फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Rajasthan ›   Rajasthan Political Story Officers Vs Mlas

Rajasthan Politics: राजस्थान में अफसर बनाम विधायक: क्यों बढ़ रहे हैं सत्ता और सिस्टम के टकराव?

Thu, 07 May 2026 12:26 PM IST
Sourabh Bhatt न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: Sourabh Bhatt Updated Thu, 07 May 2026 12:26 PM IST
सार

श्रीगंगानगर विधायक जयदीप बिहाणी पर अधिकारियों से मारपीट के आरोपों के बाद राजस्थान में नेताओं और अफसरों के टकराव की बहस तेज हो गई है। राजस्थान में पहले भी अफसरों और नेताओं के बीच इसी तरह के टकराव खुलकर सामने आ चुके हैं

विज्ञापन
Rajasthan Political Story Officers Vs Mlas
विधायक-अफसरों में टकराव - फोटो : AI

विस्तार

 

विज्ञापन

राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर जनप्रतिनिधियों और सरकारी अफसरों के बीच टकराव चर्चा का विषय बन गया है। श्रीगंगानगर से बीजेपी विधायक जयदीप बिहाणी पर आरयूआईडीपी और एलएंडटी कर्मचारियों के साथ मारपीट, धमकाने और सरकारी काम में बाधा डालने के आरोपों के बाद यह बहस तेज हो गई है कि आखिर सत्ता और प्रशासन के बीच यह टकराव क्यों बढ़ रहा है।
दरअसल, राजस्थान की राजनीति में यह पहला मामला नहीं है जब किसी विधायक या बड़े नेता पर सरकारी अफसरों से दुर्व्यवहार या मारपीट के आरोप लगे हों। पिछले दो दशकों में ऐसे कई हाईप्रोफाइल मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के नेताओं के नाम जुड़े रहे हैं। अब जयदीप बिहाणी प्रकरण ने उसी बहस को फिर से जिंदा कर दिया है।

विज्ञापन

विज्ञापन
विज्ञापन

जयदीप बिहाणी पर क्या हैं आरोप?
 बिहाणी पर आरयूआईडीपी और एलएंडटी के अधिकारियों-कर्मचारियों के साथ मारपीट, धमकाने और सरकारी काम में बाधा डालने के गंभीर आरोप लगे हैं। आरयूआईडीपी के एईएन जगनलाल बैरवा की शिकायत के अनुसार, विधायक ने उन्हें विधायक सेवा केंद्र में बुलाया।

वहां पहुंचने पर कथित तौर पर विधायक और उनके समर्थकों ने थप्पड़-मुक्कों, डंडों और पाइपों से हमला किया। आरोप है कि बिहाणी ने हाथ में पहने कड़े से उनकी आंख पर वार किया, जिससे गंभीर चोट आई और आंख प्रभावित हुई।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि विधायक समर्थकों ने अधिकारियों को बंधक बनाकर सरकारी दस्तावेज छीन लिए और 555 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट में हिस्सेदारी को लेकर दबाव बनाया। मामले में विधायक जयदीप बिहाणी, उनके निजी सहायक, एक पार्षद और अन्य लोगों के खिलाफ राजकार्य में बाधा, मारपीट और एससी-एसटी एक्ट सहित विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

कंवरलाल मीणा मामला: सदस्यता तक गई

राजस्थान में अफसरों से टकराव का सबसे बड़ा राजनीतिक उदाहरण बीजेपी विधायक कंवरलाल मीणा का रहा है। 2005 में उप सरपंच चुनाव के दौरान तत्कालीन एसडीएम रामनिवास मेहता पर पिस्टल तानने और सरकारी काम में बाधा डालने के आरोप में उन्हें तीन साल की सजा हुई थी।
इसी मामले में सजा बरकरार रहने के बाद 23 मई 2025 को उनकी विधानसभा सदस्यता रद्द कर दी गई। यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना गया क्योंकि इसमें जनप्रतिनिधि के खिलाफ कानूनी कार्रवाई सीधे राजनीतिक भविष्य पर भारी पड़ी। राजस्थान में अफसर से मारपीट के मामले में विधायकी जाने का यह पहला मामला था।

गिर्राज सिंह मलिंगा विवाद: कांग्रेस से बीजेपी तक

धौलपुर जिले की बाड़ी विधानसभा सीट से पूर्व कांग्रेस विधायक गिर्राज सिंह मलिंगा का मामला भी राजस्थान की राजनीति में लंबे समय तक चर्चा में रहा। मार्च 2022 में डिस्कॉम के एईएन और जेईएन के साथ कथित मारपीट और जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल के आरोप में उनके खिलाफ मामला दर्ज हुआ था।

मलिंगा पर अधिकारियों को ऑफिस में घुसकर पीटने, धमकाने और बाद में हत्या के प्रयास की धारा तक लगाने के आरोप लगे। विवाद बढ़ने के बाद उन्होंने सरेंडर किया और बाद में कांग्रेस छोड़ बीजेपी में शामिल हो गए। उस समय यह मामला प्रशासनिक अधिकारियों की सुरक्षा और राजनीतिक दबाव को लेकर बड़ा मुद्दा बना था।

भागचंद टांकड़ा मामला भी चर्चा में

बांदीकुई विधायक भागचंद सैनी टांकड़ा और उनके समर्थकों के खिलाफ भी वन विभाग के अधिकारियों ने अवैध बजरी ट्रैक्टर जब्त करने के दौरान मारपीट और सरकारी काम में बाधा डालने का मामला दर्ज कराया। कोर्ट के आदेश पर इसमें मामला दर्ज किया गया।


यह भी पढें- JJM Scam: 900 करोड़ घोटाले में पूर्व मंत्री महेश जोशी गिरफ्तार, ACB की बड़ी कार्रवाई

क्यों बढ़ रहे हैं ऐसे विवाद?

विधायक जनप्रतिनिधि होता है उस पर जनता का दबाव होता है। उसे अपनी जनता के सामने दिखाना पड़ता है कि वह अफसरों से काम करवा सकता है। लेकिन जब उसकी मनमर्जी के खिलाफ काम होता है तो जनता में मैसेज खराब जाता है। इससे अफसर और नेता के बीच टकराव बढ़ता है। वहीं अधिकारी की मजबूरी यह है कि कई बार नियमों में चीज नहीं होने पर वह काम नहीं करते।
दूसरी तरफ अंदरखाने कई तरह के विवाद हो सकते हैं। इसमें टेंडर विवाद का होना या अधिकारी जनप्रतिनिधि की इच्छा का नहीं लगा हुआ हो। मारपीट गालीगलौच होती रहती है लेकिन  इसमें कई बार एससी एसटी एंगल जुड़ जाता है। वहां मामला अलग दिशा में चला जाता है। 
मनीष गोधा- वरिष्ठ पत्रकार

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed