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राजस्थान विधानसभा चुनाव: तीसरा मोर्चा बिगाड़ सकता है भाजपा-कांग्रेस का गणित
चुनाव डेस्क, अमर उजाला
Updated Wed, 31 Oct 2018 06:12 PM IST
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तीसरा मोर्चा
राजस्थान में ठीक चुनावों से पहले तीसरे मोर्चे ने सरगर्मियां बढ़ा दी हैं। हनुमान बेनीवाल ने सोमवार को हुंकार महारैली में अपनी नई पार्टी का एलान किया है। इस रैली में हनुमान बेनीवाल के साथ कद्दावर नेता घनश्याम तिवाड़ी और राष्ट्रीय लोक दल के नेता जयंत चौधरी भी मौजूद थे। इन तीनों का साथ बड़ी पार्टियों के लिए मुसीबत का सबब बन सकता है।
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हनुमान बेनीवाल की यह नई पार्टी राष्ट्रीय लोकतांत्रिक दल अगर बड़ा रूप लेती है तो जाहिर सी बात है कि राजस्थान के सियासी समीकरण में इस बार बदलाव हो सकते हैं। जाट नेता हनुमान बेनीवाल की मारवाड़ और शेखावाटी की जाट बेल्ट में पकड़ मजबूत है। भाजपा से अलग होकर भारत वाहिनी पार्टी बनाने वाले घनश्याम तिवाड़ी का शेखावाटी व जयपुर की कुछ सीटों पर प्रभाव है। श्रीगंगानगर व हनुमानगढ़ क्षेत्र में राष्ट्रीय लोक दल का बोलबाला है। उत्तर प्रदेश से सटे क्षेत्रों में समाजवादी पार्टी की पकड़ है। शेखावाटी व इन्दिरा गांधी नहर क्षेत्र के किसानों में माकपा का प्रभाव है।
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इस गठबंधन ने एक तरफ जहां कांग्रेस की पेशानी पर सिलवटें ला दी हैं, वहीं दूसरी तरफ भाजपा को इस गठबंधन से फायदा होने की उम्मीद है। माना जा रहा है बेनीवाल की राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) मुख्य तौर पर ऐसे पूर्व भाजपा नेताओं का एक साथ आना है, जो मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के नेतृत्व में अपने लिए कोई भविष्य नहीं देखते। इन लोगों का सामूहिक लक्ष्य खुद को ऐसी जगह ले जाना है, जहां से वो कांग्रेस और राजे दोनों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। उनकी राजनीति का खेल कुछ ऐसा है, जहां राजे को खत्म किया जा सके और राजस्थान में नया पावर सेंटर बनकर भाजपा में वापसी की जा सके।
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यह समीकरण कुछ ऐसा ही होने वाला है जैसा कर्नाटक में कुमारस्वामी और कांग्रेस का है। बेनीवाल पहले ही कांग्रेस के लिए कटुवचन बोल चुके हैं ऐसे में अगर इस चुनाव में त्रिशंकु विधानसभा का गठन करती है तो भाजपा और आरएलपी का गठबंधन होना तय है।