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राजस्थान के 10 बड़े जाट नेताओं ने थामा कांग्रेस का हाथ

Wed, 17 Oct 2018 04:08 PM IST
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 17 Oct 2018 04:08 PM IST
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Rajasthan assembly elections 2018: Manvendra Singh and many Jaat leaders joins Congress
मानवेंद्र सिंह समेत 10 जाट नेता कांग्रेस में शामिल - फोटो : Amar Ujala
राजस्थान के शिव सीट से भाजपा के मौजूदा विधायक मानवेंद्र सिंह 10 बड़े जाट नेताओं के साथ कांग्रेस में शामिल हो गए हैं। मानवेंद्र राजस्थान के मारवाड़ क्षेत्र में प्रभाव रखने वाले पूर्व विदेश मंत्री जसवंत सिंह के बेटे हैं। 
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राजनीतिक जानकारों के मुताबिक राजस्थान के जातिय समीकरणों में यह एक ऐतिहासिक सोशल इंजीनियरिंग की मिसाल होगी। इसके दूरगामी राजनीतिक परिणाम आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों में देखने को मिल सकते हैं। माना जा रहा है कि राजस्थान की 100 विधानसभा सीटों व 18 लोकसभा सीटों पर इस सोशल इंजीनियरिंग का प्रभाव पड़ सकता है। इसके कारण 2018 के विधानसभा और 2019 लोकसभा चुनाव में भाजपा के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं। 
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कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की मौजूदगी में राजस्थान के कई बड़े जाट नेता नारायण राम बेड़ा, सुमित्रा सिंह, ऊषा पूनिया, ज्ञानप्रकाश पिलानिया, पूर्व केंद्रीय मंत्री जगदीप धनखड़, पूर्व सांसद हरिसिंह, सुभाष महरिया, पूर्व विधायक रणवीर पहलवान, जीतराम डूडी सहित कई जाट नेता कांग्रेस में शामिल हुए। 
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जाट राजपूत समीकरण राजस्थान की राजनीति में पहले भी अपना रंग दिखा चुके हैं। 1980 के दशक में किसी समय में धुर विरोधी रहे जाट नेता नाथूराम मिर्धा एवं राजपूत नेता कल्याण सिंह कालवी के बीच समन्वय कायम हुआ।

इसका नुकसान कांग्रेस को आज तक भुगतना पड़ा है क्योंकि इस समीकरण से पूर्व जाट समुदाय के नेता भाजपा को अछूत मानते थे और ना के बराबर जाट नेता भाजपा के साथ जुडने की आकांक्षा रखते थे। लेकिन इन दो नेताओं के गठजोड़ के कारण काफी संख्या में जाट नेताओं ने कालान्तर में भाजपा की ओर रुख किया। जो दो दशकों में भाजपा के लिए पूर्ण बहुमत में फलीभूत हुआ है। 

मानवेंद्र सिंह ने बीते 22 सितंबर को बाड़मेर में रैली कर भाजपा छोड़ने की घोषणा की थी। उन्होंने कहा था कि ‘कमल का फूल, हमारी भूल’ रही। वहीं, उनकी पत्नी चित्रा सिंह ने सरकार को उखाड़ फेंकने का आह्वान किया था। 


बता दें कि साल 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने जसवंत सिंह को टिकट नहीं दिया था। इससे उनको निर्दलीय ही चुनाव लड़ना पड़ा था। उस चुनाव में जसवंत सिंह हार गए थे। उसी समय से जसवंत सिंह का परिवार भाजपा से नाराज चल रहा था। 
 
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