Rajasthan Poll 2023: कांग्रेस, भाजपा और बागी, दोनों पार्टियों के कई क्षत्रप चुनाव मैदान में, मुश्किल में कौन?
Rajasthan Election 2023: राजस्थान विधानसभा चुनाव में करीब 38 सीटों पर भजपा और कांग्रेस बागियों की चुनौती झेल रहीं हैं। भाजपा की राह मुश्किल दिख रही है। क्योंकि, यहां ना सिर्फ बागियों की संख्या ज्यादा है, बल्कि कई चेहरे क्षत्रप का दर्जा रखते हैं। कांग्रेस के बारे में भी जानिए।
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विस्तार
नामांकन वापसी के बाद राजस्थान की 200 विधानसभा सीटों में से करीब 80 पर त्रिकोणीय से लेकर पंचकोणीय मुकाबला होता दिख रहा है। प्रदेश के दो बड़े दलों की बात करें तो भाजपा 22 सीटों और कांग्रेस 16 सीटों पर बागियों की चुनौती का सामना करती दिख रही है। दरअसल, भाजपा प्रत्याशियों की पहली सूची जारी होने के बाद से ही बागी पार्टी के लिए चुनौती बने हुए थे। हालांकि, पार्टी कई प्रमुख बागियों मनाने सफल रही, लेकिन कई सीटों पर पेंच फंसा ही रह गया।
भाजपा के ये बागी आखिरकार मान गए
झोटावाडा से पूर्व मंत्री राजपाल सिंह, सुमेरपुर से पूर्व विधायक मदन राठौड, सिविल लाइंस से रणजीत सिंह सोडाला, सादुलशहर से केके विश्नोई, कामां से मदनमोहन सिंहल और भरतपुर से गिरधारी तिवाडी ने अपना नामांकन वापस ले लिया है।
ये बडे चेहरे मैदान में
भाजपा 22 सीटों पर बागियों का सामना कर रही है। लेकिन, हम यहां कुछ बड़े चेहरों की ही बात करेंगे। आइए, जानते हैं कौन किस सीट से चुनाव मैदान में है...।
- डीडवाना: युनूस खान भाजपा सरकार में दमदार मंत्री रह चुके हैं और पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के करीबी माने जाते हैं। इस सीट पर भाजपा ने जितेंद्र सिंह जोधा को उतारा है जो पिछली बार भी प्रत्याशी थे, लेकिन चुनाव हार गए थे।
- चित्तौडगढ़: चंद्रभान सिंह आक्या ने बगावत का सबसे पहला और दमदार बिगुल फूंका था। आक्या मौजूदा विधायक हैं। भाजपा की ओर से इन्हें मनानें की सारी कोशिशें फेल रहीं। उन्होंने अपना नाम वापस नहीं लिया। भाजपा ने यहां से पूर्व मंत्री और मौजूदा विधायक नरपत सिंह राजवी को मैदान में उतारा है। हालांकि, राजवी का टिकट भी गया था। लेकिन, बाद में उन्हें इस सीट से प्रत्याशी बनाया गया।
- शाहपुरा: करीब 90 साल के कैलाश मेघवाल भाजपा के दिग्गज नेता रहे हैं। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष भी हैं। केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल के खिलाफ बयान देने पर पार्टी ने इन्हें निलंबित कर दिया था। अब ये भाजपा प्रत्याशी लालाराम बैरवा के लिए बड़ी चुनौती माने जा रहे हैं।
- बाड़मेर: प्रियंका चौधरी एक मजबूत चेहरा मानी जा रही हैं। यहां से भाजपा ने दीपक कडवासरा को मैदान में उतारा है।
- शिव: रविन्द्र सिंह भाटी को पश्चिमी राजस्थान का उभरता हुआ युवा चेहरा माना जाता है है। कुछ दिन पहले ही भाजपा के बड़े नेता सम्मान के साथ इन्हें पार्टी में लाए थे। शिव सीट से भाटी का टिकट भी पक्का माना जा रहा था, लेकिन अंत में स्वरूप सिंह खारा को टिकट दे दिया गया। अब भार्टी निर्दलीय चुनाव मैदान में हैं।
- लाडपुरा: भवानी सिंह राजावत विधायक रह चुके हैं और पूर्व सीएम वसुंधरा राजे के करीबियों में से एक हैं। पिछली बार भी राजावत का टिकट कटा था। इस बार उन्होंने टिकट फाइनल होने से पहले ही नामांकन भर दिया था, लेकिन पार्टी ने मौजूदा विधायक कल्पना राजे को रिपीट कर दिया।
- झुंझुनूं: राजेन्द्र भांभू इस सीट पर पिछली बार भी प्रत्याशी थे और इस बार पूरी दमदारी से लगे हुए थे। पार्टी ने बबलू चैधरी को टिकट दिया तो बागी हो गए।
- सवाई माधोपुर: आशा मीणा पिछली बार चुनाव लड़ना चाह रही थी, लेकिन एक बडे नेता के आश्वासन के बाद रूक गईं। इस बार पूरे दमखम के साथ चुनाव मैदान में उतरी हैं और पार्टी के प्रत्याशी सांसद किरोड़ी लाल मीणा के लिए सामने चुनाव मैदान में हैं।
