूल के बाद ब्लॉक स्तर पर तैनात शिक्षक अन्य बच्चों की पहचान कर उन्हें पढ़ाई से जोड़ते हैं, इसलिए उन पर अतिरिक्त बोझ नहीं होना चाहिए।
सरकार ने पिछले साल नवंबर में 242 विशेष शिक्षा शिक्षकों की भर्ती और पदोन्नति को वित्तीय मंजूरी दी थी, जिससे कक्षा 11 और 12 के विद्यार्थियों को विशेष शिक्षक मिले। विभाग ने पहली बार विशेष शिक्षा शिक्षकों को व्याख्याता पद पर भर्ती और पदोन्नत किया है। इससे पहले सरकार ने वर्ष 2007 में ग्रेड-थर्ड और वर्ष 2015 में कक्षा नौ व 10 के लिए भर्तियां की थीं। विभाग के नए निर्देशों के बाद विशेष शिक्षा शिक्षकों से उम्मीद की जा रही है कि वे अपना अधिक समय विशेष आवश्यकता वाले विद्यार्थियों की शिक्षा, पहचान और सहायता से जुड़े कार्यों में दे सकेंगे।