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Rajasthan: रीट भर्ती-2016 आज भी अधूरी, सीएम के आश्वासन को ही एक साल बीता

Mon, 20 Jun 2022 09:17 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: दिनेश शर्मा Updated Mon, 20 Jun 2022 09:17 PM IST
सार

अपात्र अभ्यर्थियों के चयन से इन दोनों विषयों के करीब 678 पद आज भी रिक्त पड़े हैं। वास्तविक पात्र अभ्यर्थी आज भी इन रिक्त पदों पर नयी चयनसूची की उम्मीद में अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के समक्ष गुहार लगा रहे हैं।

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Rajasthan: REET Recruitment-2016 still incomplete, only one year passed after CM's assurance
सीएम अशोक गहलोत (सांकेतिक फोटो) - फोटो : Social Media

विस्तार

राजस्थान रीट भर्ती 2016 का मामला लगातार चर्चा में रहता है। एक वर्ष पहले प्रदेश के मुखिया अशोक गहलोत ने वर्षों से लंबित रीट भर्ती 2016 को पूर्ण करने के लिए सुप्रीम कोर्ट से एसएलपी वापसी की घोषणा की थी। साथ ही पीड़ित बेरोजगारों को आश्वस्त किया था कि सरकार के इस कदम से अंग्रेजी व विज्ञान-गणित के रिक्त पदों पर बेरोजगारों को नियुक्ति मिल सकेगी। एक साल बीतने के बाद भी मुख्यमंत्री का यह बेरोजगार हितैषी प्रशासनिक निर्णय अभी तक सही अर्थ में पूर्ण नहीं हो पाया है। 
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निदेशालय ने एसएलपी वापसी के बाद विज्ञान-गणित के 874 तथा अंग्रेजी के 511 पदों पर अस्थायी चयनसूचियां जारी की थीं। लेकिन निदेशालय की एक बड़ी खामी ने मुख्यमंत्री की सार्थक पहल को आज तक सार्थक नहीं होने दिया है। सूची जारी करने से पूर्व निदेशालय ने चयनित अभ्यर्थियों की पात्रता का सत्यापन किए बिना ही अस्थायी चयनसूचियों को प्रतीक्षा सूचि का रूप देकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया। जिससे सैकड़ों चयनित अपात्र व अनुपस्थित होने के बावजूद चयनसूची का हिस्सा बन गए, जिसका सीधा नुकसान वास्तविक पात्र अभ्यर्थियों को आज तक भुगतना पड़ रहा है। 
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निदेशालय के आंकड़े और सचिवालय की टिप्पणी स्पष्ट दर्शा रहे हैं कि अपात्र अभ्यर्थियों के चयन से इन दोनों विषयों के करीब 678 पद आज भी रिक्त पड़े हैं। वास्तविक पात्र अभ्यर्थी आज भी इन रिक्त पदों पर नयी चयनसूची की उम्मीद में अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के समक्ष गुहार लगा रहे हैं।
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बड़ी संख्या में अपात्र अभ्यर्थियों के चयन से रिक्त सैकड़ों पदों को भरने के लिए वंचित पात्र अभ्यर्थी लगातार मांग उठा रहे हैं। बजट सत्र में मामला विधानसभा में भी खूब उठा था। स्वयं निदेशालय ने भी अपनी भूल सुधारते हुए इन रिक्त पदों को भरने के लिए सचिवालय से मार्गदर्शन मांगा हुआ है। शिक्षा मंत्री स्वयं कई बार मीडिया में स्पष्टीकरण दे चुके हैं कि मामले में उच्च स्तरीय परीक्षण जारी है। पीड़ित बेरोजगारों का आरोप है कि ब्यूरोक्रेसी सरकार के सार्थक कदम की परवाह किए बिना ही उक्त मामले को दबाने में लगी हुई है। हकीकत यही है कि एसएलपी वापसी के ठीक एक साल बाद भी इस भर्ती के आधे पद रिक्त हैं। 

पीड़ित बेरोजगारों इन सवालों के जवाब मांग रहे हैं- 
1) निदेशालय ने हाई कोर्ट की खंडपीठ के स्पष्ट जजमेंट के बाद भी बिना पात्रता सत्यापन के अस्थायी सूची मात्र से ही पल्ला क्यों झाड़ लिया है?
2) निदेशालय और सरकार की मंशा के बाद भी नयी चयनसूची के लिए सचिवालय से अनुमति में इतनी देरी क्यों? 
3) यदि सरकार ने एसएलपी वापिस ले ही ली है तो रिक्त पदों को भरने में आनाकानी क्यों?
4) जिस सूची में करीब आधे अपात्र अभ्यर्थी शामिल हों, क्या वह सूची सही अर्थ में प्रतीक्षा सूची हो सकती है?
5) निदेशालय और सचिवालय दोनों स्वीकार कर रहे हैं कि अपात्रों के चयन से करीब आधे पद रिक्त रह गए हैं तो नई चयनसूची में देरी क्यों?
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