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राजनीति में आज भी कायम है पुराने के परिवारों का दबदबा
अमर उजाला, दिल्ली
Updated Fri, 08 Nov 2013 05:20 PM IST
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राजस्थान की राजनीति में कई परिवारों का दबदबा पहली विधानसभा के गठन से लेकर आज तक कायम है।
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आज के दौर में जहां राजनेताओं के एक बार जीतने के बाद दुबारा जीत के लाले पड रहे है वहीं कई ऐसे नेता है जिनका प्रभाव आज तीसरी पीढी तक बरकरार है।
वर्ष 1992 में पहले विधानसभा चुनाव से अपने राजनीतिक जीवन की शुरूआत करने वाले नेताओं में मोहन लाल सुखाडिया, भैरोसिंह शेखावत, कुम्भाराम आर्य, नाथूराम मिर्धा, रामनिवास मिर्धा, परसराम मदेरणा, हरिदेव जोशी, कमला बेनीवाल, करणीसिंह बीकानेर, जगाथ पहाडिया, चन्दनमल बैद, शीशराम ओला, सुमित्रा सिंह, रामदेव सिंह महरिया, भीखाभाई जैसे नेताओं के नाम का दबदबा आज भी राजस्थान की राजनीति में बरकरार है।
1952 में विधायक बने श्री सुखाडिया 1954 में मात्र 38 की उम, में राजस्थान के मुख्यमंत्री बन गये तथा लगातार 17 वर्षों तक मुख्यमंत्री रहे। वह आन्ध, प्रदेश. कर्नाटक और तमिलनाडु के राज्यपाल एवं लोकसभा के सांसद भी रहे।
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उन्हें आधुनिक राजस्थान का निर्माता भी माना जाता है। उनकी पत्नी इन्दुबाला 1984 से 1989 तक उदयपुर से सांसद रही। श्री सुखाडिया की पुत्र वधु नीलिमा वर्तमान में उदयपुर शहर कांग्रेस की जिला अध्यक्ष हैं तथा विधानसभा का टिकट मांग रही है।
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राज्यसभा सदस्य एवं देश के उपराष्ट्रपति रह चुके श्री भैंरोसिंह शेखावत ने वर्ष 1952 में पहला विधानसभा चुनाव लडा था। उसके बाद वे राजनीति की उंचाईया चढते ही गये और अपने राजनैतिक उत्तराधिकारी के रूप में श्री शेखावत ने अपने दामाद नरपतसिंह राजवी को भाजपा की राजनीति में स्थापित किया।