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Rajasthan: नरसिम्हा राव सरकार में ही बन जाता राम मंदिर, शंकराचार्य बोले- मोहम्मद साहब के पूर्वज हिंदू

Tue, 20 Sep 2022 04:57 PM IST
उदित दीक्षित न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: उदित दीक्षित Updated Tue, 20 Sep 2022 04:57 PM IST
सार

Rajasthan: शंकराचार्य निश्चालानंद (Shankaracharya Nischalananda) ने जयपुर में मीडिया से बात करते हुए कहा कि सबके पूर्वज सनातनी, वैदिक और हिूंद थे। ईसा मसीह, मोहम्मद साहब के भी पूर्वज यही थे। सनातन धर्म का समय है, 1 अरब 97 करोड़ 29 लाख 49 हजार 122 वर्षों की हमारे यहां परंपरा है।

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Rajasthan Shankaracharya Nischalananda Ayodhya on Ram Mandir Mosque
जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Rajasthan: पुरी पीठ के शंकराचार्य स्वामी निश्चालानंद सरस्वती ने राजस्थान की राजधानी जयपुर में बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा, तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव सरकार के कहने पर रामालय ट्रस्ट पर सभी शंकराचार्यों ने दस्तखत कर दिए थे। उनका लक्ष्य अयोध्या में मंदिर और मस्जिद दोनों बनाने का था। इसलिए मैंने ऐसा नहीं किया, अगर मैंने भी हस्ताक्षर कर दिया होता तो आज अगल-बगल राम मंदिर और मस्जिद बन गए होते।
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शंकराचार्य निश्चालानंद ने कहा, सबके पूर्वज सनातनी, वैदिक और हिूंद थे। ईसा मसीह, मोहम्मद साहब के भी पूर्वज यही थे। सनातन धर्म का समय है, 1 अरब 97 करोड़ 29 लाख 49 हजार 122 वर्षों की हमारे यहां परंपरा है। पुरी पीठ के शंकराचार्य स्वामी निश्चालानंद सरस्वती ने जयपुर के मानसरोवर में अभिनन्दन माहेश्वरी समाज के कार्यक्रम में मीडिया से बात करते यह बातें कहीं। 
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इससे पहले रविवार को नागौर हिंदू राष्ट्र संगोष्ठी में भी शंकराचार्य निश्चालानंद ने बड़ी बात कही थी। उत्तर प्रदेश की ज्ञानवापी में मिले शिवलिंग को लेकर उन्होंने कहा था, ज्ञानवापी की क्या बात है, हम तो मक्का तक पहुंच गए हैं। वहां मक्केश्वर महादेव हैं। भारत हिंदू राष्ट्र है, अगर सरकार इसे हिंदू राष्ट्र घोषित करती है तो दुनिया के 15 देश हिंदू राष्ट्र बनने की तैयारी में हैं। सभी भारत के रुख का इंतजार कर रहे हैं। इस दौरान उन्होंने नेपाल और मॉरीशस का नाम भी लिया था। 
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जमीन देने पर विचार करना चाहिए
जयपुर में मीडिया से बात करते हुए शंकराचार्य निश्चालानंद  ने कहा, सत्य तो सत्य ही होता है। राम मंदिर और मस्जिद अगल-बगल या आमने-सामने किसके हत्थाक्षर पर नहीं बने, मेर। तत्कालीन नरसिम्हा राव सरकार की यही योजना थी। इसका मुझे श्रेय नहीं चाहिए, पर यह सत्य है। बाबरी मस्जिद के बदले आदित्यनाथ योगी, संसद और सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष को 5 एकड़ जमीन दे दी। इस पर विचार करना चाहिए। 

जानिए क्या है ज्ञानवापी विवाद?
1991 में वाराणसी कोर्ट में काशी विश्वनाथ ज्ञानवापी केस में पहला मुकदमा दाखिल किया गया था। जिसे 1993 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पूजास्थल कानून का हवाला देकर स्टे लगा दी और यथास्थिति कायम रखने के आदेश जारी कर दिए। 2018 में सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले बाद 2019 में वाराणसी कोर्ट में इस मामले में फिर से सुनवाई शुरू हुई। 2021 में एक फास्ट ट्रैक कोर्ट से ज्ञानवापी मस्जिद के पुरातात्विक सर्वेक्षण की मंजूरी दे दी।


16 मई को इसका सर्वे पूरा हुआ। इस दौरान हिंदू पक्ष की ओर से दावा किया कि कुएं में शिवलिंग मिला है। वहीं, मुस्लिम पक्ष ने इस तरह की सभी बातों से इनकार किया। मुस्लिम पक्ष ने कोर्ट में पूजा स्थल कानून का हवाला देकर हिंदू पक्ष की याचिका खारिज करने की मांग की। 12 सितंबर को कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष की याचिका खारिज कर दी। साथ ही आदेश में कहा कि इस मामले में सुनवाई जारी रहेगी।  
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