फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Rajasthan ›   Rajasthan assembly election 2018: dalit voters still to open cards for BJP congress

राजस्थान चुनाव: भाजपा और कांग्रेस के सारे समीकरण फेल, ऐसे बिगड़ रहा खेल

Thu, 06 Dec 2018 11:33 AM IST
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Updated Thu, 06 Dec 2018 11:33 AM IST
विज्ञापन
Rajasthan assembly election 2018: dalit voters still to open cards for BJP congress
BJP- Congress
राजस्थान में चुनाव प्रचार थम चुका है। प्रचार के दौरान नेताओं ने हर तबके को लुभाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी। इन सबमें दलित मतदाताओं का वर्ग एक ऐसा तबका का है जिसने अपने पत्ते नहीं खोले। राजनीतिक पंडितों की मानें तो इन चुनावों में एससी-एसटी एक्ट भी कुछ हद तक मुद्दा बनकर उभरा और इससे यह तबका काफी हद तक प्रभावित है। 
विज्ञापन

भारत बंद के दौरान हिंसा बना मुद्दा

3 अप्रैल को सवर्णों की एक उत्तेजित भीड़ ने एससी-एसटी एक्ट में हुए संसोधनों के विरोध में भारत बंद किया उस दौरान हिंडौन में जमकर हिंसा हुई थी। हिंडौन में दो नेताओं के घर तक को आग के हवाले कर दिया गया था।  हिंडौन में कांग्रेस उम्मीदवार भैरो लाल जाटव ने अपना घर अबतक नहीं दुरुस्त करवाया। उनके समर्थक कहते हैं कि घर को हुआ यह नुकसान उन्हें जातीय हिंसा की याद दिलाता है।
विज्ञापन


हिंसा में प्रभावित हुआ दूसरा घर बिलकुल दुरुस्त हो चुका है लेकिन भाजपा ने इस घर की मालिक और स्थानीय विधायक राजकुमारी को चुनावी मैदान में न उतारकर पूर्व आईएएस अधिकारी की बेटी मंजूलाल खैरवाल पर भरोसा जताया है। राजकुमारी जाटव ने हिंडौन में मुख्यमंत्री राजे की सभा को छोड़कर किसी भी कार्यक्रम में सक्रिय रूप से हिस्सा नहीं लिया। इस आरक्षित सीट पर जाटव मतदाताओं की संख्या सबसे ज्यादा है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


राजकुमारी ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में कहा कि मैंने करौली में प्रचार किया है, इसका कितना प्रभाव पड़ता है यह परिणाम के दिन 11 दिसंबर को पता चलेगा। वहीं हिंडौन भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि उन्होंने यहां एक दो कार्यक्रमों में हिस्सा लिया और पार्टी का प्रचार किया।

दलित मतदाता 16 फीसदी 

प्रदेश में दलित मतदाताओं की संख्या 16 फीसदी है। 20 मार्च को सुप्रीम फैसले ने अपने फैसले में एससी-एसटी एक्ट के अंतर्गत बिना प्रारंभिक जांच के गिरफ्तारी पर रोक लगाईं थी जिसके बाद अगस्त में संसद ने कानून में संसोधन करके गैरजमानती प्रावधान को वापस बरकरार कर दिया। 

भारतीय आंबेडकर पार्टी के लिए प्रचार कर रहे नंदलाल जाटव कहते हैं कि हिंडौन में 3 अप्रैल ही मुद्दा है। उस दिन हुई घटना ने इस सीट को सांप्रदायिक बना दिया है। इसलिए भाजपा ने अपने मौजूदा विधायक की जगह दूसरा उम्मीदवार खड़ा किया क्योंकि उन्हें दूसरे तबके के वोट चाहिए।

प्रदेशभर में अनुसूचित जाति की 34 सीटें हैं। नंदलाल कहते हैं कि हम भाजपा के लिए वोट नहीं कर सकते, कांग्रेस को वोट करना भाजपा को लाभ पहुंचाना है। इसलिए हमारे लिए आंबेडकर पार्टी ही विकल्प है। स्थानीय निवासी ने कहा कि पी एल पुनिया यहां अनुसूचित जाति आयोग के चेयरमैन होने के नाते आए मगर कांग्रेस नागौर की घटना पर चुप रही।


भाजपा के आतंरिक दस्तावेजों की मानें तो मेड़ता में 53 हजार अनुसूचित जाति, 43 हजार जाट मतदाता हैं। भाजपा ने भंवर राम जबकि कांग्रेस ने सोनू चितारा को खड़ा किया है। कुछ लोग इसे भाजपा द्वारा अनुसूचित जाति के मतों को बांटने का प्रयास मान रहे हैं। भाजपा और कांग्रेस के उम्मीदवार के अलावा लोगों के सामने तीसरा विकल्प हैं निर्दलीय लक्ष्मण राम जो खुद 2013 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ भाजपा प्रत्याशी से हार चुके हैं।

राजस्थान में सात दिसंबर को मतदान है और नतीजा 11 दिसंबर को आएगा। 

 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed