{"_id":"6459bde8022e5228750135bb","slug":"rajasthan-news-largest-reserve-of-lithium-found-in-nagaur-2023-05-09","type":"story","status":"publish","title_hn":"Rajasthan: नागौर में मिला लिथियम का सबसे बड़ा भंडार, देश की 80 फीसदी जरूरत होगी पूरी, बनेंगी बैटरियां","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Rajasthan: नागौर में मिला लिथियम का सबसे बड़ा भंडार, देश की 80 फीसदी जरूरत होगी पूरी, बनेंगी बैटरियां
Tue, 09 May 2023 09:19 AM IST
अरविंद कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नागौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नागौर
Published by: अरविंद कुमार
Updated Tue, 09 May 2023 09:19 AM IST
सार
राजस्थान के नागौर जिले में लिथियम का महाभंडार मिला है। भारत के हाथ यह एक बड़ी सफलता लगी है। भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण संस्थान का दावा है कि नागौर के डेगाना में खोजे गए लिथियम का भंडार जम्मू-कश्मीर में मिले भंडार से भी बड़ा है। रिचार्जेबल बैटरी बनाने में सबसे ज्यादा लिथियम काम में लिया जाता है।
विज्ञापन
नागौर में मिला लिथियम का सबसे बड़ा भंडार
- फोटो : सोशल मीडिया
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
राजस्थान में मारवाड़ के बाड़मेर में मिले तेल और गैस के विशाल भंडारों के बाद अब राजस्थान के नागौर ने भारत की कीर्ति दुनियाभर में बढ़ाई है। नागौर के डेगाना में लिथियम का महाभंडार खोजा गया है। भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण संस्थान ने दावा किया है कि लिथियम का यह नया भंडार जम्मू-कश्मीर में मिले भंडार से भी बड़ा है। इससे देश में लिथियम की कुल मांग का 80 फ़ीसदी तक पूरा किया जा सकता है।
विज्ञापन
राजस्थान में लिथियम के नए भंडार खोजे जाने से देश की इलेक्ट्रॉनिक व्हीकल (EV), मोबाइल फोन और इलेक्ट्रिक उपकरण इंडस्ट्री में खुशी का माहौल है। क्योंकि देश में लिथियम के प्रोडक्शन से इलेक्ट्रिक बस, कार, स्कूटर, बाइक, मोपेड और ई-रिक्शा की बैटरी के लिए जरूरी लिथियम स्थानीय स्तर पर ही उपलब्ध हो जाएगा। इसके अलावा मोबाइल, ई-पैड, ई-पॉड, इनवर्टर, टॉर्च, रेडियो, बैटरी बल्ब, इलेक्ट्रिक लालटेन, मेडिकल डिवाइसेस और लिथियम आयन बैटरी से चलने वाले उपकरणों में भी इसका इस्तेमाल होगा, जिससे इनकी कीमतों में काफी गिरावट आने की संभावना बन गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन
देश की 80 फीसदी लिथियम डिमांड पूरी कर सकता है नागौर...
डेगाना और उसके आसपास के इलाके में रेनवाट की पहाड़ी में लिथियम भंडार पाए गए हैं। यहां से कभी टंगस्टन खनिज की सप्लाई देश में की जाती थी। ब्रिटिश शासन काल के दौरान अंग्रेजों ने 1914 में रेनवाट की पहाड़ी पर टंगस्टन की खोज की थी। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश सेना की युद्ध सामग्री बनाने में टंगस्टन का इस्तेमाल किया गया था। राजस्थान से पहले भी देश में लिथियम जम्मू कश्मीर, छत्तीसगढ़ और कर्नाटक में खोजा जा चुका है। छत्तीसगढ़ में इसकी माइनिंग की तैयारी भी की जा रही है। लेकिन राजस्थान में मिला भंडार सबसे बड़ा बताया जा रहा है और यह देश की 80 फीसदी तक डिमांड पूरी कर सकता है।
चाइना पर निर्भरता होगी कम...
दुनिया भर में लिथियम के प्रोडक्शन का करीब 74 फ़ीसदी इस्तेमाल बैटरी में ही होता है। इसके अलावा सेरेमिक, कांच, लुब्रिकेटिंग ग्रीस और पॉलीमर प्रोडक्शन में भी लिथियम काम में लिया जाता है। फिलहाल, इस खनिज के लिए भारत पूरी तरह से महंगी रेट पर विदेशी आपूर्ति पर निर्भर है। चाइना से इंपोर्ट करके लिथियम मंगवाया जाता है। इसे बैटरी इंडस्ट्री में काम में लिया जाता है। लेकिन देश में ही इस मिनरल के भंडार मिलने और प्रोडक्शन होने से डोमेस्टिक लेवल पर ही लिथियम उपलब्ध हो जाएगा।
सस्ते होंगे इलेक्ट्रिक व्हीकल...
