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भरतपुर क्रिकेट एसोसिएशन विवाद: हाईकोर्ट ने सचिव पर लगाई पाबंदी, जांच पूरी होने तक नहीं ले सकेंगे अहम फैसले

Tue, 22 Sep 2026 12:59 PM IST
Sourabh Bhatt न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: Sourabh Bhatt Updated Tue, 22 Sep 2026 12:59 PM IST
सार

राजस्थान हाईकोर्ट ने भरतपुर जिला क्रिकेट एसोसिएशन के सचिव शत्रुघ्न तिवारी पर जांच पूरी होने तक अहम फैसले लेने, रिकॉर्ड से छेड़छाड़ और शिकायतकर्ता-गवाहों को प्रभावित करने पर रोक लगाई।

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Rajasthan HC Restricts Bharatpur Cricket Association Secretary Amid Sexual Misconduct Probe
राजस्थान हाईकोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

भरतपुर जिला क्रिकेट एसोसिएशन से जुड़े महिला और नाबालिग क्रिकेटरों के यौन दुर्व्यवहार के आरोपों के मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने अंतरिम आदेश जारी किया है। कोर्ट ने एसोसिएशन के सचिव शत्रुघ्न तिवारी को जांच पूरी होने तक कोई अहम फैसला लेने से रोक दिया है। साथ ही रिकॉर्ड से छेड़छाड़ और शिकायतकर्ता या गवाहों को प्रभावित करने पर भी पाबंदी लगाई है।

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यह मामला भरतपुर जिला क्रिकेट एसोसिएशन और उसके पदाधिकारियों का सस्पेंशन हटाए जाने से जुड़ा है। एसोसिएशन को 18 जून 2026 को अस्थायी रूप से निलंबित किया गया था। बाद में राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन के एडमिनिस्ट्रेटर ने 1 अगस्त को आदेश जारी कर सस्पेंशन हटा दिया। भरतपुर की महिला क्रिकेटर शिखा शर्मा ने इसी आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी है।

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सस्पेंशन हटाने के आदेश को दी चुनौती

याचिका के मुताबिक, महिला और नाबालिग क्रिकेटरों की ओर से शत्रुघ्न तिवारी के खिलाफ यौन दुर्व्यवहार की शिकायतें की गई थीं। इन शिकायतों की जांच चल रही थी, इसी दौरान एसोसिएशन और उसके पदाधिकारियों का सस्पेंशन हटा दिया गया।

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याचिकाकर्ता का कहना है कि जांच पूरी होने से पहले सस्पेंशन हटाने का फैसला उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना लिया गया। इसी आधार पर उन्होंने हाईकोर्ट से हस्तक्षेप की मांग की है।


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FIR का भी याचिका में जिक्र

याचिका में मामले से जुड़ी FIR नंबर 0295/2026 का भी हवाला दिया गया है। इसमें भारतीय न्याय संहिता की धारा 75(2) के तहत मामला दर्ज होने की बात कही गई है। याचिकाकर्ता का यह भी कहना है कि सस्पेंशन हटाने के आदेश के खिलाफ राजस्थान स्पोर्ट्स एक्ट के तहत अपील का कोई प्रभावी वैकल्पिक रास्ता उपलब्ध नहीं है। इसलिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई। जस्टिस मनीष शर्मा ने याचिका पर सुनवाई करते हुए संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने छह सप्ताह में जवाब दाखिल करने को कहा है।

अंतरिम आदेश के तहत जांच पूरी होने तक शत्रुघ्न तिवारी एसोसिएशन से जुड़े कोई अहम फैसले नहीं ले सकेंगे। उन्हें मूल रिकॉर्ड सुरक्षित रखने, उसमें किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं करने और जांच में सहयोग करने के निर्देश दिए गए हैं। शिकायतकर्ता या गवाहों को प्रभावित करने से भी उन्हें रोका गया है।

आरोपों पर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं

हाईकोर्ट ने फिलहाल यौन दुर्व्यवहार के आरोपों की सत्यता पर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है। अदालत के सामने फिलहाल सस्पेंशन हटाने के आदेश और जांच के दौरान उठे प्रक्रियागत सवाल हैं। मामले में संबंधित पक्षों के जवाब मिलने के बाद आगे की सुनवाई होगी।

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