'प्रेम त्रिकोण' में पिसा छह साल का बेटा, सास-बहू के इंतकाम की आग में दो परिवार खाक
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राजस्थान के भरतपुर में जयपुर-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित पॉश कॉलोनी सूर्या सिटी में गुरुवार शाम चार बजे हैरान करने वाली वारदात घटी। डॉक्टर दंपती के प्रेम त्रिकोण में एक छह साल के मासूम की जान चली गई और दो परिवार उजड़ गए। खास बात यह है कि वारदात को बहू ने अपनी सास के साथ मिलकर अंजाम दिया।
यह है मामला
पुलिस के मुताबिक, गुरुवार को पॉश कॉलोनी सूर्या सिटी में डॉ. सीमा गुप्ता ने अपनी सास सुलेखा के साथ मिलकर दिल दहला देने वाली इस घटना को अंजाम दिया। सीमा ने अपने पति डॉ. सुदीप की कथित प्रेमिका दीपा गुर्जर को सबक सिखाने के लिए स्प्रिट से उसके घर में आग लगा दी।
इसके बाद दरवाजे की कुंडी बाहर से बंद कर दी। इस दौरान दीपा का छह साल का बेटा शौर्य भी उसके साथ था। आग से उठे धुएं में दम घुटने से दोनों की मौत हो गई। वहीं मामले में पुलिस ने डॉ. सीमा, उसकी सास और डॉ. सुदीप तीनों को गिरफ्तार कर लिया है।
ऐसे बना प्रेम त्रिकोण
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, डॉक्टर दंपति में से डॉ. सीमा गुप्ता श्रीराम अस्पताल चलाती हैं। जबकि डॉ. सुदीप गुप्ता राजकीय आरबीएम अस्पताल में फिजीशियन हैं। करीब दो साल पहले श्रीराम अस्पताल में दीपा नाम की युवती एक रिसेप्शनिस्ट के तौर पर काम करती थी। इसी दौरान डॉक्टर सुदीप और रिसेप्शनिस्ट दीपा के बीच मेलजोल काफी बढ़ गया।
पुलिस ने बताया कि इस बात की जानकारी सुदीप की पत्नी डॉ. सीमा गुप्ता को लग गई। तब डॉ. सीमा ने रिसेप्शनिस्ट दीपा को नौकरी से निकाल दिया। हालांकि इसके बाद भी डॉ. सुदीप और दीपा का मिलना-जुलना जारी रहा। इससे नाराज डॉक्टर सीमा गुप्ता ने अपनी सास के साथ मिलकर इस खौफनाक वारदात को अंदाम दिया।
ऐसे घटी हैरान करने वाली घटना
इसी दौरान डॉ. सीमा ने स्प्रिट की बोतल को फर्नीचर पर उड़ेल दिया, जिससे आग लग गई। इसके बाद डॉ. सीमा अपनी सास सुलेखा के साथ घर से बाहर आ गए और बाहर से कुंडी लगा दी। पुलिस को प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि इसके बाद दोनों महिलाओं ने फोन कर डॉ. सुदीप को मौके पर बुला लिया।
इधर-उधर भागते रहे मां-बेटा, रसोई में मृत मिले
प्रत्यक्षदर्शियों ने पुलिस को बताया कि आग से बचने के लिए दीपा और उसका बेटा चीखते-चिल्लाते हुए घर में इधर-उधर भागते रहे। उनकी चीख-पुकार सुनकर डॉ. सीमा का दिल भी पसीज गया और वो दोनों को बचाने की गुहार लगाने लगी। लेकिन काेई भी घर में घुसने की हिम्मत नहीं जुटा पाया।