भारत सरकार साल 2030 तक EV को 300 तक बढ़ाने की स्कीम पर काम कर रही है। इस स्कीम में लिथियम पर बहुत ज्यादा निर्भरता रहने वाली है। क्योंकि सारे इलेक्ट्रिक व्हीकल बैटरी से ही संचालित होते हैं। यह रिचार्जेबल बैटरी लिथियम से ही बनाई जाती है। देश में लिथियम के भंडारों से जब माइनिंग शुरू हो जाएगी, तो प्रचुर मात्रा में सस्ता लिथियम भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल इंडस्ट्री को बढ़ावा देगा। क्योंकि बैटरी कॉस्ट बहुत सस्ती हो जाएगी। इलेक्ट्रिक व्हीकल में बॉडी और मोटर के बाद बैटरी की कीमत ही सबसे ज्यादा होती है।
लिथियम खोज में भारत दुनिया में तीसरे नंबर पर आया, चीन को पछाड़ा...
भारत में लिथियम के भंडार अब तक 59 लाख टन तक खोजे जा चुके हैं। यूएसजीएस की रिपोर्ट कहती है कि भारत लिथियम खोज में चीन से काफी ऊपर आ चुका है। बोलिविया में दुनिया में सर्वाधिक 210 लाख टन लिथियम भंडार खोजे जा चुके हैं। चिली में 92 लाख टन, भारत में 59 लाख टन, ऑस्ट्रेलिया में 57 लाख टन, अर्जेंटीना में 22 लाख टन, चीन में 15 लाख टन और अमेरिका में 9 लाख टन लिथियम के भंडार खोजे गए हैं।
लिथियम का उपयोग कहां किया जाता है?
वोक्सवैगन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, लिथियम का ग्लोबल मार्केट काफी तेजी से बढ़ रहा है। साल 2008 और 2018 के बीच टॉप उत्पादक देशों में सालाना उत्पादन 25,400 से बढ़कर 85,000 टन हो गया है। लिथियम का सबसे ज्यादा इस्तेमाल इलेक्ट्रिक गाड़ियों की बैटरी में होता है। हालांकि, लिथियम का उपयोग लैपटॉप और सेल फोन की बैटरी के साथ-साथ ग्लास और सिरेमिक उद्योगों में भी किया जाता है।
भारत के अलावा लिथियम और कहां पाया जाता है?
SPglobal की रिपोर्ट के मुताबिक, तीन जून 2022 तक के आंकड़ों के अनुसार, बोलीविया में सबसे ज्यादा लिथियम डिपॉजिट था। इसके बाद चिली, ऑस्ट्रेलिया, चीन और अर्जेंटीना में भी डिपॉजिट मिला है। भारत की पहली बड़ी लिथियम डिपॉजिट की खोज दो साल पहले कर्नाटक में की गई थी, यहां 1600 टन का भंडार मिला था। क्वार्ट्ज की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के पास अब दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा लिथियम भंडार है।
भारत के लिए क्यों है अच्छी खबर?
दावा किया जाता है कि राजस्थान में मिला लिथियम भारत की कुल मांग का 80 फीसदी पूरा कर सकता है। लीथियम के लिए अभी तक भारत चीन पर निर्भर है। अब माना जा रहा है कि चीन का एकाधिकार खत्म हो जाएगा और खाड़ी देशों की तरह राजस्थान की भी किस्मत चमकेगी। राजस्थान में लिथियम के भंडार डेगाना और उसके आसपास के इलाके की उसी रेनवेट पहाड़ी में पाए गए हैं, जहां से कभी टंगस्टन खनिज की आपूर्ति की जाती थी। ब्रिटिश शासन के दौरान, अंग्रेजों ने 1914 में डेगाना में रेनवाट की पहाड़ी पर टंगस्टन खनिज की खोज की थी। स्वतंत्रता से पहले देश में उत्पादित टंगस्टन का उपयोग प्रथम विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश सेना के लिए युद्ध सामग्री बनाने में किया जाता था।