क्या होता है हाइब्रिड सिस्टम?: जिसके तहत कांग्रेस ने सभापति के लिए उतारा हारा हुआ प्रत्याशी, जानें दांव-पेच
जैसलमेर नगरपरिषद सभापति पद के लिए कांग्रेस ने निर्मल रैयानी को उम्मीदवार बनाया है। रैयानी नगरपरिषद चुनाव में अपने वार्ड से हार गए थे। हाइब्रिड सिस्टम के तहत उन्होंने सभापति पद के लिए नामांकन दाखिल किया है।
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नगरपरिषद सभापति पद को लेकर चल रहा सियासी सस्पेंस अब कांग्रेस की ओर से उम्मीदवार का नाम सामने आने के बाद खत्म हो गया है। कांग्रेस ने सभापति पद के लिए निर्मल रैयानी को अपना उम्मीदवार बनाया है। खास बात यह है कि रैयानी नगरपरिषद चुनाव में अपने वार्ड से बतौर प्रत्याशी चुनाव हार चुके हैं। इसके बावजूद हाइब्रिड सिस्टम के तहत उन्हें सभापति पद के चुनाव में उतारा गया है। निर्मल रैयानी ने सभापति पद के लिए अपना नामांकन दाखिल कर दिया है। इसके साथ ही कांग्रेस ने सभापति चुनाव को लेकर अपना चेहरा स्पष्ट कर दिया है। अब रैयानी कांग्रेस के उम्मीदवार के तौर पर चुनाव मैदान में होंगे।
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हाईब्रीड सिस्टम के तहत चुनाव हार चुके प्रत्याशी को सभापति पद के लिए उम्मीदवार बनाए जाने के बाद जैसलमेर की स्थानीय राजनीति में चर्चा तेज हो गई है। नगरपरिषद चुनाव में अपने वार्ड से जीत हासिल नहीं कर पाने वाले रैयानी अब सभापति पद के लिए चुनाव लड़ेंगे। रैयानी के नामांकन के बाद अब सभापति पद के चुनाव को लेकर राजनीतिक समीकरण पर सभी की निगाहें हैं। कांग्रेस के इस फैसले के बाद पार्षदों के बीच बनने वाले समीकरण भी महत्वपूर्ण होंगे।
वहीं, भाजपा की ओर से सभापति पद के अधिकृत उम्मीदवार के नाम और सिंबल का इंतजार है। भाजपा का उम्मीदवार सामने आने के बाद दोनों प्रमुख दलों की ओर से सभापति पद के लिए तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगी। फिलहाल जैसलमेर नगरपरिषद की राजनीति में कांग्रेस के इस फैसले की चर्चा है कि वार्ड का चुनाव हारने के बावजूद निर्मल रैयानी को हाइब्रिड सिस्टम के जरिए सभापति पद के चुनाव में उतारा गया है। नामांकन दाखिल होने के साथ ही सभापति पद का मुकाबला औपचारिक रूप से शुरू हो गया है।
क्या होता है हाइब्रिड सिस्टम?
ऐसी चुनावी व्यवस्था है, जिसमें दो अलग-अलग चुनाव प्रणालियों फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट (एफपीटीपी) और आनुपातिक प्रतिनिधित्व (प्रोपोर्शनल रिप्रेजेंटेशन) को मिलाकर इस्तेमाल किया जाता है। इस व्यवस्था में किसी प्रत्याशी के सीधे चुनाव हारने के बावजूद उसे पार्टी की सूची या आनुपातिक प्रतिनिधित्व के माध्यम से सदन में पहुंचने का अवसर मिल सकता है। यह व्यवस्था संसद, विधानसभा या स्थानीय निकायों के चुनाव में अलग-अलग रूपों में लागू की जा सकती है।