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Rajasthan: कल बंद रहेंगे प्राइवेट हॉस्पिटल, राइट टू हेल्थ बिल के विरोध में 'नो टू आरटीएच' संघर्ष समिति का ऐलान

Fri, 10 Feb 2023 07:54 PM IST
उदित दीक्षित न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: उदित दीक्षित Updated Fri, 10 Feb 2023 07:54 PM IST
सार

11 फरवरी को राजस्थान में प्रदेशभर के प्राइवेट हॉस्पिटल और क्लिनिक सुबह 8 बजे से अगले 24 घंटे बंद रहेंगे। राइट टू हेल्थ बिल' के विरोध में 'नो टू आरटीएच' संघर्ष समिति ने इसका ऐलान किया है। सरकारी डॉक्टर्स भी समर्थन में 2 घण्टे पेन डाउन रखेंगे।

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Rajasthan Private hospitals closed on 11 February in protest against right to health bill
राइट टू हेल्थ बिल के खिलाफ चिकित्सकों ने एक संयुक्त संघर्ष समिति का गठन किया। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

प्रदेश में प्रस्तावित राइट टू हेल्थ बिल के खिलाफ चिकित्सकों ने एक संयुक्त संघर्ष समिति का गठन किया है। जिसमें विभिन्न प्राइवेट और सरकारी चिकित्सकों के संघ शामिल है। इस समिति ने  11 फरवरी को राज्य भर में सुबह 8 बजे से सम्पूर्ण मेडिकल बन्द का आह्वान किया है। इसके चलते प्रदेश के सभी निजी चिकित्सालय, क्लीनिक, कॉर्पोरेट चिकित्सालय, प्राइवेट मेडिकल कॉलेज चिकित्सालय 24 घण्टे के लिए बंद रहेंगे।

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सेवारत सरकारी डॉक्टर 2 घंटे में पेन डाउन रखेंगे, काली पट्टी बांधेंगे
आमजन के हितों के मद्देनजर सरकारी अखिल राजस्थान सेवारत चिकित्सक संघ से जुड़े सेवारत चिकित्सक 2 घण्टे का कार्य बहिष्कार करेंगे और काली पट्टी बांध कर काम करेंगे। प्रवर समिति की बैठक के दौरान राज्य भर से आए चिकित्सकों ने राइट टू हेल्थ बिल के खिलाफ प्रदर्शन भी प्रस्तावित है। इसके साथ ही इस बिल के खिलाफ आन्दोलन को फार्मासिस्ट एसोसिएशन ने भी समर्थन दिया है। 
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इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के मीडिया प्रभारी डॉ संजीव गुप्ता ने कहा- प्रस्तावित राइट टु हेल्थ बिल के खिलाफ चल रहे शांतिपूर्ण आन्दोलन के बावजूद सरकार की बिल पास करने की जल्दबाजी और हठधर्मिता से राज्य के पूरे चिकित्सक वर्ग गुस्सा में है।
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संयुक्त संघर्ष समिति की ये मुख्य आपत्तियां हैं
1. जब संविधान में पहले ही स्वास्थ्य का अधिकार दिया गया है, तो किसी भी नए बिल की आवश्यकता ही क्या है।
2. हेल्थ के मायने मात्र बीमारी का इलाज नहीं, बल्कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार स्वास्थ्य के मायने बहुत विस्तृत हैं, जिसमें सामाजिक ,आर्थिक,भौतिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से स्वस्थ होना है। तो सरकार पहले स्वच्छ हवा,पानी,बिना मिलावट के खाद्य पदार्थ,रोजगार उपलब्ध करवाए, वरना यह बिल केवल आम जन को गुमराह करने का एक तरीका भर है।
3. सभी निजी अस्पतालों को आपातकालीन अवस्था में आये मरीज़ का इलाज निशुल्क करना होगा। चाहे आपातकाल की सुविधा उस चिकित्सालय में हो या न हो ,यह  आपातकालीन(इमरजेंसी )की बिल में कोई व्याख्या /परिभाषा नहीं।
4. राज्य के सभी नागरिकों को सभी सरकारी- गैर सरकारी चिकित्सा संस्थानों में निशुल्क जांच और इलाज का अधिकार देना सिर्फ एक चुनावी शिगूफा है। पहले ही 50 से ज्यादा राष्ट्रीय कार्यक्रम और चिरंजीवी बीमा जैसी योजनाएं सही प्लानिंग के अभाव में आमजन को कोई लाभ नहीं दे रहीं, उस पर इस बिल के प्रावधान चिकित्सकीय काम को कानूनी शिकंजे में कसकर जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ की योजना भर है।
5. जिला और राज्य स्तरीय कमेटी में जन प्रतिनिधियों के हाथों प्रताड़ना की प्रबल सम्भावना है।नइससे इंस्पेक्टर राज ही बढ़ेगा और इलाज करने के बजाय चिकित्सक को अपनी सुरक्षा की फिक्र अधिक रहेगी।
6. जिला और राज्य स्तरीय कमेटी की ओर से किए गए निर्णय के खिलाफ देश की किसी भी अदालत में अपील का अधिकार नहीं, तो क्या चिकित्सकों को न्याय पाने का अधिकार भी नहीं है क्या? 
7. भविष्य में सभी चिकित्सा संस्थानों की सेवाओं की गुणवत्ता की ऑडिट का प्रावधान है। क्या ऐसे प्रावधान लगाकर किसी अन्य सेवा जैसे- शिक्षा, बिजली ,पानी पर भी इसी प्रकार की ऑडिट की जाती है ? हर चिकित्सक हर मरीज के लिए अपनी श्रेष्ठ सेवाएं देता है, लेकिन स्वास्थ्य के नाम पर जनता की भावनाओं को भड़काने वाले ऐसे प्रावधान चिकित्सकों को कतई स्वीकार नहीं है।
8. बिल में निजी चिकित्सा संस्थानों की सेवाओं का मूल्य निर्धारित किए जाने का प्रावधान, जो कि अकल्पनीय रूप से इतने कम आंके जाते हैं कि एक निजी चिकित्सा संस्थान को चलाना ही मुश्किल होगा।

9. सरकार राइट टू हेल्थ बिल के माध्यम से एक ओर निजी अस्पतालों का पूरी तरह सरकारीकरण करना चाहती है, तो दूसरी ओर सभी चिकित्सकों- चाहे सरकारी हों या निजी, उन्हें बेवजह कानूनी शिकंजे में फंसा कर उनके नैसर्गिक और संवैधानिक अधिकारों का हनन करने की तैयारी कर रही है।

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