आग बुझने के बाद मां-बेटा उस कमरे में नहीं मिले जिसमें आग लगाई गई थी, बल्कि रसोई में पड़े मिले। घटना की सूचना मिलने के बाद माैके पर पहुंची दमकल की गाड़ियों को आग पर काबू पाने में करीब आधा घंटे का समय लगा। एसपी हैदर अली जैदी, सीओ सिटी हवा सिंह रायपुरिया भी मौके पर पहुंचे।
फोन पर दीपा बोली- भाई मुझे बचा लो
घर में आग लगने के बाद 25 वर्षीय दीपा मदद के लिए चीखती रही। हालांकि उसने इसके साथ ही अपने भाई अनुज (21) से भी फोन पर कहा कि मुझे बचा लो। इसके बाद अनुज तुरंत नीमदा गेट इलाके से दीपा के घर की तरफ निकल पड़ा।
जब वह मौके पर पहुंचा तब तक आग काफी भयावह रूप ले चुकी थी। फिर भी वह आग में कूद गया, जिसके कारण वह भी झुलस गया। पुलिस ने उसे अस्पताल में भर्ती कराया, जहां से उसे जयपुर रेफर कर दिया गया है।
डॉ. सीमा घर से ले गई थी स्प्रिट
काली बगीची में श्रीराम अस्पताल चलाने वाली डॉ. सीमा का परिवार अस्पताल में ही तीसरी मंजिल पर रहता है। पति डॉ. सुदीप के दीपा से अवैध संबंधों को लेकर वह काफी नाराज थी। यही वजह थी कि वह दीपा को सबक सिखाने के लिए घर से ही बोतल में स्प्रिट लेकर पहुंची थी।
डॉ. सुदीप ने खरीदकर दी थी कोठी, हाल में खोला था स्पा सेंटर
दीपा का अपने पति से विवाद था और वह अलग रहती थी। जबकि करीब दो साल पहले डॉ. सीमा के श्रीराम अस्पताल में दीपा रिसेप्शन पर काम करती थी। तभी सुदीप से संपर्क हुआ था। इस प्रेम-प्रसंग का सीमा को पता चला तो दीपा को नौकरी से निकाल दिया था, लेकिन सुदीप और दीपा का मिलना जारी रहा। इससे सीमा नाराज रहती थी।
पुलिस ने बताया कि सुदीप ने करीब चार साल पहले सूर्या सिटी कॉलोनी में एक विला खरीदकर दीपा को दी थी। दीपा अपने बेटे के साथ यहीं रहती थी। अभी एक नवंबर को ही दीपा ने यहां आयशा सैलून एंड स्पा सेंटर खोला था और निमंत्रण-पत्र में सुदीप का नाम लिखा। सीमा को इसका पता चला तो वह आवेश में आकर अपनी सास के साथ दीपा से लड़ने पहुंच गई।
डॉक्टर सीमा बोली- मैं तो उसे बस ट्रेलर दिखाना चाहती थी
मामले में हत्यारोपी डॉ. सीमा गुप्ता का कहना है कि दीपा गुर्जर मेरे अस्पताल में ही काम करती थी। उसके मेरे पति से प्रेम संबंध थे। जब यह बात पता चली तो मैंने उसे काफी समझाया, लेकिन वो नहीं मानी। तब उसे चेतावनी देकर नौकरी से निकाल दिया। लेकिन, इसके बाद भी वह चोरी-छिपे मेरे पति से मिलती रही।
डॉ. सीमा ने कहा कि जब मुझे पता चला कि सूर्या सिटी वाले मेरे मकान में वह रह रही है तो मुझे अच्छा नहीं लगा। मैंने उसे काफी समझाने की कोशिश की। वह मकान छोड़कर जाने को तैयार नहीं थी। गुरुवार को मैं अपनी सास के साथ उसे सिर्फ डराने आई थी।
गुस्से में मैंने स्प्रिट डालकर आग लगा दी थी। मैंने कमरे की कुंडी खोलकर दीपा को बचाने की कोशिश भी की, लेकिन भभकती आग के बीच डर के मारे कुंडी नहीं खोल पाई। तब शोर मचाकर लोगों से मदद के लिए गुहार की। पर आग इतनी भड़क चुकी थी कि कोई कुछ नहीं कर पाया।