- सांचैर: जीवाराम चैधरी ने टिकट नहीं मिलने पर बगावती रुख अपनाया है। पार्टी ने सांसद देवजी पटेल को चुनावी मैदान में उतारा है। 2018 में इस सीट से दानाराम चैधरी मैदान में थे। वे भी टिकट मांग रहे थे। लेकिन अब दोनों मिलकर पटेल के लिए चुनौती बनते दिख रहे हैं।
- कोटपूतली: मुकेश गोयल पिछली बार इसी सीट से प्रत्याशी थे, लेकिन हार गए। संगठन में अच्छी पकड रखते हैं, इसके बाद भी टिकट नहीं मिल पाया। पार्टी ने हंसराज पटेल को उम्मीदवार बनाया है। अब ये सीट फंसी हुई दिख रही है।
- खंडेला: बंशीधर बाजिया पहले विधायक रह चुके हैं। इस बार भी टिकट मांग रहे थे, लेकिन पार्टी ने कांग्रेस के बागी सुभाष मील को टिकट दे दिया। अब सीट पर रोचक मुकाबला होता दिख रहा है।
- झोटावाड़ा: भाजपा इस सीट पर पूर्व मंत्री राजपाल सिंह को मनाने में सफल रही, लेकिन पार्टी के एक और बागी आशा सिंह सुरपुरा मैदान में डटे हुए हैं और प्रत्याशी सांसद राज्यवर्धन सिंह राठौड़ के लिए चुनौती बने हुए हैं।
- रामगढ़: अलवर जिले ही इस सीट से सुखवंत सिंह पिछली बार भी प्रत्याशी थे, लेकिन कांग्रेस की साफिया जुबेर से चुनाव हार गए थे। इस बार पार्टी ने जय आहूजा को टिकट दिया तो सुखवंत बागी होकर मैदान में उतर आए हैं।
कांग्रेस के लिए बागियों की चुनौती कम
भाजपा के मुकाबले इस बार कांग्रेस के लिए बागियों की चुनौती शुरूआत से ही कम दिख रही थी। इसका कारण यह भी था कि पार्टी ने कई चरणों में प्रत्याशी घोषित किए और अंत तक क्रम चलता रहा।
ये बागी मांग गए
अजमेर दक्षिण से हेमंत भाटी, मसूदा से पूर्व संसदीय सचिव ब्रहम्देव कुमावत, बडी सादडी से पूर्व विधायक प्रकाश चैधरी, चैरासी से महेन्द बरजोड, छबडा से नरेश मीणा।
ये सीटें रह गईं फंसी
कंग्रेस के लिए वैसे तो 16 सीटों पर बागियों की चुनौती दिख रही है, लेकिन प्रमुख बागियों ये नेता ही मैदान में दिख रहे हैं...।
- बसेड़ी: खिलाडी लाल बैरवा मौजूदा विधायक और अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। मुखर बयानबाजी का शिकार हुए और टिकट कट गया। अब बसेड़ी से पार्टी के प्रत्याशी संजय जाटव के लिए मुसीबत बन सकते हैं।
- राजगढ लक्ष्मणगढ़: जौहरी लाल मीणा मौजूदा विधायक हैं। बेटे पर दुष्कर्म के कथित आरोप लगे हैं। टिकट कट गया तो बागी बनकर चुनाव मैदान में उतर गए। यहां से कांग्रेस ने मांगे लाल मीणा को टिकट दिया है।
- सिवाना: सुनील परिहार को सीएम अशोक गहलोत के करीबियों में गिना जाता है। पार्टी ने चुनाव में एक अहम जिम्मेदारी दे दी, लेकिन टिकट नहीं दिया। इससे नाराज होकर चुनाव मैदान में उतर आए। अब पार्टी प्रत्याशी मानवेन्द्र सिंह के लिए परेशानी का कारण बनते दिख रहे हैं।
- शाहपुरा: जयपुर जिले की इस सीट से आलोक बेनीवाल निर्दलीय चुनाव मैदान में हैं। पूर्व उपमुख्यमंत्री कमला बेनीवाल के बेटे हैं। पिछली बार टिकट कटा तो निर्दलीय विधायक बन गए। इस बार कई निर्दलीयों को पार्टी का टिकट मिला, लेकिन इन्हें छोड़ दिया गया। अब पार्टी प्रत्याशी मनीष यादव के लिए चुनौती बन रहे हैं। खास बात यह है कि मनीष यादव पिछली बार भी यहां से कांग्रेस के प्रत्याशी थे।
- लूणकरणसर: वीरेंद्र बेनीवाल अशोक गहलोत की पिछली सरकार में पहले सरकारी मुख्य सचेतक और फिर गृह राज्य मंत्री थे। पिछली बार टिकट मिला, लेकिन हार गए थे। इस बार नहीं दिया तो बागी हो गए। अब पार्टी प्रत्याशी राजेंद्र मूंड के लिए चुनौती बनेंगे।
- नागौर: हबीबुर्रहमान इस सीट पर कई बार कांग्रेस का चेहरा रहे हैं। भाजपा से भी ये चुनाव जीत चुके हैं। इस बार फिर कांग्रेस में है, लेकिन टिकट नहीं मिला। अब पार्टी प्रत्याशी हरेन्द्र मिर्धा के लिए चुनौती बन रहे हैं।
- पुष्कर: गोपाल बाहेती इसी सीट से विधायक रह चुके हैं और सीएम गहलोत के नजदीकियों में गिने जाते हैं। इस बार पार्टी ने यहां नसीम अख्तर इंसाफ को टिकट दिया है जो पायलट की करीबी हैं। बाहेती इंसाफ के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकते हैं।