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राजस्थान: पंचायत चुनाव में मूलभूत सुविधाओं की रट्ट, मताधिकार का ग्रामीणों ने किया बहिष्कार, समझाता रहा प्रशासन

Mon, 13 Dec 2021 12:34 AM IST
Kuldeep Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोटा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोटा Published by: Kuldeep Singh Updated Mon, 13 Dec 2021 12:34 AM IST
सार

कोटा जिले के मंडावरा गांव में प्रथम चरण के पंचायत चुनाव के लिए मतदान हुआ। इस दौरान महज डेढ़ दर्जन लोगों ने मताधिकार का प्रयोग किया। बाकी बचे तीन हजार मतदाताओं ने मूलभूत सुविधाओं की वजह से वोट नहीं डाला।

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Rajasthan Panchayat elections: the basic facilities were quashed, the villagers boycotted the franchise, kept explaining the administration
मतदान केंद्र - सांकेतिक तस्वीर

विस्तार

राजस्थान के कोटा जिले में रविवार को प्रथम चरण के पंचायत चुनाव के लिए मतदान हुआ। जिले के दो गांवों में बड़ी संख्या में मतदाताओं ने मतदान का बहिष्कार किया। कोटा जिले के मंडावरा गांव में सिर्फ डेढ़ दर्जन लोगों ने मताधिकार का प्रयोग किया, बाकी बचे तीन हजार मतदाताओं ने वोट नहीं डाला।

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रनोदिया गांव में दो हजार मतदाताओं में से सिर्फ सवा सौ ने डाले वोट
जिले के रनोदिया गांव में दो हजार मतदाताओं में से प्रत्याशियों के परिवारों के करीब सवा सौ मतदाताओं ने मतदान किया। वही जिले के तीसरे गांव मदनपुरा में शाम 4 बजे बाद ग्रामीणों ने मतदान केंद्र पर पहुंचकर मताधिकार का प्रयोग किया। मदनपुरा गांव में छह सौ वोट हैं।
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रविवार को कोटा जिला परिषद के 10 वार्डों में और पंचायत समिति इटावा और सुल्तानपुर के 34 वार्डों में जिला परिषद सदस्य पंचायत समिति सदस्य चुनने के लिए मतदान सुबह 7:30 बजे शुरू हुआ था।
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सुल्तानपुर पंचायत समिति क्षेत्र के ग्राम पंचायत मंडावरा में दो किलोमीटर लंबा सड़क का हिस्सा लंबे समय से ग्रामीणों की मांग के बावजूद नहीं बन रहा। पूर्व सरपंच दिलदार अली ने बताया कि सड़क के अधूरे हिस्से को निर्मित करवाने के लिए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और पीपल्दा विधानसभा क्षेत्र के विधायक रामनारायण मीणा को कई बार अवगत कराया, लेकिन ग्रामीणों की मांग पूरी नहीं हुई।

बारिश के दिनों में अधूरी सड़क ग्रामीणों के लिए बड़ी मुसीबत बन जाती है। ऐसे में ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से फैसला लेते हुए पंचायत राज चुनाव का पूरी तरह से बहिष्कार किया। पंचायत चुनाव में जो प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं। उनके ही परिवारों के कुछ लोगों ने डेढ़ दर्जन वोट डाले हैं। बाकी पूरे गांव में मतदान का बहिष्कार किया। ऐसे में पूरे दिन मंडावरा मतदान केंद्र सुना पड़ा रहा।

दिनभर समझाने के बाद ग्रामीणों ने शाम चार बजे शुरू किया मतदान

पूर्व सरपंच ने कहा कि मतदाताओं का विश्वास लोकतंत्र में है। लेकिन उनकी नाराजगी क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों से हैं। जो ग्रामीणों को गुमराह कर रहे हैं और सुनवाई नहीं कर रहे हैं। ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाओं के लिए तरसना पड़ रहा है। सुबह के समय जब मतदान शुरू हुआ और वोट डालने कोई नहीं पहुंचा तो प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा रहा। जिला निर्वाचन विभाग की ओर से प्रशासनिक अधिकारी गांव में पहुंचे ग्रामीणों को समझाने की कोशिश की गई लेकिन ग्रामीण नहीं माने।

इधर इटावा पंचायत समिति की ग्राम पंचायत रनोदिया गांव के दो हजार मतदाताओं में से सिर्फ चुनाव लड़ रहे प्रत्याशियों के करीब सवा सौ लोगों ने मताधिकार का प्रयोग किया। बाकी ग्रामीणों ने मतदान नहीं किया। यहां के ग्रामीणों का कहना है कि रन्नोद या गांव में साल 1992 में रोड बना था उसके बाद से गांव में सड़क का निर्माण नहीं हुआ। सड़क की हालत जर्जर हो चुकी है। कई जगह पर गड्ढे हैं जिसमें बरसात का पानी भरा रहता है।

तीनों गांवों में सूने पड़े रहे मतदान केंद्र

ऐसे में ग्रामीणों को बड़ी मुश्किल से जीवनयापन करना पड़ रहा है। गांव में सड़क नहीं होने के कारण आने जाने में ग्रामीणों को काफी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। इसी के चलते ग्रामीणों ने अपने मतदान का प्रयोग नहीं किया। जिला निर्वाचन विभाग की ओर से भेजे गए प्रतिनिधियों के द्वारा ग्रामीण से को समझाने का प्रयास किया गया लेकिन गुस्साए ग्रामीणों ने वोट न किया। ग्रामीणों ने कहा, सड़क नहीं तो वोट नहीं। सड़क के साथ ही ग्रामीणों की गांव में नाली निर्माण की भी बड़ी मांग थी। इधर इटावा पंचायत समिति की ग्राम पंचायत खातोली के वार्ड मदनपुरा गांव में भी क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों के खिलाफ भयंकर आक्रोश देखने को मिला।

यहां के ग्रामीणों ने कहा गांव पूरी तरह से विकास से कटा हुआ है। सड़क, नाली नहीं है। इंदिरा आवास योजना का ग्रामीणों को कोई लाभ नहीं मिला। अतिवृष्टि के दौरान जिन परिवारों के आशियाने उजड़े, उन्हें अब तक मुआवजा नहीं मिला है। ऐसे में ग्रामीणों ने दोपहर बाद तक मतदान का बहिष्कार किया। उसके बाद जिला निर्वाचन विभाग की ओर से कई अधिकारी कर्मचारी और पंचायत चुनाव लड़ रहे प्रत्याशी गांव में पहुंचे। समझाने का प्रयास किया गया।

प्रत्याशियों ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि उनकी जीत होने के बाद वह ग्रामीणों की हर समस्या को पूरा समाधान कराने का प्रयास करेंगे। दिनभर समझाने के प्रयास के बाद देर शाम 4 बजे ग्रामीण मतदाता मतदान करने को राजी हुए। उसके बाद उन्होंने अपने मताधिकार का प्रयोग किया।

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